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दो माह में दो बार लग चुकी थी ट्रांसफॉर्मर में आग, बदल देते तो नहीं जाती व्यापारी की जान



भोपाल .लालवानी प्रेस रोड स्थित राम गणेश कॉम्पलेक्स के सामने ट्रांसफॉर्मर में लगी आग ने बिजली कंपनी की लापरवाही एक बार फिर उजागर कर दी है। इस ट्रांसफॉर्मर में दो महीने पहले भी शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी। बिजली कंपनी से शिकायत की तो उसे सुधार दिया गया, लेकिन बदला नहीं गया।

इसके दस दिन बाद फिर आग लगी तो बिजली कंपनी के स्टाफ ने कहा कि ट्रांसफॉर्मर का ऑयल बार-बार जल रहा है। इस कॉम्पलेक्स के सामने दुकान संचालित करने वाले विवेक जैन ने बताया कि दोनों बार बिजली कंपनी से ट्रांसफॉर्मर की शिकायत की थी, लेकिन कोई हल नहीं निकला। यदि हमारी शिकायतों पर सुनवाई हो गई होती तो आज संदीप जैन की जान नहीं जाती। मंगलवार को लगी आग ने कॉम्पलेक्स की पांच-छह दुकानों को प्रभावित किया है। सभी व्यापारियों को दुकान में भरे धुएं और फायर ब्रिगेड के पानी से भारी नुकसान हुआ है।

धुएं से सांस लेना मुश्किल :आग से निकल रहा धुआं आसपास के पूरे इलाके में फैल गया था। तार और ट्रांसफार्मर का ऑयल जलने के कारण धुएं में सांस लेना भी लोगों के लिए मुश्किल हो रहा था। शाम करीब साढ़े चार बजे इलाके की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई थी।

रहवासी बोले- बगैर तैयारी पहुंची दमकल, पाइप का नोजल फिट करने में लगा दिए 20 मिनट

और इधर…निजी प्रिंटिंग प्रेस में आग से दहशत :गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक निजी प्रिंटिंग प्रेस के गोदाम में आग लगने से मंगलवार रात दहशत फैल गई। आग, पेपर के बड़े बंडल में शाम करीब 7 बजे लगी थी। धीरे-धीरे इसने अन्य बंडलों को भी चपेट में ले लिया। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम रात 12 बजे तक आग पर पूरी तरह काबू नहीं पा सकी थी। इन चार घंटों में करीब 50 गाड़ियों से आग बुझाने की नाकाम कोशिश जारी रही। फिलहाल आग की वजह सामने नहीं आ सकी है।

बगैर तैयारी के आ गई थी फायर ब्रिगेड :रहवासी वीरेंद्र योगी ने आरोप लगाया कि ट्रांसफॉर्मर में जब चिंगारी उठ रही थी, तभी फायर ब्रिगेड को फोन कर दिए गए थे। दमकल की टीम करीब आधा घंटे बाद मौके पर पहुंची। पहली टीम आई तो गाड़ी में केवल ड्राइवर और एक फायर फाइटर था। उसे नोजल लगाने में ही 20 मिनट लग गए। तब तक आग भड़क चुकी थी।

दुकान के कर्मचारी बुझाते रहे आग :कपड़ा व्यापारी ओम प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि आग भड़कते देख दुकानों के कर्मचारी खुद ही इसे बुझाने में जुट गए थे। फायरकर्मी दूसरी या पहली मंजिल पर जाने के लिए तैयार नहीं थे। चेहरे पर रुमाल बांधकर सचिन, अमन, विशाल और नरेंद्र पहली मंजिल पर चढ़ गए। जितना हो सका पानी डालकर आग बुझाने की कोशिशें करते रहे।

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Two times in two months was a fire in transformer

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