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चुनाव तो दूसरी जंग, कांग्रेस विधायकों को पाला बदलने से रोक ले तो वही पहली जीत



द्वारका (भंवर जांगिड़).द्वारका, देश की पश्चिमी दिशा का आखिरी छोर। द्वारकाधीश भगवान कृष्ण की कर्मस्थली। समुद्र के किनारे और गोमती के घाट पर बसा द्वारका सौराष्ट्र के जामनगर संसदीय क्षेत्र का जिला है जहां पार्टी से ज्यादा व्यक्ति को महत्व दिया जाता है। जामनगर सीट को ही देख लीजिए, जहां भाजपा के चंद्रेश पटेल 5 बार सांसद रह चुके हैं। तो भारत यात्रा की शुरुआत वयोवृद्ध जानीभाई की बात से करते हैं, वे कहते हैं जामनगर का कोई लोकल इश्यू तो है नहीं, सांसद-विधायक के काम ठीक ही चले हैं इसलिए कांग्रेस कितना भी जोर लगा ले आएगी तो भाजपा ही।

जामनगर के राजेश परमार बताते हैं कि देवभूमि द्वारका और जामनगर दो जिले हैं। द्वारका में भाजपा का बरसों से राज है और जामनगर में दो बड़ी रिफाइनरी। इसलिए यहां यूपी-बिहार के लोग ज्यादा हैं, परंतु वे चुनाव में प्रभावी नहीं रहते और उन प्रदेशों की हवा भी जामनगर में असर नहीं डालती। मौजूदा सांसद पूनमबेन मदाम की दावेदारी तो इस बार भी है, लेकिन क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी रीवाबा के भाजपा जॉइन करने से स्थिति असमंजस की है। वैसे ही कांग्रेस को भी नया चेहरा चाहिए क्योंकि पिछली बार हारे अहीर विक्रम भाई मदाम खंभालिया से विधायक बन गए हैं। इसलिए चर्चा है कि हार्दिक पटेल यहां से उतर सकते हैं।

यहां से निकल कर जब पाेरबंदर सीट पहुंचे, जहां मछुआरों की आबादी सबसे ज्यादा है। यहां सुभाष नगर गोदी में समुद्र के किनारे सैकड़ों जहाज खड़े हैं। बोट एसोसिएशन से जुड़े धनजी भाई नाराज़गी भरे लफ्ज़ों में कहते हैं सरकार को मछुआरों की कोई परवाह नहीं। धंधा चौपट हो चुका है। समुद्र में अब मछलियां कम हो गई हैं, मुंबई-रत्नागिरी तक जाना पड़ता है। पहले 1500-1700 रुपए का डीजल लगता था अब 3000-4000रुपए लग रहे हैं। खर्चा तक नहीं निकल पा रहा, इसीलिए जहाज खड़े हैं। दोपहर बाद जब जूनागढ़ पहुंचे तो वहां के लोग चुनावी माहौल से बेपरवाह नजर आए। क्योंकि शहरी क्षेत्र के 80 प्रतिशत लोग सरकारी कर्मचारी व पेंशनर्स है। इसलिए यहां कोई बहुत बड़ा लोकल इश्यू भी नहीं है।

एक होटल पर बैठे नांदरखी गांव के हीरू भाई और शहरी व्यापारी अरविंद भाई ने बताया कांग्रेसी विधायक जवाहर भाई चावड़ा हर आदमी के लिए हर वक्त उपलब्ध है। लेकिन हीरू भाई और अरविंद भाई को पता नहीं था कि चावड़ा कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। कांग्रेस के विधायक लोकसभा सीट हथियाने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं, परंतु जिस तरह से भाजपा उन्हीं के नेताओं को तोड़ रही है, उससे राह मुश्किल होती जा रही है।

उधर, राजकोट सौराष्ट्र की सबसे हॉट सीट मानी जाती है। प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक शुरुआत यहीं से हुई थी मुख्यमंत्री बनने के बाद वे यहां से उप चुनाव जीते थे। पिछले चुनाव में भाजपा के मोहन भाई कुंदरिया ने कांंग्रेस के कुंवरजी भाई बावलिया को हराया था। पर बावलिया विधानसभा चुनाव में जीत गए। हालांकि अब भाजपा में शामिल होने से कोली बाहुल्य सीट पर कांग्रेस के पास कोई बड़ा नाम नहीं बचा है। यूं तो सौराष्ट्र पटेल बाहुल्य है। इसके बावजूद कांग्रेस के लिए हार्दिक पटेल का कार्ड चलेगा या नहीं, इसमें संशय है। क्योंकि जिस पटेल आरक्षण के मुद्दे को लेकर वे चले थे, वो खत्म हो चुका है।

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हार्दिक को मिल रही तवज्जो से दुखी हैं कांग्रेसी :

जनवरी 2018 से अब तक गुजरात में कांग्रेस के पांच विधायक भाजपा में जा चुके हैं। यह सीधे संकेत हैं कि कांग्रेस में सबकुछ अच्छा नहीं चल रहा है। जानकार बताते हैं-कांग्रेस गुजरात में फेसलेस होती जा रही है। हार्दिक पटेल को ज्यादा तवज्जो मिलने से दूसरी जातियों से जुड़े कांग्रेसी नाराज़ हैं। इसलिए चुनाव के वक्त भाजपा को पकड़ रहे हैं।

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जूनागढ़ की ये दो तस्वीरें एक ही दिन की हैं। बाईं ओर कांग्रेस का दफ्तर जीर्ण-शीर्ण और बंद पड़ा है। वहीं, दाईं ओर भाजपा का दफ्तर है, वह चुनावी तैयारियों में जुटी हुई दिख रही है।

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