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चीन की अमेरिका को चेतावनी- ट्रम्प ने टैरिफ बढ़ाए तो बीजिंग भी उठाएगा सख्त कदम



बीजिंग. अमेरिका और चीन के बीच मार्च 2018 में शुरू हुआ ट्रेड वॉर और ज्यादा तल्ख होता जा रहा है। हालांकि, पिछले साल नवंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग की जी-20 में हुई मुलाकात के बाद फिर से व्यापार वार्ता शुरू करने पर सहमति बनी थी, लेकिन ट्रम्प ने रविवार को ट्वीट कर 200 अरब डॉलर (13.84 लाख करोड़ रुपए) के चाइनीज इंपोर्ट पर आयात शुल्क 10% से बढ़ाकर 25% करने की बात की, उससे चीन भड़क गया है। उसका कहना है कि ट्रम्प ने टैरिफ बढ़ाए तो बीजिंग भी चुप नहीं बैठेगा। दोनों देशों के बीच 9, 10 मई को वॉशिंगटन में व्यापार वार्ता प्रस्तावित है।

चीनी कामर्स मिनिस्ट्री ने देर रात जारी किया बयान
ट्रम्प के टैरिफ बढ़ाने के ऐलान पर चीनी कामर्स मिनिस्ट्री ने बुधवार देर रात बयान जारी करके कहा कि अगर अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाने की घोषणा पर अमल किया तो बीजिंग भी सख्त कदम उठाएगा। चीन का कहना है कि उसे पता है कि ट्रेड वॉर से दोनों देशों ही नहीं बल्कि सारे विश्व पर असर पड़ रहा है। हालांकि, मिनिस्ट्री ने 9, 10 मई को वॉशिंगटन में होने वाली वार्ता का जिक्र नहीं किया। अमेरिका और चीन के प्रतिनिधियों की गुरुवार को वाशिंगटन में मुलाकात हो रही है, जिसमें अमेरिका की ओर से चीन के उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाए जाने को लेकर चर्चा होगी। व्यापार वार्ता के आखिरी दौर के लिए चीन की तरफ से उप प्रधानमंत्री लियू ही गुरुवार को अमेरिका पहुंच रहे हैं।

ट्रंप ने कहा- चीन ने खत्म किया व्यापार समझौता
ट्रम्प ने बुधवार को कहा, चीन ने समझौता खत्म कर दिया है। चीन के उप प्रधानमंत्री लियू ही गुरुवार को यहां आ रहे हैं। वह एक अच्छे आदमी हैं, लेकिन उन लोगों ने समझौता खत्म कर दिया है। वे ऐसा नहीं कर सकते। उन्हें इसका नतीजा भुगताना होगा। अगर हम कोई समझौता नहीं कर रहे हैं तो सालाना 100 अरब डॉलर से अधिक की रकम लेने में कुछ गलत नहीं है।ट्रम्प ने कहा है कि चीन 10 महीने से 50 अरब डॉलर के इंपोर्ट पर 25% और 200 अरब डॉलर के इंपोर्ट पर 10% शुल्क दे रहा है। चीन के साथ व्यापार वार्ता जारी है। उनका कहना था कि इसकी गति बहुत धीमी है, क्योंकि चीन फिर से सौदेबाजी करना चाहता है।

चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 378.73 अरब डॉलर
अमेरिका चाहता है कि चीन के साथ उसका व्यापार घाटा कम हो। पिछले साल यह 378.73 अरब डॉलर रहा था। यूएस की यह मांग भी है कि उसके उत्पादों की चीन के बाजार में पहुंच बढ़े और चीन में अमेरिकी कंपनियों पर टेक्नोलॉजी शेयर करने का दबाव खत्म किया जाए। अमेरिका-चीन के बीच चल रही ट्रेड वॉर का असर केवल इन दोनों देशों पर ही नहीं बल्कि पूरे विश्व पर पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि दोनों महाशक्ति हैं और इनके बीच की तल्खी बढ़ती है तो सारे विश्व पर इसका प्रभाव पड़ेगा।

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डोनाल्ड ट्रम्प, शी-जिनपिंग

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