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अबू धाबी में 49 डिग्री पर ट्रेनिंग लेकर, पार की ठंडी इंग्लिश चैनल



खेल के प्रति मेरा झुकाव बचपन से ही था। मेरे दो मामा कबड्डी के अच्छे खिलाड़ी थे और बड़े मामा एथलेटिक्स में थे, इस कारण घर में शुरू से स्पोर्ट्स का माहौल रहा। मुझे बचपन में सर्दी-खांसी बहुत होती थी, फेफड़े भी कमजोर थे। मैं जब दो-तीन वर्ष का था तब डाॅक्टर ने मां से कहा कि इसे स्विमिंग या एथलेटिक्स में डालो। खेलने-कूदने से स्ट्रांग हो जाएगा, फेफड़े भी मजबूत होंगे।

मैं पुणे के जिस नूतन मराठी स्कूल में पढ़ता था, उसमें स्विमिंग पूल था। मां ने मुझे वहां भेजना शुरू कर दिया। मुझे स्विमिंग से डर लगता था तो घर वाले पकड़कर ले जाते थे। कुछ समय बाद मेरा डर निकल गया और सर्दी-खांसी भी ठीक हो गई, लेकिन मेरी रुचि क्रिकेट में ज्यादा थी। छुट्टियों में 10 से 11 घंटे मैं मैदान पर ही रहता था। पापा पुलिसकर्मी और मां गृहिणी, दोनों चाहते थे कि मैं स्विमिंग या एथलेटिक्स में कॅरिअर बनाऊं।

पांचवीं क्लास में पहुंचा तो माता-पिता ने बड़े पूल में तैराकी शुरू करवा दी। मुंबई में ‘संग राॅक टू गेटवे ऑफ इंडिया’ स्पर्धा के बारे में पता चला तो माता-पिता ने पूछा तैर लोगे? तब मैं 11 वर्ष का था। यह अरब सागर में 5 किमी की ओपन वॉटर स्पर्धा रहती है। जनवरी 1996 में मैंने इसमें भाग लिया। यहीं से मेरी स्विमिंग यात्रा शुरू हुई। इसके बाद मुंबई के पास धरमतर से ‘गेटवे ऑफ इंडिया तक सोलो स्विमिंग स्पर्धा’ में भाग लेकर मैंने समुद्र में 37 किमी की दूरी 7 घंटे 28 मिनट में पूरी की तो 11 वर्ष की उम्र में इस स्पर्धा में भाग लेने वाले पहले भारतीय का खिताब मिला।

इसी वर्ष हमने पढ़ा कि पूर्व राष्ट्रीय स्विमर बुला चौधरी ने इंग्लिश चैनल पार कर ली है। माता-पिता ने पूछा तुम भी इंग्लिश चैनल पार करना चाहते हो? मैंने हामी भर दी, मैं तैराकी में लगातार अच्छा प्रदर्शन जो कर रहा था। हमें पता चला इसमें भाग लेने के लिए 16 वर्ष का होना जरूरी है और मैं 11 का ही था। फिर मैं स्कूल की तरफ से स्टेट लेवल की स्पर्धाएं जीतता चला गया। 12वीं बोर्ड में अच्छे नंबर आए तो सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला मिल गया।

12वीं के बाद मेरी स्विमिंग बंद हो चुकी थी, मुझे आईटी में जॉब मिला। 26 वर्ष का होने तक होम लोन सहित परिवार की जरूरतें पूरी करता रहा। इसी बीच कंपनी ने 2013 में मुझे अबू धाबी भेज दिया। जब वहां घूम-फिरकर ऊब गया तो सोचा क्या करूं? मैंने दोबारा स्विमिंग शुरू कर दी। इसी बीच फेसबुक पर इंग्लिश चैनल की एक खबर पढ़ी तो बचपन की इच्छा फिर प्रबल होने लगी कि क्यों न मैं इंग्लिश चैनल पार कर लूं? फिर पता चला कि इसमें भाग लेने के लिए दो साल की ट्रेनिंग जरूरी होती है।

इसी के साथ इस वर्ष के सभी स्लाॅट बुक हो चुके थे। मैं निराश हो गया। जनवरी 2014 में एक मेल आया कि जुलाई का एक स्लाॅट बचा है। मैंने वक्त जाया न करते हुए उसे बुक करके अबू धाबी में ही ट्रेनिंग शुरू कर दी। इसी बीच कई मुश्किलें खड़ी हो गईं। पिताजी पुलिस में थे, उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हो गया तो मैं तुरंत पुणे पहुंचा। कुछ समय बाद पिता की हालत सुधरी तो अबू धाबी लौटा। यहां 48-49 डिग्री तापमान था, जबकि यूके में इस समय 15-16 डिग्री के आसपास रहता है।

मैंने कठिन परिस्थितियों में नौकरी के साथ 8-8 घंटे लंबी तैराकी की प्रैक्टिस शुरू की। इसके बाद कोल्ड वॉटर स्विमिंग प्रैक्टिस के लिए स्पर्धा शुरू होने के एक महीना पहले यूके चला गया। वहां बर्फ जैसे पानी में महीनाभर खूब प्रैक्टिस की। स्पर्धा खत्म हुई तो मेरा नाम विजेता के रूप में दर्ज हुआ। अन्य तैराक दो वर्ष प्रैक्टिस करते हैं, मैंने छह महीने की प्रैक्टिस में 26 जुलाई 2014 को इंग्लिश चैनल 13 घंटे 23 मिनट में पार कर लिया था। इस तरह 17 वर्ष बाद मेरा बचपन का सपना पूरा हुआ।

मेरी इंजीनियरिंग पूरी हो चुकी थी। मैं दिनभर नौकरी करता और सुबह-शाम स्विमिंग प्रैक्टिस करता था। शरीर को पूरी तरह आराम भी नहीं मिलता था। यह सिलसिला 2013 से 2018 तक चला, तब जाकर मैं इंग्लिश चैनल, मोलोकोई चैनल व नॉर्थ चैनल पार कर कीर्तिमान बना पाया हूं।

नाॅर्थ चैनल बहुत कठिन था। इसे पार करने में मुझे 12 घंटे से ज्यादा लगे थे, जबकि 10 घंटे बाद मेरे शरीर ने लगभग काम करना बंद कर दिया था। मैं किस तरह स्विमिंग करता रहा पता नहीं, लेकिन मैंने कर दिखाया। कुक स्ट्रैट में करीब 22 किलोमीटर दूरी मैंने 8.37 घंटे में पूरी की। इसके लिए मैं 2015 से कोशिश कर रहा था। इसके बाद मैंने सबसे कठिन ओशन-7 चैलेंज पूरा किया। इस मैराथन में सात समुद्री चैनल्स के गहरे हिस्से को पार करना होता है। तेज हवा और समुद्री उथल-पुथल बहुत परेशान करते हैं।

ओशन-7 पार करने वाला मैं दुनिया का नौवां तथा पहला भारतीय व पहला एशियाई हूं। मुझे सबसे युवा तैराक माना गया। मेरा नाम लिम्का बुक में दर्ज हुआ है। यह रिकॉर्ड मैंने 2018 में बनाया था, लेकिन इसकी अधिकृत घोषणा 2019 में हुई है। मेरा पहला टारगेट ओशन-7 पूरा करना था। अब मैं 2020 में होने वाले ओपन वॉटर स्विमिंग ओलिंपिक की तैयारी में जुटा हूं। इसमें 10 व 25 किमी की दो स्पर्धाएं होती हैं, जिसमें दुनियाभर के तैराक भाग लेते हैं। भारत से अभी तक इस स्पर्धा में कोई नहीं गया है। मेरे ओलिंपिक में पहुंचने से पहले कई चुनौतियां आएंगी। मां ने कहा- हम चुनौतियों का सामना करेंगे तो ही कामयाब बन पाएंगे। पुणे में मेरे पास देशभर से युवा आ रहे हैं, जिन्हें मैं फ्री में तैराकी की ट्रेनिंग दे रहा हूं।(जैसा उन्होंने मुंबई के विनोद यादव को बताया)

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रोहन दत्तात्रय मोरे, ओशन-7 चैलेंज पार करने वाले पहले भारतीय तैराक

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