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तमिलनाडु के नमक्कल शहर में स्थित आंजनेय मंदिर, यहां हनुमानजी कर रहे हैं प्रकृति की उपासाना



रिलिजन डेस्क.हनुमानजी जयंती चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो इस बार 19 अप्रैल को है। इस दिन बजरंग बली की विधिवत पूजा करने से शत्रु पर विजय और मनोकामना की पूर्ति होती है। वैसे तो हनुमानजी के अनेकों मंदिर हैं पर तमिलनाडु में नमक्कल शहर में स्थित आंजनेय मंदिर काफी अद्भुत है। इस मंदिर में भगवान हनुमान अपने हाथों में एक जपमाला के साथ खुले आसमान के नीचे पूजा करते हुए दिखाई देते हैं।

यह है इतिहास

  • इस मंदिर का निर्माण वास्तुकला की द्रविड़ियन शैली में किया गया है। यहां हनुमानजी की मूर्ति 18 फीट (5.5 मीटर) ऊंची हैं। यह विशाल मूर्ति एक ही पत्थर से बनाई गई है। लगभग 1500 साल पुराना, यह प्राचीन मंदिर नमक्कल किले के नीचे स्थित है। लोगों का मानना है कि हनुमानजी यहां प्रकृति की उपासाना कर रहे हैं।
    • ऐसी मान्यता है कि इस स्थान पर ही लक्ष्मीजी ने विष्णु भगवान की तपस्या की थी। तपस्या के दौरान उन्होंने हनुमानजी से विष्णुजी का नृसिंह रूप दिखाने का अनुरोध किया। हुनमानजी ने उन्हें सालीग्राम पर बनी विष्णुजी की तस्वीर सौंप दी।
    • लक्ष्मीजी ने जब सालीग्राम जमीन पर रखा तो वह एक पहाड़ में बदल गया और उसमें से नृसिंह रूप में भगवान विष्णुप्रकट हुए और इस स्थान को अपना निवास बना लिया।
    • यह नृसिंह मंदिर के सम्मुख लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित है। हनुमान जी की मूर्ति कुछ इस तरह स्थापित की गई है कि भगवान अंजनियर का मुख भगवान नृसिंह की ओर है। यह माना जाता है कि प्रभु आंजनेय की प्रतिमा किले के एक अभिभावक के रूप में कार्य करती है और दुश्मनों के आक्रमण से रक्षा करती है।
    • ऐसी मान्यता है कि राम भक्त हनुमान यहां नेपाल से एक पर्वत लेकर आए थे, जो कि उन्हें नृसिंहजी ने लाने के लिए कहा था। यहां हनुमान जी की मूर्ति विश्वरूप धरण मुद्रा में है। इस रूप में हनुमानजी खुली छत के नीचे प्रकृति की पूजा कर रहे हैं।
    • कहा जाता है कि हनुमानजी को यहां अपने ऊपर छत पसंद नहीं है। कई भार भक्तों द्वारा मूर्ति के ऊपर छत बनाने का प्रयास किया गया पर वह सफल नहीं हो पाए। ऐसा कहा जाता है कि सामने स्थित नृसिंह भगवान के मंदिर भगवान नृसिंह की मूर्ति गुफा के अंदर रखी हुई है, जिसके उपर अलग से कोई छत नहीं हैं, इसीलिए हनुमानजी को यहां अपने ऊपर छत रखना पसंद नहीं है।
    • इस दिन व्रत रखने वालों को कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। व्रत रखने वाले व्रत की पूर्व रात्रि से ब्रह्मचर्य का पालन करें। हो सके तो जमीन पर ही सोएं, इससे अधिक लाभ होगा।
    • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर प्रभू श्री राम, माता सीता व श्री हनुमान का स्मरण करें। तद्पश्चात नित्य क्रिया से निवृत होकर स्नान करें और हनुमान जी की प्रतिमा को स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा करें।इसके बाद हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करें।
    • फिर हनुमान जी की आरती उतारें।
    • इस दिन स्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का अखंड पाठ भी करवाया जाता है। प्रसाद के रूप में गुड़, भीगे या भुने चने एवं बेसन के लड्डू हनुमान जी को चढ़ाए जाते हैं।
    • पूजा सामग्री में सिंदूर, केसर युक्त चंदन, धूप, अगरबती, दीपक के लिए शुद्ध घी या चमेली के तेल का उपयोग करना शुभ माना जाता है। इस दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाने से मनोकामना की शीघ्र पूर्ति होती है।
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      in this temple god hanumanji is worshiping nature

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