ब्रेकिंग न्यूज
loading...
Hindi News / राज्य / मध्य प्रदेश / डामोर अभी प्रदेश के एकमात्र विधायक जो भाजपा की ओर से प्रत्याशी बने, विस चुनाव में भूरिया के बेटे को हराया था

डामोर अभी प्रदेश के एकमात्र विधायक जो भाजपा की ओर से प्रत्याशी बने, विस चुनाव में भूरिया के बेटे को हराया था



रतलाम. भाजपा ने तीन उम्मीदवारों के साथ प्रत्याशियों की चौथी सूची रविवार को जारी कर दी। पार्टी के प्रदेश महामंत्री विष्णुदत्त शर्मा को खजुराहो से, पूर्व सांसद छतरसिंह दरबार को धार (अजजा) और जीएस डामोर को रतलाम (अजजा) संसदीय सीट से टिकट मिला है। डामोर इस समय झाबुआ से विधायक हैं। उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में रतलाम से कांग्रेस उम्मीदवार व सांसद कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत को हराया है।भोपाल, इंदौर, विदिशा, सागर और गुना पर फैसला होना बाकी है।

रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट पर भाजपा ने झाबुआ विधायक गुमानसिंह डामोर को टिकट दे दिया। भाजपा ने इस चुनाव में जो प्रत्याशी बनाएं, उनमें गुमानसिंह पहला नाम है जो वर्तमान विधायक हैं। उनके नाम को लेकर काफी दिनों से चर्चा थी, लेकिन विधायक होने की वजह से अड़ंगा लग सकता था। पार्टी ने यहां जीत सकने वाले प्रत्याशी के रूप में उन्हीं को देखा। विधानसभा चुनाव में सांसद कांतिलाल भूरिया के बेटे डॉ. विक्रांत भूरिया को दस हजार से ज्यादा वोट से हराया था। अब वो कांतिलाल भूरिया से टक्कर लेंगे। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में चीफ इंजीनियर के पद से रिटायर हुए गुमानसिंह की पत्नी सूरज डामोर भी स्वास्थ्य विभाग के संचालक थी। आरएसएस में उनके बड़े स्तर पर संपर्क हैं। राजनीतिक जानकार यही मान रहे थे कि इस सीट पर डामोर ही कांतिलाल भूरिया को टककर दे सकते हैं।

इसलिए मिला टिकट : गुमानसिंह डामाेर के अलावा इन दिनों भाजपा में कोई दूसरा बड़ा नाम नहीं बचा है। सारे नेता विधानसभा में जिले में दो सीटें हारने और प्रदेश में सरकार जाने के बाद से लगभग गायब हैं। जिला संगठन भी उनके पीछे-पीछे है। संघ में पकड़ और जीते हुए विधायक होने का फायदा मिला। संगठन में पकड़ इस हिसाब से ही समझी जा सकती है कि जिलाध्यक्ष को हटाने की बात पर सिर्फ उनके इंकार के कारण बदलाव नहीं हो पाया था। आर्थिक रूप से भी मजबूत हैं।

रिटायर के बाद राजनीति में आए : गुमान सिंह डामोर का जन्म जिले के उमरकोट में 4 अप्रेल 1957 काे हुआ था। 1980 में बीई करने के फौरन बाद सहायक यंत्री के पद पर नौकरी लग गई। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में वो इंजीनियर इन चीफ के पद पर थे, जब मार्च 2017 में रिटायर हुए। गुमानसिंह डामोर ने शहर के पास गडवाड़ा में एक छोटे से पुराने हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। साल 2001 में यहां नई बड़ी मूर्ति लगवाकर प्राण प्रतिष्ठा भी कराई थी। गणपति प्रतिमा की भी स्थापना कराई और बड़ा मंदिर बनवाया। वो खासे हनुमान भक्त हैं। विधानसभा चुनाव में हनुमानजी की छवि वाला बड़ा झंडा पूरे समय उनकी गाड़ी पर लगा रहा था।

3 नेता जो टिकट की दौड़ में छूटे

  • निर्मला भूरिया- दिवंगत नेता दिलीपसिंह भूरिया की बेटी। दिलीपसिंह भूरिया छ: बार सांसद रहे। निर्मला कई बार विधायक बनी और प्रदेश में मंत्री भी रहीं। 2015 के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी थी। 2018 विधानसभा चुनाव में पेटलावद सीट पर पार्टी ने उतारा था। लगातार चुनाव हारने के कारण वो दौड़ से बाहर हो गई। दूसरा ये कि दिलीपसिंह भूरिया की भाजपा में जिन नेताओं से बनती थी, उनकी अब पार्टी में चलना बंद हो गई।
  • कलसिंह भाबर– थांदला से दो बार विधायक रहे। एक बार भाजपा की ओर से और एक बार निर्दलीय। इस बा बुरी तरह विधानसभा चुनाव पार्टी के टिकट पर हारे। उनका विरोध काफी ज्यादा था। संघ में कुछ पकड़ है, लेकिन पुराने लोगों से। विरोध के कारण उनका नाम आगे नहीं आया।
  • गोरसिंह वसुनिया- ये भी दावेदारी कर रहे थे। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे। 2013 में भाजपा ने थांदला सीट पर टिकट दिया, लेकिन जमानत जब्त हो गई। तीसरे नंबर पर रहे। ऐसे में उनमें जीत की संभावना पार्टी को नहीं दिखी।

जानिए अपने प्रत्याशी को : मुकाबला बराबरी का…क्योंकि दोनों में बहुत कुछ है जो मेल खाता है

  • एजुकेशन : गुमानसिंह डामोर ने 1980 में बीई कर लिया था और इसी वर्ष में नौकरी लग गई थी। नौकरी पर रहते खरगोन में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने एलएलबी भी कर लिया। कांतिलाल भूरिया एमए एलएलबी हैं। उनके सामने पहली बार कोई इतना पढ़ा-लिखा प्रत्याशी है।
  • कॅरियर : भूरिया ने थांदला से पहला विधानसभा चुनाव 1980 में जीता। इसके पहले 1977 में वे हार गए थे। इसके बाद 4 बार विधायक और 5 बार सांसद रहे। वहीं डामोर ने 1980 में बीई पूरा किया। इसी साल वो इरिगेशन में सहायक यंत्री बन गए। रिटायर होने तक पीएचई के सबसे बड़े पद पर पहुंचे।
  • संपत्ति : 2015 के लोकसभा उपचुनाव में भूिरया ने जो ब्योरा दिया था उस हिसाब से 1.86 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है। पत्नी के पास 5.20 करोड़ से अधिक की संपत्ति। 2018 के विस चुनाव में डामोर ने शपथ पत्र दिया था, उसमें संपत्ति 2 करोड़ से अधिक थी और पत्नी 2 करोड़ रुपए के आसपास।

कांतिलाल भूरिया

  • ताकत : लगातार चार चुनाव जीते, एक हारे, फिर जीते। कहा जाता है, उनके राजयोग हैं। पूरे रतलाम क्षेत्र में उनके मुकाबले कोई आदिवासी नेता नहीं है। राहुल गांधी तक उनकी पहुंच संगठन में भी मजबूत बनाती है। 39 साल के राजनीतिक कॅरियर में सिर्फ एक साल ऐसा रहा जब वो सांसद या विधायक नहीं रहे। टिकट काफी पहले तय हो गया। 23 मार्च को घोषणा हो गई। ऐसे में प्रचार-प्रसार का समय काफी अधिक मिल गया। तबसे लगातार कार्यकताओं के बीच पहुंच रहे हैं। चुनावी मैनेजमेंट की अच्छी टीम और पुराने लाेगों का साथ। युवाओं की भी नई लॉबी तैयार की। विधानसभा चुनाव में बगावत करने वाले जेवियर मेड़ा जैसे लोग अब साथ हैं।
  • मजोरी : विधानसभा चुनाव में बेटे विक्रांत को नहीं जिता पाने के कारण उनकी क्षमता पर सवाल खड़े हुए। तबसे पूरे क्षेत्र के कई नेता नाराज भी हैं। झाबुआ के अलावा किसी सीट पर प्रचार करने भूरिया नहीं गए। आखिरी दिनों में कुछ जगह पहुंचे। भाजपा से तो टक्कर है ही, पार्टी के अंदर भी कई लोग उन्हें जिताना नहीं चाहते। भूरिया को वीआईपी नेता माना जाने लगा है। उनके भाषणों में भीली बोली का उपयोग नहीं होना भी अखरता है। पार्टी में उनके बारे में कहा जाने लगा है, भूरियाजी दूसरों को आगे नहीं आने देते।

गुमानसिंह डामोर

  • ताकत : प्रदेश में भाजपा के विरोध में हवा होने के बावजूद चुनाव जीते। झाबुआ सीट पर वोटिंग के सिर्फ आठ-दस दिन पहले नाम घोषित हुआ और वोट बटोरने में सफल हुए। राजनीतिक और प्रशासनिक तौर पर भोपाल-दिल्ली में पकड़। चुनावी मैनेजमेंट भी विस चुनाव में साबित किया। यहां ऐसे कार्यकर्ता उनके साथ जो ईमानदारी से काम करते हैं। जिला संगठन पूरी तरह से उनके साथ।
  • कमजोरी : विधानसभा चुनाव की सफलता कांग्रेस के बागी के कारण हुई। यही मैसेज दूसरे दावेदारों ने संगठन को भेजी भी थी। प्रदेश में भाजपा की हार के बाद अचानक पार्टी इतनी कमजोर दिख रही है। किसी प्रदर्शन या अायोजन में उंगलियों पर गिनने लायक लोग दिखते हैं। कई पुराने नेता अंदर ही अंदर पार्टी को नुकसान पहुंचाने की फिराक में। कुछ खुलकर भी विरोध कर रहे हैं।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


lok sabha elections 2019 bjp declares list of candidates in mp

Check Also

रिक्शा चालक ने 1 लाख रु. के जेवर से भरा बैग लौटाया

इंदौर | एक रिक्शा चालक ने ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुए एक लाख रुपए …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *