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कांग्रेस में बेचैनी, कब और कौन बनेगा प्रदेश अध्यक्ष

विशेष संवाददाता

राजधानी में विधानसभा चुनाव करीब हैं, लेकिन उसको लेकर प्रदेश कांग्रेस में भारी बेचैनी व असमंजस का दौर चल रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी खाली है, जिसके चलते पार्टी का कामकाज सुचारू नहीं हो पा रहा है। वैसे तो पार्टी में तीन कार्यकारी अध्यक्ष बने हुए हैं, लेकिन उनमें तालमेल का अभाव नजर आ रहा है। प्रदेश नेता के अलावा कार्यकर्ता तक परेशान दिख रहे हैं। कहा जा रहा है कि इस मसले पर कांग्रेस आलाकमान जल्द ही बैठक करने जा रहा है।

वैसे तो राजधानी में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव संभावित है। लेकिन कयास यह भी लग रहे हैं कि इस साल के अंत में भी यह चुनाव हो सकते हैं। चुनाव को लेकर प्रदेश बीजेपी व आम आदमी पार्टी में खासी गहमागहमी चल रही है और वॉर्ड लेवल तक चुनाव को लेकर तैयारियां चल रही है। लेकिन प्रदेश कांग्रेस में बेचैनी भरी चुप्पी छाई हुई है। उसका कारण यह है कि अभी तक कांग्रेस अध्यक्ष की घोषणा ही नहीं हो पा रही है। जिसके चलते नेताओं के साथ-साथ कार्यकर्ता भी परेशान दिखाई दे रहे हैं। तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित की गत 20 जुलाई को मौत हो गई थी, जिसके बाद पार्टी में सदमे जैसे हालात बन गए थे। क्योंकि पार्टी को लग रहा था कि उनके रहते हुए प्रदेश कांग्रेस विधानसभा चुनाव में भी बेहतर प्रदर्शन करेगी।

अब शीला दीक्षित के न रहने से अभी तक किसी नए अध्यक्ष की नियुक्ति के आसार नजर आते नहीं दिख रहे हैं। वैसे अध्यक्ष पद के लिए कई नाम उभरकर आए हैं, जिनमें पंजाब के नेता नवजोत सिंह सिद्धू, पूर्व सिने स्टार शत्रुघ्न सिंन्हा के नाम भी उभरकर सामने आए हैं। माना जा रहा है कि इनको अध्यक्ष बनाए जाने से पार्टी में गुटबाजी को बढ़ावा नहीं मिलेगा। लेकिन समस्या यह है कि ये दोनों नेता बाहरी है और राजधानी की राजनैतिक नब्ज पर इनकी पकड़ नहीं है, इसलिए इन्हें प्रदेश नेताओं पर ही आश्रित होना होगा। दूसरी ओर अध्यक्ष बनने के लिए दिल्ली के नेताओं की भी चर्चा चल रही है, जिनमें जयप्रकाश अग्रवाल, योगानंद शास्त्री, महाबल मिश्रा, अरविंदर सिंह लवली, राजेश लिलोठिया आदि शामिल है। लेकिन इनको लेकर सर्वसम्मति का संकट खड़ा हो सकता है।

वैसे तो प्रदेश कांग्रेस में तीन कार्यकारी अध्यक्ष बने हुए हैं, जिनमें हारून युसूफ, देवेंद्र यादव व राजेश लिलोठिया शामिल हैं। लेकिन बताते हैं कि इनमें आपसी समन्वय का अभाव है। हारून व देवेंद्र अलग काम कर रहे हैं तो लिलोठिया कांग्रेस कार्यालय में अलग से बैठकें कर रहे हैं। इसके चलते प्रदेश कांग्रेस का कामकाज सुचारू नहीं चल पा रहा है और विधानसभा चुनाव को लेकर न तो प्रचार नीति बन पा रही है और न ही कोई निर्णय हो पा रहा है। प्रदेश कार्यालय में नेता और कार्यकर्ता आते हैं और निराश होकर लौट जाते हैं। वैसे प्रदेश कांग्रेस सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी जल्द ही बैठक बुलाने वाली है, लेकिन देखना यह होगा कि वह ऐसे कौन से नेता को अध्यक्ष पद के लिए चुनती हैं जो दिल्ली में बीजेपी और आप को तो टक्कर दे ही सके साथ ही पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं में जोश भी भर सके।

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