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जब देश में पहली बार राेहतक जेल में क्षेत्रीय दलों ने किया था महागठबंधन



रोहतक.इमरजेंसी में जेपी आंदोलन के दौरान राेहतक जेल में ही देश के इतिहास में पहली बार महागठबंधन की नींव पड़ी थी। चौ. बंसीलाल ने राष्ट्रीय नेताओं को रोहतक की जेल में ही बंद करवाया था। यहां पर स्वामी इंद्रवेश, चंद्रशेखर, राजनारायण, जार्ज फर्नांडिस, पीलू मोदी और अन्य बंद थे। छह माह तक इंद्रवेश रोहतक जेल में रहे। जेल में ही 1977 में सभी क्षेत्रीय दलों ने फैसला लिया कि इंदिरा गांधी से लड़ना है तो सभी मिलकर लड़ो, यानी महागठबंधन।

यहीं से देश में पहली बार महागठबंधन की शुरुआत हुई। क्षेत्रीय दलों समाजवादी पार्टी, लोकदल, कांग्रेस और जनसंघ सभी ने जनता पार्टी में विलय कर दिया। इसी काे मजबूत करते हुए चुनाव में उतरा गया। इसके बाद रोहतक लोकसभा सीट से 1980 में इंद्रवेश ने लाेकदल के टिकट पर खड़े हाेकर जीत दर्ज की। इसके बाद वे फरीदाबाद से 1984 में निर्दलीय लड़े, लेकिन हार गए। और 1998 में राेहतक से ही बीजेपी का चुनाव लड़ा, लेकिन जीत दर्ज नहीं कर सके।

जब आर्य समाज के अनुयायी 1970 में राजनीति में आए, 7 वर्ष चली पार्टी : 1970 में स्वामी इंद्रवेश ने संन्यास लिया और 7 अप्रैल 1970 को आर्य सभा नाम से राजनीतिक पार्टी बनाई गई। दयानंद मठ में हुए कार्यक्रम में ही समाज केे बीच सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि सक्रिय राजनीति में आकर आर्य राष्ट्र बनाना चाहिए। इसके बाद पहली बार पलवल के उपचुनाव में मई में एंट्री की और माहौल बनने पर कांग्रेस से सीधी टक्कर आर्य सभा के प्रत्याशी की रही। 1971 के लोकसभा के चुनाव में पार्टी के चार प्रत्याशी खड़े किए गए। इस चुनाव के बाद ही पहली बार देश में स्वास्तिक के चुनाव चिह्न पर अपनी पहचान बनाई। 1972 में आर्य सभा के दो एमएलए महम से उमेद सिंह और मास्टर श्यामलाल पलवल से जीते। स्वामी इंद्रवेश ने 1973 में गेहूं के दाम के लिए भूख हड़ताल की, इसे 18 दिन बाद प्रकाश सिंह बादल ने जूस पिलाकर खुलवाया। 1977 में जनता पार्टी में विलय के बाद बड़े स्तर पर आर्य समाज के अनुयायी सक्रिय राजनीति में नहीं उतरे।

जब चंद्रशेखर ने जेलमें ही मांगा संन्यास

जेल में ही पहली बार स्वामी इंद्रवेश से चंद्रशेखर ने संन्यास धारण करने की बात कही। चंद्रशेखर ने स्वामी इंद्रवेश से कहा कि ये अपने भगवा कपड़े दे दो। यहां रहने पर घर याद नहीं रहेगा और वैराग्य बनेगा। स्वामी इंद्रवेश बोले कि ये कोई क्षणिक संन्यास नहीं होता। आप तो वैसे ही संन्यासी हो। यहां पर संन्यास की तैयारी शुरू कर दी गई। इसकी सूचना सीएम बंसीलाल काे मिल गई। उसी रात जब वे कपड़े ले आए और सब तय हो गया, तभी सीआईडी की सूचना पर रातों-रात दोनों की जेल ही बदल दी गई।

28 साल बाद लागू हुई थी राज्य में शराबबंदी

हरियाणा बनते ही शराब नीति पर सबसे पहले स्वामी इंद्रवेश ने ही सवाल उठाए थे। उनका मानना था कि शराबबंदी कर राज्य की छवि को बनाए रखा जा सकता है। इस मुद्दे काे लेकर अार्य समाज के अनुयायी स्वामी इंद्रवेश के नेतृत्व में 1968 में मुख्यमंत्री बंसीलाल से मिले। उनसे बातचीत के बाद अहसास हुआ कि जब तक आर्य समाजी सक्रिय राजनीति में नहीं आएंगे तब तक बदलाव संभव नहीं है। हालांकि यह बात 28 साल बाद चौ. बंसीलाल को समझ में आई और उन्होंने 1996 में शराबबंदी लागू की।

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स्वामी इंद्रवेश की 1980 में पहली बार सांसद बनने के बाद की तस्वीर।

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