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क्या 81 चाय बागानों वाला बंगाल का अलीपुरदुआर ‘चाय वाले’ को वोट देगा?



भूटान से सटे पश्चिम बंगाल के इस हिस्से में देश की सबसे कम संख्या वाली जनजाति में शामिल टोटो का बसेरा है। 1184 की आबादी वाले टोटो… टोरसा और हॉरी नदी से घिरे इलाके में रहते हैं। अलीपुरदुआर लोकसभा सीट में गुरुवार को वोटिंग है। ओपिनियन पोल को लें तो भाजपा ड्राइविंग सीट पर है।

टोटो के अलावा दो अन्य बातें भी अलीपुरदुआर को खास बनाती हैं। चाय के 81 बागान हैं और 15 लाख वोटरों में से 44 प्रतिशत या तो बागानों में काम करते हैं या फिर इन पर निर्भर है। बागान के लोग इस बार चाय वाले की पार्टी को वोट देंगे? अगर आप यहां के लोकल लाेगों से यह सवाल पूछेंगे तो 50 फीसदी ना नहीं कहेंगे।

एससी/एसटी सुरक्षित सीट में सात विधानसभा सीटें तूफानगंज, कुमारग्राम, कालचीनी, अलीपुरदुआर, फालाकाटा, मदारीहाट और नगरकाटा हैं। चाय वर्करों के नेता दशरथ टिर्की सांसद हैं और टीएमसी से फिर मैदान में हैं। लेफ्ट छोड़कर टीएमसी में आए दशरथ साफ छवि के नेता हैं। उनके सामने भाजपा ने आदिवासी परिषद अध्यक्ष जॉन बार्ला को उतारा है। लक्ष्मीपाड़ा चाय बागान के बार्ला की वर्करो पर मजबूत पकड़ है। आरएसएस भी सक्रिय है।

2016 के विधान सभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी के असर से भाजपा ने मदारीहाट विधानसभा सीट जीती थी। भाजपा ने अलीपुरदुआर में काफी काम किया। अब लगता है कि फल मिलने का समय आ गया है। इस सीट पर 84 फीसदी हिंदू और 9.8 फीसदी मुस्लिम हैं।

कांग्रेस और लेफ्ट के वोट कम हुए
लोकसभा की तीन सीटों कूच बिहार, तामलुक और उलुबेरिया के उपचुनाव यह बताते हैं कि कांग्रेस और लेफ्ट के वोट कम हुए हैं, जबकि भाजपा के बढ़े हैं। दशरथ टिर्की ने अलीपुरदुआर मंे काफी काम कराया है, लेकिन भाई-भतीजावाद के आरोप भी हैं दंभ को लेकर भी नाराजगी भी है। जॉन बार्ला गोरखालैंड आंदोलन के नेता बिमल गुरुंग के साथी हैं, इसलिए नेपाली वोट स्विंग हो सकते हैं।

आरएसपी ने पूर्व एमपी मनोहर टिर्की की पुत्री सुश्री मिली ओरांव टिर्की को उतारा है। वे प्रभाव डालने में नाकाम रही हैं। कांग्रेस ने विज्ञान के अध्यापक मोहनलाल बसुमाता को प्रत्याशी बनाया है, लेकिन वह प्रतिष्ठापूर्ण सीट पर उतनी गंभीरता से नहीं लड़ रहे हैं।

भाजपा नेता दावा- यह बदलाव का संकेत हैं
बिलकिस बेगम और अनीता सरकार कहती हैं कि ममता बनर्जी सरकार से सीधा फायदा हुआ है और दीदी को वोट करेंगी। हालांकि कई ऐसे लोग भी मिले जो दीदी का समर्थन करने से हिचक रहे हैं, भाजपा नेता दावा करते हैं कि यह बदलाव का संकेत है। दशरथ को काम पर भरोसा है। बर्ला का आरोप है कि दशरथ ने कुछ भी नहीं किया। लेफ्ट के लाल रंग वाला अलीपुरदुआर क्या केसरिया होगा? इसके लिए 23 मई का इंतजार रहेगा।

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Will Alipurduar of Bengal with 81 tea gardens, vote for ‘Tea Wala’?

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