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डायबिटीज, बीपी के मरीजों में याद्दाश्त कम होने का खतरा ज्यादा, अधिक तनाव-भूलने का संकेत



हेल्थ डेस्क. अल्जाइमर यानी याद्दाश्त का धीरे-धीरे कम होना। ज्यादातर लोग समझते हैं कि ये बढ़ती उम्र के लोगों को होने वाली समस्या है। लेकिन इसके मामले युवाओं में भी देखे जा रहे हैं। इसका बड़ा कारण है तनाव। बिगड़ती लाइफस्टाइल की वजह से ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसका भी निगेटिव इफेक्ट हमारे दिमाग पर अल्जाइमर के रूप में होता है। जेनेटिक कारणों की वजह से अल्जाइमर होने का खतरा अधिक होता है। कई बार सिर पर चोट लगने या गिर जाने की वजह से अल्जाइमर या डिमेंशिया जैसी हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती हैं। 21 सितंबर को वर्ल्ड अल्जाइमर डे मनाया जाता है। अल्जाइमर डे की शुरुआत 2012 में हुई थी। इस बीमारी का नाम अलोइस अल्जाइमर के नाम पर रखा गया, जिन्होंने सबसे पहले इस बीमारी के बारे में बताया था। कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मधुकर भारद्वाज और न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अतुल तापड़िया से जानते हैं इससे कैसे निपटें…

    • याददाश्त कम होना। सही निर्णय न ले पाना। लोगों के नाम, नंबर या पता भूलना।
    • मुसीबत से निपटने में परेशानी का सामना करना।
    • डेली रुटीन के कामों को पूरा करने में असफल होना। अपने परिचितों को भूलने लगना। घर और बाहर के कामों में मुश्किलों का सामना करना।
    • इसका इलाज तीन चरणों में किया जाता है। पहले चरण में मरीज और फैमिली मेंबर्स की काउंसिलिंग की जाती है। दूसरे चरण में बीमारी का कारण पता करते हैं। इसके बाद दवाएं और थेरेपीज दी जाती हैं।
    • रिकवरी के लिए रोज मेडिटेशन करें। याद्दाश्त तेज करने के लिए सर्वांगासन करने से फायदा होता है।
    • एकाग्रता बढ़ाने के लिए कपालभाति और भुजंगासन जैसी योग क्रियाएं करना भी फायदेमंद है।
    • सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा की गई रिसर्च के अनुसार एंटीआक्सीडेंट्स से भरपूर चीजें अल्जाइमर का असर कम करने में मदद करती हैं।
    • हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल और ग्रीन टी को अपनी डाइट में शामिल करके इस बीमारी से बचा जा सकता है।
  1. अल्जाइमर में बचाव के तौर पर डॉक्टर्स लाइफस्टाइल में बदलाव लाने की हिदायत देते हैं। जैसे-

    • अपनी फैमिली, बच्चों और दोस्तों के साथ वक्त बिताने से इस बीमारी का रिस्क कम होता है।
    • सोशल एक्टिविटी में ध्यान लगाएं और फिजिकल वर्कआउट करें।
    • चाहें तो अपनी पसंद के अनुसार खेलों का चयन करके इस बीमारी की गंभीरता को कम किया जा सकता है।
    • डाइट में ताजा फल, सब्जी, मछली, दूध और अंडे का प्रयोग करें। इन चीजों में मौजूद न्यूट्रिएंट्स अल्जाइमर का रिस्क कम करने में मदद करते हैं।
  2. अमेरिकल जर्नल ऑफ सायकियाट्री में प्रकाशित शोध के अनुसार बेचैनी भी इसका एक कारण है। ऐसी स्थिति में शरीर में बीटा-एमीलॉइड प्रोटीन का स्तर बढ़ता है। यह प्रोटीन अल्जाइमर से जुड़ा है। इस रिसर्च में 62-90 वर्ष के 270 स्वस्थ लोग शामिल किए गए। परिणाम के तौर पर सामने आया कि एंग्जाइटी यानी बेचैनी अल्जाइमर का शुरुआत की लक्षण हो सकता है।

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