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खोए बिना पाया नहीं जा सकता, कुछ पाना है तो खोना ही होगा : मुनि




लुधियाना| शिष्य ने गुरु से पूछा कि बहुत लंबे समय से आप साधनारत हैं। आपने क्या पाया? गुरु ने उत्तर देते हुए कहा कि मैंने बहुत खोया है, पाया कुछ भी नहीं। बड़ा ही विचित्र उत्तर था। जब सबकुछ खोया है तो यह उत्तर साधना के प्रति निराशा उत्पन्न करने वाला है। क्योंकि हर आदमी पाने की चेष्टा करता है। जहां खोने की बात होती है, वहां जाना ही नहीं चाहता। चाहे आत्म खोज है, चाहे व्यापार,राजनीति, राष्ट्रनीति खोने के लिए नहीं पाने के लिए होती है। यदि खोया जाता है तो उस दिशा में कौन बेवकूफ आगे कदम बढ़ाएगा। गहरा प्रश्न है और गुरु के उत्तर में संशय शिष्य ने प्रश्न किया तो गुरु ने कहा खोए बिना पाया नहीं जा सकता। पाना है तो खोना होगा। आगे का प्रश्न पैदा हुआ क्या खोना पड़ता है? शरीर वैसा का वैसा है। खान-पान वैसा ही, रहन-सहन वैसा ही, फिर क्या खोया? तब गुरु ने कहा व्यवहार की चीजों से ऊपर उठना होगा और आत्म दर्शन का अवलोकन करना होगा। आत्मा में छिपे चार शत्रुओं को खोना है। चार शत्रु है क्रोध, मान, माया और लोभ। शिष्य को प्रश्न का समाधान मिला। यह शब्द मनीषी संत मुनि विनय कुमार आलोक ने महावीर जयंती के दो दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन सामूहिक अनुष्ठान के पश्चात श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए इकबाल गंज रोड स्थित तेरापंथ भवन में कहे।

नमस्कार महामंत्र का अनुष्ठान में सैकड़ों भाई बहनों ने भाग लिया। दो दिन के उपवास में सैकड़ों भाई बहन तप में रत हैं। जो कल महावीर जयंती तक चलेगा। लुधियाना तेरापंथ समाज के 75 वर्षों में भी ऐसा प्रयोग नहीं हुआ। यह पहली बार 160 लगभग भाई बहन दो दिन के उपवास में रत हैं। उन्होंने कहा नमस्कार महामंत्र एक ऐसा मंत्र है जिसको चिंतामणि के रूप में माना जाता है। चिंतामणि र| नष्ट होने वाला है। परन्तु महामंत्र चिंतामणि कभी नष्ट नहीं होता। वह व्यक्ति के जीवन का परिमार्जन करता है और सत दिशा में प्रयास करवाता है। इस मंत्र की सबसे बड़ी विशेषता है वह सांप्रदायिक मंत्र है। इस मंत्र में किसी व्यक्ति विशेष को नमस्कार नहीं किया गया है। गुणों को नमस्कार किया गया है। नमो अरिहंताणं अरिहंत को नमस्कार किया गया। अरिहंत वह होता है जो तीर्थ की स्थापना करता है और चार कर्मों से मुक्त होता है। उसे अरिहंत कहा जाता है। सिद्ध वह होता है जो साधना की अंतिम छोर तक पहुंचता है अर्थात आठ कर्मों को क्षय करने वाला सिद्ध होता है।

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