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ईपीएफ घोटाले में रिकवरी के साथ हो कार्रवाई : नांदल मैं डेपुटेशन पर बाहर था, मैंने तो खुद जांच करवाई : प्रिंसीपल




जाट शिक्षण संस्था के सीआर बहुतकनीकी संस्थान में ईपीएफ घोटाले के आरोपों को लेकर जांच रिपोर्ट आजीवन सदस्य चंचल नांदल व सीआर बहुतकनीकी कर्मचारी एसोसिएशन के प्रधान सुखबीर किन्हा ने सार्वजनिक की है। जिला प्रशासन की ओर से बनाई गई जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की। मैना पर्यटक केंद्र पर पत्रकार वार्ता में चंचल नांदल ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रशासक को तुरंत प्रभाव से दोषियों को पदमुक्त कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

तीन सदस्यीय कमेटी का किया था गठन

उन्होंने बताया कि इस मामले में 28 अगस्त 2018 को सीआर बहुतकनीकी कर्मचारियों के ईपीएफ घोटाले की जांच करने के लिए 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था। इसमें डीआरडीए के लेखा अधिकारी शंकर बत्तरा को कन्वीनर व अमन कौशिक व धर्मराज को समिति सदस्य बनाया था। इनकी ओर से अपनी जांच रिपोर्ट संस्थान के प्रशासक अतिरिक्त उपायुक्त अजय कुमार को सौंप दी है।

घाेटाला सामने आने पर कर्मचारियों ने बैठक की, एक कर्मचारी ने पैसे वापस भी लौटाए, एक मुकरा

चंचल नांदल ने बताया कि यह घोटाला 2018 में संस्थान के लिपिक के माध्यम से संज्ञान में आया। घोटाला सामने आने पर कर्मचारियों ने बैठक की। इस घोटाले में सतबीर व प्रवीण का नाम सामने आया। बैठक में उन्होंने पंचायती तौर पर आधा-आधा पैसा लौटाने की हामी भरी तथा सुपरिंटेंडेंट सतबीर ने तो 20 लाख 56 हजार 614 रुपए वापिस लौटा दिए। इसमें से 12 लाख 41 हजार रुपए कर्मचारियों के खाते में व 8 लाख 15 हजार रुपए सोसायटी के खाते में जमा करवा दिए, जबकि प्रवीण अपने हिस्से की राशि देने से मुकर गया। आजीवन सदस्य चंचल नांदल ने कहा कि जांच में आए आरोपियों को तुरंत पद से मुक्त किया जाए व इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए संस्थाओं में बिगड़ते हुए माहौल को दुरुस्त किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी संस्थानों में स्थित एक स्कूल व ए महिला कॉलेज में प्रिंसिपल की ओर से की गई अनियमितताओं के मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस 48 लाख रुपए के ईपीएफ घोटाले की जांच समिति ने सीआर बहुतकनीकी संस्थान के प्रिंसिपल को सीधे तौर पर दोषी पाया गया व 2 पूर्व प्रिंसिपल भी संदेह के घेरे में आए हुए हैं।

मेरा ईपीएफ बंटवारे से कोई लेना-देना नहीं

<img src="images/p2.png"यह मामला 1982 से 1991-92 का है। उस समय के प्राचार्य द्वारा ईपीएफ में पैसा जमा नहीं करवाया गया था। 2004 में कोर्ट में केस हारने के बाद एवं ईपीएफ कार्यालय के आदेशानुसार कर्मचारियों का पैसा ईपीएफ कार्यालय में भेजा गया था। इसके बाद 2009 में भी कोर्ट के आदेश अनुसार पैसा ईपीएफ कार्यालय भेजा गया। इसके बाद मैं 2010 से 2014 तक संस्थान में कार्यरत नहीं था, लेकिन इसी दौरान 2012 में जब ईपीएफ आफिस से यह धनराशि कर्मचारियों के खाते में आई, इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं थी। जून 2018 में जब इस बारे में संदेह हुआ तो मैंने संस्थान के स्तर पर ही पहली बार स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच करवाई। इसमें पता चला कि करीब 48 लाख रुपए की राशि दो कर्मचारियों सतबीर सिंह व प्रवीण के द्वारा हेराफेरी की गई है। स्टाफ के सहयोग से इस राशि को रिकवर करने के प्रयास किए गए, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हुए। यह मामला मैंने एडीसी के संज्ञान में लाया तथा मामले की जांच करने का अनुरोध किया। ऐसे में यह साफ है कि ईपीएफ से वापस आई धनराशि के बंटवारे से मेरा कोई लेन-देन नहीं है। जहां तक जांच रिपोर्ट की बात है तो अधिकारिक तौर पर मुझे कोई सूचना नहीं दी गई है। – बलजीत सिंह हुड्डा, प्रिंसीपल, सीआर बहुतकनीकी।

दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और स्टाफ के भविष्य निधि की पाई-पाई खातों में डलवाने की मांग

स्टाफ यूनियन के प्रधान सुखबीर किन्हा ने दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की व स्टाफ के भविष्य निधि का पाई-पाई उनके खातों में डलवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रिंसिपल को वित्तीय अनियमितताओं के चलते तुरंत प्रभाव से पद से हटाया जाए व उनके खिलाफ जल्द से जल्द विभागीय कार्रवाई भी की जाए। आजीवन सदस्य मास्टर देवराज नांदल ने कहा कि पहले इस तरह के घोटाले कभी नहीं होते थे। इस अवसर पर जयकंवार, राजीव शर्मा, अशोक मान, निर्मला, अनिल दूहन, हिमांशु राठी, दीपक मलिक, रविन्द्र सहित छोटू राम बहुतकनीकी के स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।

जांच कर ली पूरी : एडीसी

सीआर बहुतकनीकी संस्थान में ईपीएफ मामले को लेकर तीन सदस्यीय कमेटी गठित थी। जांच पूरी हो चुकी है। इस मामले में जो भी कार्रवाई होगी उस पर जल्द फैसला किया जाएगा। अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। – अजय कुमार, एडीसी।

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