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आमलकी एकादशी आज: इस दिन की जाती है भगवान विष्णु और आंवला वृक्ष की पूजा, इस एकादशी को माना गया है पापों का नाश करने वाली



रिलिजन डेस्क। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहते हैं। यह एकादशी सभी पापों का नाश करने वाली मानी गई है। इस दिन भगवान विष्णु व आंवला वृक्ष की पूजा करने का विधान है। इस बार यह एकादशी 17 मार्च, रविवार को है।

इस विधि से करें आमलकी एकादशी का व्रत
– आमलकी एकादशी की सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र एक साफ स्थान पर स्थापित करें।
– प्रतिमा या चित्र के सामने हाथ में तिल, कुश (एक प्रकार की घास), सिक्का और जल लेकर संकल्प करें कि मैं भगवान विष्णु की प्रसन्नता एवं मोक्ष की कामना से आमलकी एकादशी का व्रत रखता हूं। मेरा यह व्रत सफलतापूर्वक पूरा हो, इसके लिए श्रीहरि मुझे अपनी शरण में रखें।
– इसके बाद नीचे लिखा मंत्र बोलें-
मम कायिकवाचिकमानसिक सांसर्गिकपातकोपपातकदुरित क्षयपूर्वक श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त फल प्राप्तयै श्री परमेश्वरप्रीति कामनायै आमलकी एकादशी व्रतमहं करिष्ये।
– संकल्प के बाद भगवान विष्णु की षोड्षोपचार (सोलह सामग्री से) पूजा करें। इसके बाद आंवले के वृक्ष की पूजा करें।
– सबसे पहले वृक्ष के चारों ओर की भूमि को साफ करें और उसे गाय के गोबर से पवित्र करें। पेड़ के नीचे एक कलश स्थापित करें।
– इस कलश के ऊपर एक दीपक लजाएं। कलश पर चंदन का लेप करें और वस्त्र पहनाएं। अंत में कलश के ऊपर भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की सोने की मूर्ति (अपनी इच्छा के अनुसार चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी की) स्थापित करें और विधिवत रूप से परशुरामजी की पूजा करें।
– रात में भागवत कथा व भजन कीर्तन करते हुए प्रभु का स्मरण करें। द्वादशी (18 मार्च, सोमवार) तिथि को सुबह ब्राह्मणों को भोजन करवाकर दक्षिणा दें।
– साथ ही भगवान परशुराम की मूर्ति सहित कलश ब्राह्मण को भेंट करें। इसके बाद ही स्वयं भोजन करें।

जानिए आमलकी एकादशी का महत्व
– आमलकी यानी आंवला को हिंदू धर्म में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है, जैसा नदियों में गंगा को प्राप्त है और देवों में भगवान विष्णु को।
– मान्यता के अनुसार, विष्णुजी ने जब सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा को आदेश दिया, उसी समय उन्होंने आंवले का वृक्ष भी उत्पन्न किया।
– आंवला वृक्ष को भगवान विष्णु ने आदि वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया है। इसके हर अंग में ईश्वर का स्थान माना गया है।
– आमलकी एकादशी पर आंवला वृक्ष का स्पर्श करने से दुगुना व इसके फल खाने से तिगुना पुण्य प्राप्त होता है।
– धर्म ग्रंथों के अनुसार, आंवला वृक्ष के मूल भाग में विष्णु, ऊपर ब्रह्मा, तने में रुद्र, शाखाओं में मुनिगण, टहनियों में देवता, पत्तों में वसु, फूलों में मरुदगण और फलों में समस्त प्रजापति वास करते हैं।
– पुराणों में भगवान विष्णु ने कहा है जो प्राणी स्वर्ग और मोक्ष प्राप्ति की कामना रखते हैं, उनके लिए फाल्गुन शुक्ल पक्ष में जो पुष्य नक्षत्र में एकादशी आती है, उस एकादशी का व्रत अत्यंत श्रेष्ठ है। इस एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है।

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