ब्रेकिंग न्यूज
loading...
Hindi News / स्वास्थ्य चिकित्सा / दवा की तरह ले सकेंगे बैक्टीरिया, शरीर से अमोनिया निकालकर करेगा इलाज

दवा की तरह ले सकेंगे बैक्टीरिया, शरीर से अमोनिया निकालकर करेगा इलाज



हेल्थ डेस्क. बैक्टीरिया अब बीमारियों से लड़ने के लिए दवा के रूप में लिया जाएगा।मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने जेनेटिकली मॉडिफाइड बैक्टीरिया (ई-कोली निसेल) विकसित किया है। यहशरीर में अमोनिया का स्तर ज्यादा होने पर इसे बाहर निकालकर पेट और लिवर की बीमारियों का इलाज करेगा। इसे लिविंग मेडिसिन का नाम दिया गया है।

    • जेनिटिकली मोडिफाइड बैक्टीरिया को मैसाच्यूसेट्स ऑफ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की एक फर्म सिनलॉजिक ने तैयार किया है। चूहे पर हुए प्रयोग में सामने आया कि यह अमोनिया के खतरनाक स्तर को घटाने में समर्थ है।
    • रिसर्च के दौरान, चूहे को बैक्टीरिया की ओरल डोज (SYNB1020) दी गई। इसके बाद उसके ब्लड में अमोनिया का स्तर कम हुआ और जीवित रहने की संभावना बढ़ी।
    • वैज्ञानिकों के मुताबिक, ऐसे लोग जिनका लिवर डैमेज हो चुका है या दुर्लभ जेनेटिक डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं उनके लिए अमोनिया जानलेवा बन सकता है। ऐसे मरीजों में जेनेटिकली मॉडिफाइड बैक्टीरिया सर्वाइवल रेट बढ़ाने का काम करताहै।
    • इसका परीक्षण स्वस्थ इंसानों पर भी किया गया है, यह उनके लिए सुरक्षित साबित हुआ है। फर्म के हेड पाउल मिलर का कहना है कि इंसान को स्वस्थ रखने के लिए बैक्टीरिया में जेनेटिकली बदलाव कर उसे तैयार किया जा सकता है।
    • बैक्टीरिया की डोज (SYNB1020) उस स्थिति में ली जाती है जब शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम और अमोनिया का स्तर बढ़ जाता है। डोज की मदद से अमोनिया को आर्जेनीन (अमीनो एसिड) में तोड़ा जाता है।
    • वैज्ञानिकों का दावा, बैक्टीरिया में ऐसे बदलाव किए गए हैं कि इनकी संख्या में तय मात्रा में ही बढ़ोतरी होती है। इसलिए आंतों में इनकी संख्या अधिक बढ़ने का खतरा बिल्कुल भी नहीं है।
    • हायपर अमोनिया ऐसी स्थिति है जब रक्त में अमोनिया की मात्रा अधिक बढ़ जाती है। एक स्वस्थइंसान में प्रोटीन केपाचन के बाद अमोनिया का निर्माण होता है।
    • लिवर में अमोनिया को यूरिया में तब्दील करने के बाद यूरिन के माध्यम से शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
    • लिवर डैमेज होने की स्थिति में अमोनिया का स्तर बढ़ता जाता है और रक्त में घुलकर मस्तिष्क तक पहुंचती है। स्थिति गंभीर होने पर मरीज की जान भी जा सकती है।
    1. Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


      MIT scientist develops first living medicine GM microbes can mop up toxins in the human body

Check Also

पहली नजर का प्यार कभी न भुलाया जाने वाला एहसास है, मनोवैज्ञानिकों ने माना कहावत नहीं हकीकत

लाइफस्टाइल डेस्क.पहली नजर का प्यार सिर्फ कहावत नहीं बल्कि हकीकत है। मनोवैज्ञानिकों ने भी हाल …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *