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नोटबंदी के बाद दो-दो हजार के नोट दो हजार करोड़ की कीमत के थे, अब 500 करोड़ के बचे



संजय गुप्ता,इंदौर.नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक ने बैंकों के पास दो-दो हजार के नोट बड़ी संख्या में भेजे थे। आरबीआई द्वारा बैंकों की चेस्ट में भेजे जा रहे नोटों में 60 और 40 फीसदी का अनुपात था, यानी 40 फीसदी नोट दो-दो हजार रुपए के थे और 60 फीसदी नोटों में सौ, पांच सौ रुपए के नोट आ रहे थे।

इंदौर के बैंकों की 18 चेस्ट हैं, जहां नोट रखे जाते हैं। यहां पर पांच हजार करोड़ मूल्य के नोट हैं। नोटबंदी के बाद यहां पर दो हजार वाले नोट दो हजार करोड़ से अधिक कीमत के मौजूद थे। इन नोटों को बैंकों ने काफी चलन में किया और ग्राहकों को बड़ी संख्या में यह नोट दिए गए। धीरे-धीरे इन नोटों का वापस बैंक में आना बंद हो गया और जारी किए गए नोटों में से मुश्किल से दस फीसदी नोट ही वापस बैंकों में जमा के रूप में आए।

डेढ़ हजार करोड़ के नोट चलन से बाहर

अब हालत यह है कि बैंकों की चेस्ट में रखे पांच हजार करोड़ मूल्य के नोट में से केवल एक फीसदी ही दो-दो हजार रुपए की स्थिति में हैं। यानी इंदौर में यह नोट बैंकों के पास केवल 500 करोड़ मूल्य के ही रखे हुए हैं। बाकी डेढ़ हजार करोड़ के दो-दो हजार के नोट दैनिक चलन से बाहर हो गए हैं। इनके लिए आशंका है कि ये ब्लैक मनी के रूप में लेन-देन में उपयोग में आ रहे हैं।

चुनाव आयोग ने कहा था इंदौर व्यावसायिक राजधानी, धनबल की रहती है आशंका
विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत ने इंदौर में बैठक ली थी। इसमें सभी निर्वाचन अधिकारियों को हिदायत दी थी कि इंदौर व्यावसायिक राजधानी है और यहां पर चुनाव में धनबल की बड़ी आशंका है, इसलिए इस पर कसावट लाना चुनाव अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। आयोग के इसी आदेश के चलते तत्कालीन कलेक्टर निशांत वरवड़े ने सभी डीलरों को उनकी थोक बिक्री का हिसाब देना भी अनिवार्य कर दिया था। चुनाव के दौरान बड़ी मात्रा में कैश भी इंदौर में पकड़ाया था, जिसके चुनाव में उपयोग की आशंका व्यक्त की गई थी।

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Two thousand notes worth of two thousand crores after demonetisation now remaining 500 crores

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