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Hindi News / राशिफल / गरीबी से तंग आकर पति-पत्नी ने की तपस्या, इंद्र ने प्रसन्न होकर दिया धनवान होने का वरदान लेकिन एक शर्त रख दी, शर्त सुन कर पत्नी हो गई तैयार लेकिन पति ने लौटा दिया इंद्र का वरदान

गरीबी से तंग आकर पति-पत्नी ने की तपस्या, इंद्र ने प्रसन्न होकर दिया धनवान होने का वरदान लेकिन एक शर्त रख दी, शर्त सुन कर पत्नी हो गई तैयार लेकिन पति ने लौटा दिया इंद्र का वरदान



रिलिजन डेस्क. उत्तर भारत की एक प्रसिद्ध लोक कथा है। किसी गांव में एक पति-पत्नी रहते थे। दोनों गरीबी में अपने दिन गुजार रहे थे। पति अपनी आलसी प्रवृत्ति के कारण ज्यादा काम नहीं करता। फसल भी उतनी ही करता जितने में गुजारा हो जाए। पत्नी उसे बार-बार प्रेरित करती की लेकिन पति उसकी बात को अनसुना कर देता। हमेशा मेहनत करने से बचता और अपने भाग्य को कोसता रहता। एक दिन गांव में कोई साधु आया। किसान के पड़ोसी ने उसकी पत्नी को बयाता कि साधु बहुत सिद्ध है, लोगों को उनकी समस्या का एकदम सटीक उपाय बताता है।

किसान की पत्नी साधु के पास गई। उसने साधु को समस्या बताई। साधु ने कहा तुम्हारा पति मेहनत नहीं कर सकता। वो आलसी है। उसे परिश्रम का महत्व समझना होगा। पत्नी ने कहा, महाराज, मैं उन्हें समझाती हूं लेकिन वे मानते नहीं हैं। साधु ने कहा अगर पति मेहनत नहीं कर सकता तो उससे कहो तपस्या करे। अगर स्वर्ग जैसा सुख चाहिए, तो स्वर्ग के राजा इंद्र को प्रसन्न करे। साधु ने उसे एक मंत्र और तपस्या की विधि बता दी। पत्नी खुश होकर लौटी और पति को पूरी बात बताई। पति तपस्या के विचार से खुश हो गया। कुछ करना नहीं है। एक जगह बैठना ही तो है।

दोनों ने तपस्या शुरू की। शुरुआत में ध्यान साधने और मंत्र जाप में थोड़ी समस्या आई लेकिन धीरे-धीरे ध्यान भी लगने लगा और मंत्र जाप भी अच्छे से होने लगा। कुछ दिनों में दोनों ध्यान में पारंगत हो गए। एक दिन ऐसा भी आ गया जब दोनों गहन समाधि में पहुंच गए। मंत्र फलित हुआ और तपस्या से खुश होकर भगवान इंद्र प्रकट हुए। दोनों हाथ जोड़कर खड़े हो गए। इंद्र ने कहा, मैं तुम दोनों की तपस्या से प्रसन्न हूं। तुमने स्वर्ग जैसे सुख और धन के लिए तपस्या की है। मैं तुम्हें ऐसा वरदान देता हूं कि तुम्हारे घर में कभी धन का भंडार खत्म नहीं होगा। लेकिन, इसके लिए तुम दोनों को अलग रहना होगा।

पति ने कहा, अलग क्यों रहना होगा। हम साथ रहेंगे, हमारा रिश्ता पति-पत्नी का है। हम दोनों ने ही साथ में तपस्या की है। इंद्र ने कहा, इसीलिए तुम दोनों को अलग-अलग रहना होगा। जिस दिन तुम एक हो जाओगे मेरा वरदान समाप्त हो जाएगा, क्योंकि तुम दोनों ने अलग-अलग तपस्या की है, इसलिए दोनों को अलग-अलग फल मिलेगा। दोनों सोच में पड़ गए। पत्नी ने कहा, अगर इन्हें पूरा सुख मिलता है, धन की कमी नहीं रहती है तो मैं इस वरदान के लिए तैयार हूं। लेकिन, पति ने कहा, मैं इससे अलग नहीं रह सकता। क्योंकि इतने दिन की तपस्या में इतना ज्ञान तो मुझे मिल ही गया है कि मेरी पत्नी मेरे सुख के लिए कितनी चिंतित है। और आज भी ये मेरे सुख के लिए मुझसे अलग रहने को तैयार है, ये इतना त्याग कर रही है।

और दूसरी बात मुझे ये भी समझ में आ गई कि अगर मैं बैठे-बैठे मंत्रों के जाप से भगवान को अपने सामने लाकर खड़ा कर सकता हूं तो मैं अगर मेहनत करना शुरू कर दूं तो अपने आप ही धन का भंडार कर लूंगा। मुझे आपके वरदान की कोई आवश्यकता नहीं है, मेरे लिए इतनी चिंता और प्रेम रखने वाली पत्नी ही मेरे लिए पर्याप्त है। मैं आलक का त्याग कर चुका हूं। अब मेहनत करूंगा।

पत्नी किसान को देखती रह गई। उसकी आंखों में खुशी के आंसू थे। इंद्र ने जवाब दिया, मेरा वरदान खाली नहीं जाएगा। तुम दोनों साथ भी रहोगे और धन भी रहेगा। ये सिर्फ तुम्हारी आंखें खोलने के लिए था। हमारा सबसे बड़ा खजाना हमारे रिश्ते और परिजन हैं। अगर ये हमारे अनुकूल हों तो संसार में कुछ भी पाना असंभव नहीं है।

कहानी का सार

हमारे रिश्ते और हमारा स्वस्थ्य शरीर ही हमारे लिए सबसे बड़ा खजाना है। इसकी कीमत समझनी चाहिए। मेहनत से भगवान को भी पाया जा सकता है, तो धन और सुख तो बहुत छोटी चीजें हैं।

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