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खाद्य पदार्थों की रिपोर्ट अटकीं, नतीजा…फोरम में 635 केस पेंडिंग




बाजार से पूरी कीमत देने के बाद कई उपभोक्ताओं को खराब खाद्य पदार्थ मिला। उन्होंने इसकी शिकायत उपभोक्ता फोरम में की। फोरम ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य सामग्री काे जांच के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन के पास भेजा, लेकिन यहां पर जांच रिपोर्टअटकने से उपभोक्ता को न्याय नहीं मिल रहा है।

लापरवाही का आलम यह है कि फोरम की बेंच द्वारा खाद्य एवं औषधि प्रशासन को कई रिमांइडर भेजे गए, लेकिन जांच रिपोर्ट नहीं मिली। इससे जिला उपभोक्ता फोरम की दो बेंच में 635 प्रकरण लंबित पड़े हैं। हद तो यह है कि एक मामले में वकील के हस्ताक्षेप के बाद दस साल बाद जांच रिपोर्ट मिली। इधर, खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि पुराने मामलों की रिपोर्ट भेज दी है गई। नए मामलों के संबंध में जांच जल्दी करके भेजी जा रही है। उपभोक्ता फोरम में वर्ष 2018 में पैक्ड खाद्य सामग्री से संबंधित 75 मामले पहुंचे थे। इसमें सबसे ज्यादा मामले कोल्ड ड्रिंक के हैं। एडवोकेट विभा बघेल ने बताया कि एक उपभोक्ता ने पेप्सी की एक बॉटल खरीदी थी, जिसमें कचरा था। इसके संबंध में फोरम में परिवाद दायर किया। यहां से पेप्सी को खाद्य एवं औषधि प्रशासन के पास जांच के लिए भेजा गया।

उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट के लिए वे कई बार खाद्य एवं औषधि प्रशासन जा चुकी हैं, ताकि उपभोक्ता को न्याय मिल सके। फोरम ने भी रिपोर्ट जल्दी देने के संबंध में पत्र लिखा, लेकिन रिपोर्ट नहीं मिली। फोरम के सदस्य सुनील श्रीवास्तव का कहना है कि दोनों फोरम में खाद्य सामग्री से संबंधित कई प्रकरणों का निराकरण जांच रिपोर्ट नहीं आने की वजह से अटका हुआ है।

हालात : वर्ष 2018 में ही 75 मामले पहुंचे, इनमें सबसे ज्यादा केस कोल्डड्रिंक से संबंधित

केस-1. पेप्पी की बॉटल में कचरा निकलने पर दर्ज कराया था केस

उपभोक्ता फोरम में डॉ. सैय्यद अब्दुल हुसैन ने वर्ष 2008 में पेप्सी की बोतल में कचरा मिलने के संबंध में परिवाद दायर किया था। इसमें फोरम ने बोतल को सील करके जांच करने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन को भेज दी थी, लेकिन 10 साल बाद भी जांच रिपोर्ट फोरम को नहीं भेजी गई।

  संदीप विक्टर, खाद्य एवं औषधि प्रशासन के खाद्य विश्लेषक

सिर्फ 6 लोग हर माह करते हैं 500 से ज्यादा जांच रिपोर्ट तैयार

उपभोक्ता फोरमों के सैंपल जांच के लिए आते हैं, क्या कारण है कि जांच रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही?

<img src="images/bulletblack.png" हमारे पास जो सैंपल आते हैं उसमें कहीं नहीं लिखा होता है कि संबंधित सैंपल उपभोक्ता फोरम का है। हमें जो कोडिंग मिलती उसी के आधार पर जांच करते हैं।

फोरम लंबित मामलों में कई रिमाइंडर भेज चुका है। उसके बाद भी रिपोर्ट क्यों नहीं जारी की जाती?

<img src="images/bulletblack.png" हमारे पास प्रकरण क्रमांक और रसीद लेकर जो आता है उसे रिपोर्ट दे देते हैं। फोरम हमें प्रकरण क्रमांक सहित सैंपल भेजने की तारीख भेज दे, सभी रिपोर्ट जारी कर दी जाएंगी।

क्या वजह है कि जांच तय समय पर पूरी नहीं होती?

<img src="images/bulletblack.png" यहां पर फूड एनालिस्ट के 8 पद रिक्त हैं। सिर्फ 6 लोग मिलकर जांच करते हैं। यहां प्रदेश से हर महीने डेढ़ हजार से अधिक सैंपल आते हैं। इसमें से हर माह 500 से अधिक सैंपल जांचकर रिपोर्ट तैयार की जाती है।

केस-2. पानी की बॉटल में निकला था कीड़ा

वर्ष 2017 में हरीश सातलकर ने भोपाल रेलवे स्टेशन के बाहर श्रीओम नाम की दुकान से पानी की बॉटल खरीदी थी। बॉटल खेलने के दौरान इसके अंदर कीड़ा दिखाई दिया। इस मामले में उन्होंने श्रीओम दुकान के संचालक कुंजीलाल और बेरी नीर के खिलाफ फोरम में परिवाद दायर किया।

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