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Hindi News / स्वास्थ्य चिकित्सा / अंग्रेज वैज्ञानिकों ने भारत में उगने वाले बाबची के फूलों में ढूंढ़ा झुर्रियां मिटाने का फार्मूला, बीज सिर्फ 45 रुपए किलो मिलता है

अंग्रेज वैज्ञानिकों ने भारत में उगने वाले बाबची के फूलों में ढूंढ़ा झुर्रियां मिटाने का फार्मूला, बीज सिर्फ 45 रुपए किलो मिलता है



हेल्थ डेस्क.पथरीली जमीन पर उगने वाला बाबची पौधा चेहरे पर उम्र का असर घटाने के साथ दाग-धब्बों में भी कमी लाता है। ब्रिटिश जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, भारतीय पौधे बाबची के बीज में पाया जाने वाला केमिकल बाकूचियोल एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट है। जिसका इस्तेमाल लंबे समय से आयुर्वेदिक और चीनी दवाओं में किया जा रहा है। यह विटामिन-ए (रेटिनॉल) से बेहतर है।

आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण के मुताबिक, इसे बावची या बाकुची के नाम से भी जाना जाता है जिसे दाद, खुजली, सफेद दाग और दांत दर्द समेत कई रोगों में प्रयोग किया जाता है। बाबची के बीज और जड़ों का इस्तेमाल दवा की तरह होता है। जैसे बाबची की जड़ों को पीसकर और फूली हुई है फिटकरी को मिलाकर मंजन करने से दांतों का दर्द, कीड़ों और पायरिया की समस्या दूर होती है। इसके बीज 45 रुपए प्रति किलो की दर से ऑनलाइन खरीदे जा सकते हैं।

  1. ज्यादातर स्किनकेयर प्रोडक्ट में रेटिनॉल का इस्तेमाल एक एंटी-एजिंग तत्व के रूप में किया जाता है, यह विटामिन-ए का एक प्रकार है। लेकिन कई बार इसके साइडइफेक्ट स्किन पर लाल चकत्ते के रूप में सामने आते हैं। कुछ स्किन केयर प्रोडक्ट में विटामिन-ए के दूसरे प्रकार रेटनल और रेटिनिल का प्रयोग भी किया जाता है। लेकिन ऐसी महिलाएं जो प्रेग्नेंट या मां बनना चाहती हैं, उन्हें इसके इस्तेमाल की सलाह नहीं दी जाती है। क्योंकि इसकी हैवी डोज का साइड इफेक्ट बच्चे पर दिख सकता है।

  2. ऐसे खतरों से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने भारतीय पौधे बाबची का इस्तेमाल अपने शोध में किया। रिसर्च में 44 लोगों को शामिल किया गया। इन्हें रोजाना चेहरे पर दो बार 0.5 फीसदी बाकूचियोल या रेटिनॉल लगाने के कहा गया। ऐसा 12 हफ्तों तक किया गया।

  3. रिसर्च के बेहतर परिणामों को जानने के लिए शोधकर्ताओं ने तस्वीरों, चर्म रोग विशेषज्ञों की सलाह और यूजर से किए जाने वाले सवाल-जवाबों का सहारा लिया। परिणाम के रूप में सामने आया कि दोनों ही रसायनों ने चेहरे की 20 फीसदी झुर्रियों को कम किया। जिन्होंने रेटिनॉल का प्रयोग किया उन्हें स्किन पर चुभन शिकायत हुई। लेकिन सबसे ज्यादा लोगों ने बाकूचियोल का प्रयोग किया उनकी झुर्रियों और दाग-धब्बों में रेटिनॉल के मुकाबले काफी कमी आई।

  4. डर्मेटेलॉजिस्ट अंजली महतो का कहना है, साइडइफेक्ट सामने आने पर रेटिनॉल को हमेशा के लिए छोड़ना, सही नहीं है। इसके कई फायदे भी हैं। ऐसे लोग जो रेटिनॉल का इस्तेमाल नहीं पसंद करते वे रेटिनॉल के दूसरे प्रकार रेटिनल या रेटिनल का प्रयोग कर सकते हैं। इस शोध को काफी बड़े स्तर पर कराने की जरूरत है। तभी बेहतर पता चल पाएगा कि रेटिनॉल बाकूचियोल से बेहतर है या नहीं। हां, जो लोग रेटिनॉल को बिल्कुल भी नहीं पसंद करते वे बाकूचियोल का प्रयोग कर सकते हैं।

  5. भारत में बाबची का पौधा पथरीली जमीन वाले क्षेत्रों में पाया जाता है। इसकी ऊंचाई 1-4 फुट तक होती है। पत्ते की लंबाई 1 से 3 इंच की होती है। बैगनी रंग के फूले वाले इस पौधे का इस्तेमाल आयुर्वेद में बुखार, कुष्ट रोग, खाांसी, बवासीर, सूजन और दांतों में कीड़े के इलाज में किया जाता है। बाबची के बीजों से प्राप्त तेल सफेद दाग, दाद, खाज, मुंहासों, झांई जैसे चर्म रोगों में फायदा पहुंचाता है।

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      babchi seeds bakuchiol works as an anti aging agent and better than retiol or vitamin a

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