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चांद पर उगा पहला कपास का पौधा नष्ट हुआ, वजह- तापमान -170 डिग्री तक गिरा



गैजेट डेस्क. चीन ने मंगलवार को ही चांद पर पहली बारकपास का पौधा उगाने का ऐलान किया था, लेकिन अगले ही दिन इस पौधे के मरने की खबर आ गई। द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, चांद पर उगाया गया पहला कपास का पौधा रात में तापमान माइनस 170 डिग्री सेल्सियस तक गिरने की वजह से मर गया।

सूरज की रोशनी में तो ये पौधा अच्छी तरह बढ़ रहा था, लेकिन रात होते ही तापमान गिरने की वजह से मर गया। चांद पर एक रात दो हफ्ते की होती है। इस दौरान वहांतापमान गिर जाता है।

दिन के समय यही तापमान 120 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है।

चीन ने 3 जनवरी को भेजे थे आलू, कपास के बीज
चीन ने 3 जनवरी को रोवर चांगी-4 के साथ कपास, आलू और सरसों के बीज के अलावा मक्खी के अंडे भी भेजे थे। लेकिन इनमें से सिर्फ कपास का ही पौधा चांद पर पनप पाया।बाकी पौधों में कोई ग्रोथ नहीं हुई थी। हालांकि, वैज्ञानिकों ने आलू और सरसों के बीज भी अंकुरित होने की उम्मीद जताई थी। इसीके साथ चीन पहला ऐसा देश बन गया था, जिसने चांद पर किसी पौधे को उगाया था।

रविवार से शुरू हो गई थी चांद पर रात
चीन के इस प्रोजेक्ट को लीड करने वाले वैज्ञानिक शाई गेंगशिन ने कहा कि हमें पहले से ही इस पौधे के जल्दी मरने की आशंका थी क्योंकि रात के समय वहां किसी भी पौधे के लिए बच पाना नामुमकिन है। गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बताया कि, लैंडिंग के बाद रविवार को चांद पर पहली रात थी और रविवार से ही चांगी-4 रोवर ‘स्लीप मोड’ में चला गया था।

चांद पर नहीं डालेंगे प्रतिकूल असर

शाई का कहना है कि धीरे-धीरे पौधे और बीज चांद पर डिकम्पोज हो जाएंगे और इससे चांद के वातावरण पर कोई प्रतिकूल असर नहीं होगा। उन्होंने कहा, “चांद पर पौधे उगाने का प्रयोग हमने पहली बार किया था और हमें इसका कोई अनुभव भी नहीं था कि चांद पर किस तरह का वातावरण होता है।

डिब्बे में भरकर चांद पर भेजे गए थे बीज
चीन के वैज्ञानिकों ने बताया था कि, रोवर चांगी-4 में पानी और मिट्टी से भरे एक डिब्बे को भेजा गया थाजो 18 सेंटीमीटर का था। इस डिब्बे के अंदर कपास, आलू और सरसों के बीज के साथ-साथ फ्रूट फ्लाय के अंडे और यीस्ट भेजे गए थे। इसके साथ ही इसमें दो छोटे कैमरे और एक हीट कंट्रोल सिस्टम भी था, ताकि बीज के अंकुरित होने की फोटो मिलती रहे।

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कपास के अंकुरित पौधे।

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