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चांसलर एंजेला मार्केल समेत कई राजनेताओं का निजी डेटा ट्विटर पर लीक, एक महीने बाद सरकार को चला पता



गैजेट डेस्क. जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल और राष्ट्रपति फ्रैंक-वॉल्टर स्टीनमायर समेत 100 से ज्यादा राजनेताओं, सेलेब्रिटी, पत्रकारों का निजी डेटा लीक होने का मामला सामने आया है। जर्मनी मीडिया के मुताबिक, इस डेटा को ट्विटर अकाउंट @_Orbit पर लीक किया गया था, जिसे बाद में सस्पेंड कर दिया गया है। इस डेटा में राजनेताओं के फोन नंबर, ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट के पासवर्ड और निजी फोटो समेत कई तरह की जानकारी शामिल है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस हैकिंग में रूसी हैकर्स का हाथ हो सकता है। इस डेटा लीक को जर्मनी का अब तक का सबसे बड़ा डेटा लीक बताया जा रहा है।

एक को छोड़कर सभी पार्टियों के नेताओं का डेटा लीक
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में जर्मनी की सभी राजनीतिक पार्टियों के नेता का डेटा लीक हुआ है, हालांकि वहां कि राष्ट्रवादी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) के नेताओं का डेटा लीक नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स (सीडीयू) और क्रिश्चियन सोशल यूनियन (सीएसयू) के 405, सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी (एसपीडी) के 294, ग्रीन पार्टी के 105, लेफ्ट पार्टी के 82 और फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी (एफडीपी) के 28 सांसदों का निजी डेटा लीक हुआ है।

कैसे हैक किया गया डेटा?
आंतरिक मंत्री सीहोफर ने बताया कि डेटा क्लाउड सर्विस, ईमेल एड्रेस या सोशल नेटवर्क के गलत उपयोग के जरिए हैक किया गया था। बीबीसी ने एक साइबर एनालिस्ट के हवाले से बताया है कि हैकर्स ने ईमेल सॉफ्टवेयर में कमजोरियोंका फायदा उठाया होगा, ताकि वे उस पासवर्ड को ले सकें जिसका इस्तेमाल सोशल मीडिया अकाउंट पर भी किया गया था। ये डेटा धीरे-धीरे लीक किया गया। दिसंबर की शुरुआत में टीवी एंकर और फिर रैपर्स का डेटा लीक किया गया, लेकिन 20 दिसंबर के बाद से राजनेताओं का डेटा लीक होना शुरू हुआ।

इस डेटा लीक के पीछे रूस का हो सकता है हाथ
जर्मनी में हुए अब के सबसे बड़े डेटा लीक का आरोप वहां की दक्षिणपंथी पार्टी के साथ-साथ रूस पर भी लग रहा है। जर्मन साइबर सिक्योरिटी एनालिस्ट स्वेन हर्पीग ने बीबीसी को बताया कि, चुनावों में दखलंदाजी का आरोप रूस पर लगता रहा है और इस साल जर्मनी में चार राज्यों के चुनाव के साथ-साथ यूरोपिय संसद के चुनाव भी होने हैं। उन्होंने बताया कि रूस पर पहले भी जर्मनी में साइबर अटैक करने का आरोप लगा है। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि इस अटैक में दक्षिणपंथी पार्टी के किसी भी नेता को टारगेट नहीं किया था, लिहाजा हो सकता है कि इसके पीछे दक्षिणपंथी पार्टी का हाथ हो।

मीडिया ने कहा- जरूरी दस्तावेज भी लीक, सरकार ने नकारा
इस डेटा लीक पर जर्मनी मीडिया का कहना है कि चांसलर एंजेला मार्केल के कुछ जरूरी दस्तावेज, उनका ईमेल एड्रेस और फैक्स नंबर तक ऑनलाइन लीक हुआ है, लेकिन सरकार ने इस बात से इनकार करते हुए कहा कि कोई संवेदनशील जानकारी लीक नहीं हुई है। सरकारी प्रवक्ता मार्टिना फिट्ज का कहना है कि इस डेटा लीक से यूरोपियन, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय संसद के राजनेता प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इसकी जांच की जा रही है। वहीं, शुरुआती जांच में निजी डेटा लीक होने की बात कही जा रही है, लेकिन बिल्ड अखबार के एक रिपोर्टर का दावा है कि उसे इस लीक से कई राजनीतिक घोटालों के सबूत मिले हैं।

1 दिसंबर से ही रोजाना लीक हो रहा था डेटा
टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जर्मन सांसदों का डेटा 1 दिसंबर से रोजाना ट्विटर पर लीक किया जा रहा था, लेकिन सरकार ने इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया। टेलीग्राफ का कहना है कि इस डेटा लीक के बारे में सरकार को 3 जनवरी को पता चला। जर्मनी के आईटी सिक्योरिटी अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की गहराई से जांच की जा रही है। उनका ये भी कहना है कि फिलहाल सरकारी नेटवर्क को किसी भी तरह का खतरा नहीं है।

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