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ट्रेन पकड़ने की हड़बड़ी बन रही हादसों का कारण, यात्री हो रहे दुर्घटना का शिकार



भोपाल। कम समय के लिए ट्रेन के स्टेशन पर रुकने के बाद भी यात्री सामान लेने के लिए नीचे पर उतर जाते हैं। इसके बाद चलती ट्रेन को पकड़ने के प्रयास में वह हादसे का शिकार हो जाते हैं। यह खुलासा बीते छह महीने में रेल दावा अधिकरण, भोपाल में आए मामलों के कारण सामने आया है। रेलवे ने ऐसे 276 मामलों में यात्रियों को 64 हजार रुपए से लेकर 8 लाख रुपए तक का मुआवजा दिया। सर्वाधिक भोपाल और जबलपुर में हुए 310 हादसों में से 143 मामलों में पीड़ित को रेलवे ने रेल दावा अधिकरण के आदेश पर सहायता राशि दी। रेलवे ने रिकॉर्ड छह महीने में 607 मामलों में फैसले किए।

देश में कुल 19 रेल दावा अधिकरण हैं। इनमें से भोपाल में एक है। भोपाल में मप्र और छत्तीसगढ़ के रेल हादसों के मामले आते हैं। देश में सबसे कम समय में दावों का निराकरण भोपाल में होता है। इसमें वेस्टर्न सेंट्रल रेलवे के अलावा सेंट्रल रेलवे, साउथ ईस्ट रेलवे, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे और वेस्टर्न रेलवे आता है। इसमें सर्वाधिक वेस्टर्न सेंट्रल रेलवे के मामले रहते हैं। इसमें मंडल की जगह सीधे रेलवे पार्टी होती है। सामान्य सुनवाई के फैसले के खिलाफ रेलवे और पीड़ित पक्ष दोनों ही हाई कोर्ट भी जा सकते हैं, लेकिन लोक अदालत में होने वाले मामलों के फैसले के खिलाफ न्यायालय नहीं जा सकते हैं, क्योंकि यहां पर फैसले सहमति से होते हैं।

इन परिस्थितियों में मिलता है जुर्माना

  1. पीड़ित के पास रेल यात्रा का वैध टिकट हाेना अनिवार्य। मतलब अगर उसके पास भोपाल से बीना जाने का टिकट है, तो हादसा भी उसी के बीच जाते समय ही होना चाहिए।
  2. यात्री गाड़ी से हादसा प्लेटफार्म पर होना चाहिए।
  3. जीआरपी के बनाए प्रकरण के आधार पर ही दावा बनता है।
  4. इन परिस्थितियों में नहीं मिलता दावा
  5. खुदकुशी और खुदकुशी के प्रयास करने पर।
  6. आपराधिक गतिविधि करने पर।
  7. खुद को चोट पहुंचने के इरादे से किया जाने वाला कार्य। जैसे ट्रेन के ऊपर बैठ जाना। चलती ट्रेन से उतरने आदि।
  8. नशा करना करने और नशे में यात्रा के दौरान
  9. बीमारी और किसी प्राकृतिक कारण। मसलन ट्रेन में यात्रा के दौरान पहले से हुई बीमारी के कारण यात्री को कुछ हो जाने पर।

64 हजार से 8 लाख रुपए तक मिलता है जुर्माना

रेल दावा के अनुसार हादसे के शिकार यात्री को 64 हजार रुपए से लेकर 8 लाख रुपए तक मुआवजा मिलता है। इसमें 8 लाख रुपए यात्री की मौत पर मिलता है, जबकि कुछ परिस्थितियों जैसे दोनों हाथ या एक हाथ और एक पैर पूरी तरह खराब होने की परिस्थिति में भी 8 लाख रुपए रेलवे यात्री को देता है। इसके अलावा तीन नंबर की श्रेणी में मुआवजा 64 हजार रुपए से लेकर 7 लाख 20 हजार रुपए तक सिर्फ घायल होने पर मिलता है।

इस तरह करते हैं यात्री गलती

  • कम समय होने पर भी ट्रेन से उतरकर सामान लेने के दौरान ट्रेन चलने पर उसे पकड़ने की हड़बड़ी।
  • सामान, परिवार या परिचित के स्टेशन या ट्रेन में छूटने पर।
  • आउटर पर ट्रेन की गति कम होने पर उतरने का प्रयास करना।
  • भीड़ अधिक होने पर भी गेट पर ही खड़े रहने के कारण।

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