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नए सत्र से व्यावहारिक ज्ञान भी पढ़ेंगे डॉक्टर, यदि मरीज की डेथ होने वाली है तो उनके परिजनों को जानकारी कैसे दें



आशीष जैन @ कोटा. देश के 500 से ज्यादा मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस के लिए इस सत्र यानी एक अगस्त से एडमिशन पाने वाले 70 हजार स्टूडेंट्स को बदला हुआ पाठ्यक्रम मिलेगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के स्तर पर इस पाठ्यक्रम को लागू करने के लिए तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है। पूरे देश में 20 रीजनल सेंटर बनाए गए हैं।

  1. आजादी के बाद पहली बार चिकित्सा शिक्षा के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। अहमदाबाद स्थित रीजनल सेंटर से ट्रेनिंग लेकर आए कोटा मेडिकल कॉलेज की मेडिकल एजुकेशन यूनिट के चेयरमेन डॉ. विजय सरदाना ने इस बदलाव को उदाहरण देकर समझाया।

    उन्होंने बताया- मान लीजिए किसी मरीज की डेथ होने वाली है, जिसका डॉक्टर को अनुमान हो चुका है। उस स्थिति में मरीज के तीमारदारों को कैसे डील करना है, यह भी अब पढ़ाया जाएगा। अब तक सीधे वर्किंग प्लेस पर ही जाकर परिस्थितियों से सामना होता था। अब पढ़ाई कॉम्पिटेंसी बेस लर्निंग पर आधारित है, इससे तय होगा कि एक मॉड्यूल पढ़ाने के बाद आपको क्या ज्ञान होना चाहिए।

  2. पूरी दुनिया में पाठ्यक्रम का यही मॉडल लागू है। इसलिए अब भारत में इसे लागू करने का दबाव है, क्योंकि वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ मेडिकल इंस्टीट्यूट भारत सरकार को आगाह कर चुकी है। फेडरेशन ने ये भी कहा कि 2024 में पास होने वाले बैच यही पाठ्यक्रम पढ़कर आएंगे, तभी उन्हें ग्लोबल मान्यता मिलेगी।

    • फर्स्ट ईयर: इसमें 5 मॉड्यूल रहेंगे और पूरे साल में 34 घंटे की क्लास रहेगी। बताया जाएगा कि डॉक्टर-पेशेंट के मायने क्या हैं।
    • सेकंड : इसमें 8 मॉड्यूल, 37 घंटे की टीचिंग होगी। कम्युनिकेशन स्किल, बायो इथिक्स, मरीज के अटेंडेंट की फीलिंग से भावी डॉक्टरों को रूबरू कराया जाएगा।
    • थर्ड : इसमें 5 मॉड्यूल होंगे और 25 घंटे की टीचिंग अनिवार्य है। बताया जाएगा कि कोई मेडिकल एरर हो तो कैसे निपटा जाए।
    • फोर्थ : इसमें 9 मॉड्यूल, 44 घंटे की टीचिंग कराई जाएगी। बताया जाएगा कि मौत के मामलों में कैसे डील करना है।
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