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अच्छी सेहत के लिए दिन भर में तीन या पांच बार खाएं खाना



हेल्थ डेस्क. यहां शीर्षक को पढ़कर कुछ पाठकों को लग सकता है कि दो वक्त खाने वालों की बात क्यों नहीं हो रही? तो अब वे दिन नही रहे जब हम दो वक्त का खाना खाकर भी स्वस्थ रहते थे, क्योंकि तब न वैसा तनाव था और न ही प्रदूषण। लेकिन अब भी कई लोग केवल दो समय का ही खाना खाते हैं- लंच और डिनर, लेकिन यह सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

अब समय आ गया है कि उतने ही खाने को जितना कि आप दो बार में खाते हैं, को तीन बार में खाएं। बल्कि अब तो कुछ विशेषज्ञ इसे तीन से भी ज्यादा चार या पांच बार में खाने की सलाह देते हैं। आज इसी बात पर चर्चा कर रही हैं डाइट एंड वेलनेस एक्सपर्ट डॉ. शिखा शर्मा कि हमें तीन बार खाना चाहिए या पांच बार?

  1. इसमें अपनी जरूरत के दिनभर के भोजन को तीन हिस्सों में बांटकर खाया जाता है, यानी ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर। इनके बीच में और कुछ नहीं खाया जाता। इस पैटर्न में ब्रेकफास्ट और लंच हैवी होना चाहिए और डिनर अपेक्षाकृत लाइट। यह पैटर्न आपको इस बात की सुविधा देता है कि आप अपनी भूख या शेड्यूल के हिसाब से खाने की मात्रा को ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर में कम-ज्यादा कर सकते हैं। हालांकि कुल मात्रा कमोबेश घटनी या बढ़नी नहीं चाहिए।

  2. इसमें आपके दिनभर के भोजन को तीन हिस्सों में तो बांटा ही जाता है, जैसे ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर। साथ ही ब्रेकफास्ट व लंच और लंच व डिनर के बीच भी छोटे-छोटे स्नैक होते हैं। अगर इसे सही तरीके से अमल में लाया जाए तो यह सबसे बेहतर है। इससे न केवल बीच-बीच में जंक फूड खाने से बचा जा सकता है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर मोटापे की समस्या को भी कम किया जा सकता है।

  3. दोनों ही पैटर्न अपने आप में सही हैं। अगर आपके लिए पांच बार खाना संभव न हो तो तीन बार खाने के पैटर्न का भी चयन कर सकते हैं। लेकिन अगर आपके पास समय और सुविधा दोनों हैं तो पांच बार मील्स पैटर्न को ही चुनना चाहिए। कुछ बीमारियों जैसे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम(आईबीएस) और डायबिटीज के मरीजों को पांच बार खाने की सलाह तो डॉक्टर्स भी देते हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए तो हर तीन-चार घंटे में कुछ न कुछ हेल्दी खाना अनिवार्य होता है ताकि उनके ब्लड में शुगर का लेवल मेंटेन रहे। इसके अलावा बहुत छोटे बच्चों और 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए भी पांच बार मील्स का पैटर्न अपनाया जाना चाहिए, क्योंकि इस पैटर्न में छोटे-छोटे मील्स होते हैं, जिसे पचाने में दिक्कत नहीं होती।

  4. अगर आप तीन मील्स पैटर्न को आजमाते हैं तो आपको बीच-बीच में अधिक पानी या अन्य पेय पदार्थ लेने होंगे, क्योंकि इसमें एक साथ ज्यादा खाना खाया जाता है। ऐसे में बेहतर पाचन के लिए अधिक से अधिक पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए। पेय पदार्थ साधारण पानी के अलावा नींबू पानी, नारियल पानी जैसा कुछ भी हो सकता है। और चूंकि आपका डिनर बहुत ज्यादा हलका नही होगा। ऐसे में जरूरी है कि आप इसे सोने के कम से कम तीन घंटे पहले लें।

    अगर आप 5 मील्स पैटर्न को आजमाते हैं तो आपको चाहिए कि आप बीच-बीच में चाय या कॉफी न लें क्योंकि इससे भूख नहीं लगेगी और आपके 5 मील्स पैटर्न में खलल पैदा होगी। इसके अलावा एक बात का और ध्यान रखें कि 5 बार खाने का मतलब ज्यादा खाने से कतई नहीं है। जितना आप तीन बार के मील्स में खाते हैं, उतने को ही 5 बार में खाना है। इसमें खतरा यही है कि कई बार लोग ओवरईटिंग कर जाते हैं।

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      how many meals in a day is perfect- Diet salah by dr shikha sharma

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