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गौतम ऋषि मेले में जुटते है मीणा समाज के तीन लाख लोग, बनते है नए रिश्ते



बाली. पाली जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर अरावली की पहाड़ियों से घिरे चोटिला गांव स्थित गौतम ऋषि महादेव मंदिर में रविवार से मीणा समाज का वार्षिक मेला शुरू हुआ। पश्चिमी राजस्थान का मीणा समाज का सबसे बड़ा यह मेला प्रबंधन, अनुशासन, सामाजिक एकजुटता और परंपरा की मिसाल और इनका अनूठा संगम है। वैसे हर साल इस मेले का आयोजन किया जाता है, लेकिन इस मेले की खासियत यह है कि यह हर समाज के लोगों को प्रबंधन, अनुशासन के साथ ही परंपराओं को निभाने का एक संदेश देता है।

इस मेले में मीणा समाज के 3 लाख से अधिक लोग जुटते हैं और परिवार सहित तीन दिन तक यहां रुकते हैं। खास बात यह है कि लाखों की संख्या में जुटी भीड़ की व्यवस्था के लिए पुलिस की कोई जरूरत नहीं पड़ती। पूरा इंतजाम सिर्फ समाज के हाथों में होता है। नदी की रेत पर एताइयां यानी अस्थायी आवास बनाए जाते हैं। इन्हीं एताइयों पर परिवार के लोग शादी योग्य अपने बेटे-बेटियों के रिश्ते तय करते हैं। रिश्तेदारों की मनुहार होती है और कोई नाराजगी है तो वह दूर की जाती है।

लाखों की भीड़ में समाज के कार्यकर्ता संभालते हैं व्यवस्था
मेले में तीन दिन की व्यवस्थाओं के लिए पुलिस नहीं बल्कि सभी परगनों के 500 कार्यकर्ता व्यवस्था संभालते हैं। यहां तक की मेले में व्यवस्थाएं समाज के ग्यारह परगनों के पंचों की होती है। मेले से काफी पहले ही समाज की बैठकें होती है। करीब 3 किलोमीटर में फैले मेले के सुचारू संचालन के लिए जगह-जगह युवाओं की टीम लगाई जाती है।

महिला व पुरुष के मुंह पर कपड़ा बांधने पर प्रतिबंध
मेले में अनुशासन बना रहे इसके लिए समाज के पंचों ने नियम-कायदे बनाए है। महिला-पुरुष मुंह पर कपड़ा बांध कर नहीं घूमने सकते। यहां तक हथियार लेकर मेले में आने, शराब पीने, ओरण भूमि से हरे पेड़ काटने, वीडियो शूटिंग व फोटोग्राफी करने तक पर प्रतिबंध है। 8 बजे के बाद महिलाओं के मेले में घूमने पर पाबंदी है।

मेले में समाज के सभी लोग एक समान
इस मेले ने पूरे प्रदेश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। मेले के दौरान समाज के लोग अपने परिवार के साथ तीन दिन तक यहीं रहते हैं। यहां बड़े ओहदे का व्यक्ति भी समाज समाज की जाजम पर पंचों के साथ ही बैठता है, उसके लिए अलग से अलग व्यवस्था नहीं होती।

एताईयों पर बनते हैं नए रिश्ते
समाज के लोग पने लड़के-लड़कियों के रिश्ते करते हैं। परंपरा मेले की स्थापना से चली आ रही है। गौतम ऋषि महादेव के दर्शन के बाद चूरमा का भोग लगाते हैं। यहां प्रकट होने वाली गंगा में अस्थियां विसर्जित की जाती है। मन-मुटाव दूर होते हैं और एताइयों पर जवाईयों व रिश्तेदारों के स्वागत में महिलाएं मंगल गीत गाती है।

प्रकट हुई गंगा, लोगों ने अस्थियां विसर्जित की
शनिवार से ही समाज के लोग मेले में जुटने शुरू हो गए थे और रविवार को निर्धारित समय पर मान्यतानुसार 2 बजकर 7 मिनट पर गंगा वेरी में गंगा प्रकट हुई, जहां लोगों ने अस्थियां विसर्जित की। समाज के लोगों ने मंदिर में दर्शन कर परिवार के खुशहाली की कामना की। वहीं मेले में जाने वाले लोगों के रास्ते भर पानी, शर्बत व अन्य व्यवस्थाएं की गई। सोमवार दोपहर बाद लोग लौटने लगेंगे।

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गौतम ऋषि मेले में अपने पूर्वजों की अस्थियां विसर्जित करते लोग।

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