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औरंगजेब के सैनिकों ने किया था नीलकण्ठेश्वर प्रतिमा पर तलवार से वार, निकल पड़ी थी दूध की धार



ललितपुर. कस्बा पाली स्थित श्री नीलकण्ठेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। सोमवार को तड़के से ही लोगों ने यहां भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। मान्यता है कि, औरंगजेब के सैनिकों ने नीलकण्ठेश्वर की प्रतिमा को खंडित करने के लिए तलवार से प्रहार किया, लेकिन प्रतिमा से दूध की धारा बह निकली थी। यह देख मुगल सेना वहां से भाग निकली थी। ऐसे नीलकण्ठेश्वर महाराज की अदभुत प्रतिमा की पूजा अर्चना के लिये प्रतिवर्ष हजारों लोग महाशिवरात्रि पर आते हैं। प्रतिमा के पीछे हिस्से में एक दरार थी, जिसमें सिक्का डालने पर नीचे से खजाने में गिरने जैसे आवाज आती थी। बाद में उस दरार को बंद कर दिया गया।

विंध्याचल पर्वत पर स्थापित है मंदिर

मुख्यालय से 25 किमी दूर कस्बा पाली में विंध्यांचल पर्वत की पहाड़ी पर 1300 वर्ष पूर्व चंदेलकालीन राजाओं द्वारा निर्मित श्री नीलकण्ठेश्वर मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बना हुआ है। यह मंदिर अपनी कोख में हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति व सभ्यता को संजोए है। यही वजह है कि वर्ष भर यहां पर शिवभक्तों का तांता लगा रहता है। मंदिर जाने के लिए करीब 108 सीढ़ियो पर चढ़कर पहुंचा जाता है। मंदिर में काले व बलुवे पत्थर पर भगवान शिव की त्रिमुखी अदभुत प्रतिमा विराजमान है।

पर्यटक फिरोज इकबाल व पत्रकार अमित पांडेय बताते हैं कि नीलकण्ठेश्वर की प्रतिमा नवीं, दसवीं सदी में चंदेल कालीन राजाओं द्वारा बनाया गया था। मंदिर में भगवान शिव की त्रिमुखी प्रतिमा के नीचे फर्श पर एकमुखी शिवलिंग स्थापित है। शिवभक्त इसे भगवान भोलेनाथ के अर्धनारीश्वर रूप मानते हैं।

मंदिर के पीछे थी दरार, सिक्का डालने पर खजाने की आती थी आवाज

दन्तकथा के अनुसार मुगलकाल में जब औरगंजेब की सेना ने इस पौराणिक प्रतिमा को खण्डित करने के लिए हमला किया था तो एक सैनिक ने तलवार से प्रतिमा के दाएं भाग पर प्रहार किया था। जिसमें चोट लगे स्थान से दूध की धारा बह निकली थी। भोले बाबा का यह अदभुत चमत्कार देख मुगलसेना इस महिमा को वहां से भाग खड़ी हुयी। जानकार बताते हैं कि, मंदिर के पीछे हिस्से में एक दरार थी। यहां सिक्का रखकर अंगुली से ढकेलने पर पीछे खजाने में गिरने जैसी आवाज आती है। हालांकि, इस दरार को बंद कर दिया गया है, फिलहाल महाशिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु पूजा के लिए आते हैं और उनकी जो भी मन्नत मांगी जाती है उनकी मन्नते पूरी होती है।

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भगवान नीलकंठेश्वर की त्रिमुखी प्रतिमा।

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