ब्रेकिंग न्यूज
loading...
Hindi News / राज्य / राजस्थान / एक बाल टूटने से कराह जाते हैं हम और ये संत अपने हाथों से उखाड़ते हैं सिर, दाढ़ी और मूंछ के बाल, साल में 3 से 4 बार करना होता है ऐसा, बालों को उखाड़ने के लिए करते इस चीज का उपयोग

एक बाल टूटने से कराह जाते हैं हम और ये संत अपने हाथों से उखाड़ते हैं सिर, दाढ़ी और मूंछ के बाल, साल में 3 से 4 बार करना होता है ऐसा, बालों को उखाड़ने के लिए करते इस चीज का उपयोग



डूंगरपुर (राजस्थान)।भगवान महावीर त्याग, समर्पण और सदमार्ग का दूसरा नाम। जैन धर्म में साधुत्व यानी कठिन साधना का पथ। यहीं से संत का संतत्व निखरकर कुंदन बनता हैं। इसी कठिन साधना का एक पथ है केशलोंच। हमारा एक बाल टूटते ही हम कराह टूटते है और बाल तोड़ बीमार कर देता है। वहीं, जैन संत अपने हाथों से न सिर्फ सिर के बाल, अपितु मूंछ और दाढ़ी के बाल भी एक-एक पल भर में तोड़ देते हैं। ऐसा नहीं कि एक एक बार की विधि हैं। साल में तीन से चार बार केशलोंच की परम्परा होती ही हैं।

केशलोंचजैन धर्म की कठिन तपस्या का अनिवार्य हिस्सा

जैन संत अपने हाथों से घास फूस की तरह सिर, दाढ़ी व मूंछ के बाल को आसानी से उखाड़ देते हैं। यह पल देखते ही कई श्रद्धालु भी भाव विभोर हो जाते है। जैन साधु की कठिन तपस्या में केशलोंच भी मूलगुण में शामिल है। बताते हैं कि इससे जैन साधु में शरीर की सुंदरता का मोह खत्म हो जाता है। जैन साधु जब केशलोंच करते है तो आत्मा की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है।अपने आत्म सौंदर्य बढ़ाने के लिए कठिन साधना करते हैं। इससे संयम का पालन भी होता है।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


Dungarpur Rajasthan News in Hindi story of Method kesalonch jain muni

Check Also

अशोक गहलोत बोले- मोदी जी असत्य बोलकर दुनिया को आप क्यों मूर्ख बनाते हो

जैतारण. राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत सोमवार को जैतारण पहुंचे। यहां उन्होंने सभा को संबोधित …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *