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Hindi News / स्वास्थ्य चिकित्सा / आईवीएफ ट्रीटमेंट में बदल गए भ्रूण, महिला ने दूसरे दंपति के जुड़वा बच्चों को दिया जन्म, मामला कोर्ट पहुंचा

आईवीएफ ट्रीटमेंट में बदल गए भ्रूण, महिला ने दूसरे दंपति के जुड़वा बच्चों को दिया जन्म, मामला कोर्ट पहुंचा



हेल्थ डेस्क. डिलीवरी के बाद नवजात बदलने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं लेकिन भ्रूण बदलने का संभवत: यह पहला न्यूयॉर्क में हाल ही में मामला सामने आया है। बच्चे न होने पर एशियाईदंपति एक फर्टिलिटी क्लीनिक में आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए पहुंचे। डिलीवरी के बाद डीएनए टेस्ट से पता चला दोनों ही बच्चे उनके नहीं है। मामला अमेरिका की स्थानीय अदालत तक पहुंच चुका है।

  1. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दंपति पिछले साल आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए सीएचए फर्टिलिटी क्लीनिक पहुंचे थे। क्लीनिक ने इस एशियाई दंपति के स्पर्म और एग लेकर 5 भ्रूण तैयार किए थे। इसमें 4 लड़कियों और एक लड़के का भ्रूण था।

  2. आईवीएफ ट्रीटमेंट से पहलाप्रयास असफल रहा। पिछले साल सितंबर में दूसरे प्रयास में महिला प्रेग्नेंट हुई और सोनोग्राफी जांच में दो जुड़वा बच्चों की पुष्टि हुई। चौकाने वाली बात यह थी कि दोनों भ्रूण लड़के के थे। जबकि आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान तैयार उनके पांच भ्रूण में से सिर्फ एक ही लड़के का था।

  3. मामले की शिकायत दंपति ने क्लीनिक के सह-मालिक से की, इस पर उनका जवाब था कि सोनोग्राफी एक शत-प्रतिशत जानकारी देने वाली जांच नहीं है। उन्हें सिर्फ इसके परिणाम पर भरोसा नहीं करना चाहिए। नौ महीने बाद महिला ने दो बच्चों को जन्म दिया। दोनों ही बच्चे एशियाई नहीं थे जबकि दंपति एशिया के रहने वाले हैं।

  4. बच्चों का डीएनए टेस्ट किया गया तो सामने आया कि दोनों में से कोई बच्चा उनका नहीं था। दोनों ही बच्चे अलग-अलग दंपति के थे। इस कारण बच्चों को उन्हें उनके माता-पिता को सौंपना पड़ा।ट्रीटमेंट के दौरान दंपति ने 68 लाख रुपए खर्च किए हैं। इसमें डॉक्टर की फीस, दवाएं, जांच और यात्रा का खर्च शामिल है।

  5. दंपति का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें शारीरिक और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा। उन्हें यह भी नहीं मालूम है कि उनसे भ्रूण कहां हैं क्योंकि क्लीनिक से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ जवाब नहीं दे रहे हैं। जवाब न मिलने पर मामला 1 जुलाई को कोर्ट में सुनवाई के लिए पहुंचा है।

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