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ट्रम्प को ऐसे अप्रवासी चाहिए, जिनमें नेल्सन मंडेला जैसी अद्भुत क्षमताएं हों



वॉशिंगटन. राष्ट्रपति बनने के बाद से ही डोनाल्ड ट्रम्प अपनी इमीग्रेशन पॉलिसी को लेकर सुर्खियों में हैं। उनकी पीछे की नीतियों से लगता है कि वह अप्रवासियों को अमेरिका से बाहर निकालना चाहते हैं, लेकिन ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका में आने का मौका सिर्फउन लोगों को मिलना चाहिए जो अंग्रेजी बोलने में दक्ष होने के साथ-साथ अपने विषय के माहिर हों। उनके पास एक अच्छी नौकरी का ऑफर होना भी जरूरी है। ट्रम्प सस्ती दर पर काम करने वालों के नाम परबेकार विदेशियोंकी भीड़ अमेरिका में नहीं जमा करनाचाहते।

ट्रम्प प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि कुल मिलाकर राष्ट्रपति चाहते हैं कि अमेरिका में आने वाले अप्रवासी में नेल्सन मंडेला जैसी अद्भुत क्षमताएं होनी चाहिए। डॉक्टर ऐसा हो, जिसके पास कैंसर का उपचार हो तो वैज्ञानिक में मंगल ग्रह परसबडिवीजन बनाने की क्षमता होनी चाहिए।

नई इमीग्रेशन नीति में योग्यता को ही तरजीह
हालिया घटनाक्रम को देखकर साफ है कि ट्रम्प देश की आव्रजन नीति में आमूलचूल बदलाव के लिए तैयार हैं। इसमें अमेरिका आने के इच्छुक विदेशियों को योग्यता के आधार पर तरजीह मिलेगी। मौजूदा व्यवस्था में पारिवारिक संबंधों को तरजीह दी जाती है। सूत्रों का कहना है कि नई नीति से हजारों की तादाद में ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय पेशेवरों की मुश्किलें खत्म हो सकती हैं।

ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर की यह नई योजना मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और ग्रीनकार्ड तथा वैध स्थायी निवास प्रणाली को दुरुस्त करने पर केंद्रित है।इससे योग्यता, उच्च डिग्री धारक और पेशेवेर योग्यता रखने वाले लोगों के लिए आव्रजन प्रणाली को सुगम बनाया जा सकेगा।

मौजूदा व्यवस्था के तहत करीब 66 फीसदी ग्रीन कार्ड उन अप्रवासियों को दिए जाते हैं, जिनका पारिवारिक संबंध अमेरिका में हो। सिर्फ 12 फीसदी ही योग्यता पर आधारित हैं। नई योजना का गुरुवार दोपहर व्हाइट हाउस में ऐलान हो सकता है। हालांकि, इस योजना को सिरे चढ़ाना मुश्किल भरा साबित हो सकता है, क्योंकि आव्रजन सुधार के मुद्दे पर कांग्रेस विभाजित है।

सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति अपने रिपल्बिकन सांसदों को इस मुद्दे पर समझाने में सफल हो जाएं तो भी डेमोक्रेट और दूसरे नेता इसके विरोध में खड़े हैं। ट्रम्प के लिए उन्हें मनाना मुश्किल भरा साबित हो सकता है।

अमेरिका ने 2020 के लिए भारतीयों, पेशेवरों समेत विदेशी नागरिकों को लोकप्रिय एच-1 बी वीजा दिए जाने की संख्या 65 हजार तक सीमित कर दी है। तकनीकी कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से हर साल हजारों कर्मचारियों की भर्ती करने के लिए इस वीजा पर निर्भर रहती हैं।

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डोनाल्ड ट्रम्प

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