ब्रेकिंग न्यूज
loading...
Hindi News / मनोरंजन / कभी अमिताभ बच्चन से ज्यादा फीस लेते थे प्राण, मंटो ने दिलवाई थी बॉलीवुड फिल्म जिद्दी

कभी अमिताभ बच्चन से ज्यादा फीस लेते थे प्राण, मंटो ने दिलवाई थी बॉलीवुड फिल्म जिद्दी



बॉलीवुड डेस्क. ‘इस इलाके में नए आए हो बरखुरदार, वर्ना यहां शेर खान को कौन नहीं जानता!’ अपनी फिल्मों में न जाने कितने ही ऐसे दमदार और उम्दा डायलॉग बोलने वाले प्राण की 12 जुलाई को पुण्यतिथि है। कहते हैं कि एक खलनायक की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगता है कि लोग उससे कितनी नफरत करते हैं। प्राण अभिनय में तो उम्दा थे ही, इस पैमाने पर भी खरे उतरते हैं। प्राण के द्वारा निभाए गए खलनायकों के किरदार के चलते लोग उन्हें सड़कों पर गालियां देते थे।

एक समय में लोगों ने अपने बच्चों का नाम प्राण रखना तक बंद कर दिया था। प्राण ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था- ‘उपकार’ से पहले सड़क पर मुझे देखकर लोग कहते ‘अरे बदमाश’, ‘ओ लफंगे’, ‘ओ गुंडे’ कहा करते थे। मुझ पर फब्तियां कसते। उन दिनों जब मैं परदे पर आता था तो बच्चे अपनी मां की गोद में दुबक जाया करते थे और मां की साड़ी में मुंह छुपा लेते।

रुंआसे होकर पूछते- मम्मी गया वो, क्या अब हम अब अपनी आंखें खोल लें। 12 फरवरी, 1920 को एक सरकारी ठेकेदार लाला केवल कृष्ण सिंकद के घर दिल्ली में पैदा हुए प्राण12 जुलाई, 2013 को हिंदी सिनेमा को 400 से भी ज्यादा फिल्मों का तोहफा देकर इस दुनिया से चले गए।प्राण की जिंदगी की कहानी ढेरों किस्सों और उपलब्धियों से भरी हुई है।

  1. बंटवारे से पहले उन्होंने अपना करियर बतौर फोटोग्राफर शुरू किया था और फिर इत्तेफाकन उनकी मुलाकात एक फिल्म निर्माता से हुई। प्राण ने अपने पिता को यह नहीं बताया था कि वह शूटिंग कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर था कि उनके पिता को यह पसंद नहीं आएगा। जब अखबार में उनका पहला इंटरव्यू छपा था तो उन्होंने अखबार ही छुपा लिया, लेकिन फिर भी उनके पिता को इस सबकी जानकारी मिल गई। प्राण के इस करियर के बारे में जानकर उनके पिता को भी अच्छा लगा था जैसा कि प्राण ने कभी नहीं सोचा था।

  2. प्राण सिगरेट के बेहद शौकीन थे। प्राण 12 साल की उम्र से ही सिगरेट पीने लगे थे। इसी कारण शहर की कई पान की दुकान वालों से उनकी पहचान-सी हो गई थी। पान वाला उनकी शक्ल देखते ही उनके ब्रांड की सिगरेट निकालकर सामने रख दिया करता था। ऐसे ही एक दिन जब वे सिगरेट पीने पान की दुकान पर गए तो वहां उन्हें पटकथा लेखक वली मोहम्मद वली मिले। वली मोहम्मद ने उनको देखा, तो ध्यान से घूरने लगे। वली मोहम्मद ने वहीं एक छोटे से कागज पर अपना पता लिखकर प्राण को दिया और मिलने को कहा। मगर प्राण साहब ने वली मोहम्मद और उस कागज के टुकड़े को जरा भी तवज्जो नहीं दी।

  3. कुछ दिनों के बाद जब वली मोहम्मद प्राण से टकराए तो उन्होंने प्राण को फिर याद दिलाया। आखिर प्राण साहब ने चिड़चिड़ाकर उनसे पूछ ही लिया कि वे क्यों उनसे मिलना चाहते हैं। जवाब में वली मोहम्मद ने फिल्म वाली बात बतलाई। दिलचस्प बात यह है, तब भी प्राण ने उनकी बात को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया, मगर मिलने को तैयार हो गए। आखिरकार, जब मुलाकात हुई तो वली मोहम्मद ने प्राण को राजी कर लिया। इस तरह प्राण पंजाबी में बनी अपने करियर की पहली फिल्म यमला जट में आए। इसी कारण प्राण साहब वली मोहम्मद वली को अपना गुरु और पथप्रदर्शक मानते रहे।

  4. प्राण की जिंदादिली और संजीदा मिजाज को उनके चाहने वाले लोग बेहद पसंद करते थे। प्राण की पढ़ाई-लिखाई कपूरथला, उन्नाव, मेरठ, देहरादून और रामपुर जैसे शहरों में हुई। उनके पिता सड़कें और पुल बनाया करते थे। कहा जाता है कि देहरादून शहर का कालसी ब्रिज लाला केवल कृष्ण सिकंद ने ही बनवाया था। साल 1945 में प्राण की शादी शुक्ला अहलूवालिया से हुई, जिनसे उन्हें दो बेटे अरविंद और सुनील व एक बेटी पिंकी हुई।

  5. बंटवारे के बाद प्राण को अपना फिल्मी करियर मुंबई आकर दोबारा से शुरू करना पड़ा। मुंबई में प्राण को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। काम मिलने में मुश्किल हो रही थी और वे लगभग अपनी हिम्मत छोड़ चुके थे, लेकिन उनकी मुलाकात इसी दौरान लेखक सआदत हसन मंटो से हुई, जिन्होंने उन्हें देव आंनद अभिनीत फिल्म जिद्दी में रोल दिलवाने में बड़ी भूमिका निभाई। यह साल 1948 की बात है। इसके बाद प्राण ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्राण के करियर की प्रमुख फिल्मों में कश्मीर की कली, खानदान, औरत, बड़ी बहन, जिस देश में गंगा बहती है, हाफ टिकट, उपकार ,पूरब और पश्चिम और डॉन हैं।

  6. अगस्त, 1947 की शुरुआत में जब लाहौर में सांप्रदायिक माहौल बिगड़ा, तो परिवार की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद प्राण ने पत्नी शुक्ला और बेटे अरविंद सिकंद को इंदौर में शुक्ला की बहन पुष्पा वालिया के परिवार में भेजा था। प्राण ने कहा था कि कभी लाहौर से तुरंत भागने की नौबत आ जाए तो अकेला आदमी आसानी से निकल सकता था। फिल्म पत्रकार बन्नी रूबेन ने प्राण की बॉयोग्राफी ‘एंड प्राण’ में लिखा है, “11 अगस्त को बच्चे का पहला जन्म दिन था। पत्नी की जिद थी कि वे इस मौके पर साथ हों। फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त प्राण बमुश्किल लाहौर से निकले और इंदौर पहुंचे। उसी समय वहां सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। प्राण फिर कभी लाहौर नहीं लौट पाए। वे बेघर थे। उनके पास कुछ नहीं था।”

  7. यमला जट के बाद उन्होंने शौकत हुसैन निर्देशित फिल्म खानदान साइन की। इस फिल्म में वे मशहूर गायिका नूरजहां के हीरो बनकर आए। यह फिल्म सुपरहिट हुई, मगर प्राण नायक के रोल में काम करते हुए बड़ा संकोच करते थे। वे कहते थे कि पेड़ों के पीछे चक्कर लगाना अपने को जमता नहीं था। नूरजहां को वे तब से जानते थे जब वे दस साल की थीं। बाद में प्राण साहब की उनसे अच्छी दोस्ती हो गई। इस समय तक प्राण काफी लोकप्रिय कलाकार हो गए। लोग उनके अंदाज की नकल भी करने लगे थे। नाच-गाने में असहजता महसूस करने वाले प्राण ने जंजीर में इसी के चलते पहले काम करने से मना कर दिया था। दरअसल, इस फिल्म का एक गीत ‘यारी है ईमान मेरा…’ गीत उन्हीं पर फिल्माया जाना था। बाद में प्राण किसी तरह इस शर्त पर राजी हुए कि गाना पसंद न आने पर वह इसे हटवा देंगे।

  8. जिद्दी फिल्म के लिए उनको पांच सौ रुपए फीस मिली। बाद में अपराधी के लिए उन्होंने हीरो से सौ रुपए ज्यादा फीस ली। इन फिल्मों के बाद प्राण के करियर का सिलसिला ऐसा चला कि फिर रुकने का नाम ही न था। एक दौर ऐसा भी था जब पर्दे पर दर्शक केवल और केवल प्राण को देखने के लिए आते थे। 60 और 70 के दशक की हिट फिल्मों में प्राण न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता था। अपने करियर के चरम पर प्राण तब के हीरो अमिताभ और शत्रुघ्न सिन्हा से भी ज्यादा पैसे लेते थे।

  9. प्रकाश मेहता की जंजीर भी मनोज कुमार की फिल्म ‘उपकार’ की तरह प्राण के करियर की एक यादगार फिल्म है। जंजीर वह फिल्म थी जिसने हिंदी सिनेमा को अमिताभ बच्चन जैसा सुपरस्टार दिया। अमिताभ बच्चन प्राण के बेटे के दोस्त थे। इस नाते वे प्राण को अंकल ही बोला करते थे। ऐसे में, अमिताभ बच्चन के लिए प्राण को थाने में बुलाकर कुर्सी पर लात मारने वाला दृश्य करने में काफी मुश्किल आ रही थी। प्राण एक बड़े स्टार थे और अमिताभ नवोदित। तब प्राण ने ही अमिताभ बच्चन की हौसला अफजाई करते हुए कहा, ‘यहां पर मैं तुम्हारा अंकल नहीं हूं, बेटा। यहां तुम एक इंस्पेक्टर हो और मैं एक मुजरिम। अपना शॉट आत्मविश्वास के साथ दो।’ तब जाकर अमिताभ की उलझन कम हुई। फिल्म जंजीर का वह सीन यादगार बन गया।

    1. Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


      Pran Life facts


      Pran Life facts


      Pran Life facts


      Pran Life facts

Check Also

70 की उम्र का लुक शेयर कर बोले वरुण धवन, लोगों को लगता है अनिल कपूर की तरह दिखूंगा

बॉलीवुड डेस्क. वरुण धवन ने इंस्टाग्राम पर कुछ फोटो शेयर किए हैं, जिसमें वे किसी …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *