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न्यूजीलैंड दुनिया का दूसरा सबसे शांत देश, लेकिन यहां हर चौथे व्यक्ति के पास बंदूक



वेलिंगटन/नई दिल्ली. न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में अल-नूर और लिनवुड मस्जिद में शुक्रवार को गोलीबारी हुई। हमले में 49 लोगों की मौत हो गई। प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने इसे आतंकी हमला बताया। 29 साल में न्यूजीलैंड में यह पहला मौका है, जब इस तरह की मास शूटिंग हुई है।

ग्लोबल पीस इंडेक्स के मुताबिक, न्यूजीलैंड दुनिया का दूसरा सबसे शांत देश है। न्यूजीलैंड 2017 और 2018 में दूसरे नंबर पर रहा है। इससे पहले भी हमेशा टॉप-4 में रहा है। 2007 से 2016 के बीच यहां हत्याओं के मामले दहाई के आंकड़े में भी नहीं थे। 2017 में न्यूजीलैंड में मर्डर के 35 मामले सामने आए थे।

1990 में ऐसी गोलीबारी हुई थी, इसके बाद बंदूक रखने के नियम सख्त किए गए थे
नवंबर 1990 में न्यूजीलैंड के ड्यूनडीन शहर की अरामोआना टाउनशिप में इस तरह की गोलीबारी हुई थी, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले को डेविड ग्रे ने अंजाम दिया था, जिसे एनकाउंटर में मार दिया गया था। हमले के दो साल बाद 1992 में न्यूजीलैंड में बंदूक रखने के नियमों को कड़ा कर दिया गया। इसके बावजूद न्यूजीलैंड में गन कल्चर बढ़ता गया।

न्यूजीलैंड में हमले के 5 कारण

1) हमला 29 साल बाद हुआ, लेकिन व्हाइट सुप्रीमेसी धीरे-धीरे बढ़ रही थी
पश्चिमी और यूरोपीय देशों में व्हाइट सुप्रीमेसी का चलन है यानी गोरे लोगों का वर्चस्व। इन देशों में रहने वाले गोरे लोग खुद को दूसरे लोगों से बेहतर मानते हैं। हमलावर भी व्हाइट सुप्रीमैटिस्ट है। उसने अपने मैनिफेस्टो में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को व्हाइट सुप्रीमेसी का प्रतीक बताया है। हमलावर ने अपने मैनिफेस्टो में लिखा, ‘‘हमला करने वालों को बताना है कि हमारी जगह उनकी कभी नहीं होगी। जब तक एक भी श्वेत व्यक्ति है, तब तक वे कभी नहीं जीत पाएंगे।’’ क्राइस्टचर्च हमेशा से व्हाइट सुप्रीमेसी को बढ़ावा देने वाली जगह रही है। यहां पिछले 20 साल में अप्रवासियों पर हमले होते रहे हैं।

2) कम क्राइम रेट के बावजूद गन कल्चर
न्यूजीलैंड में अमेरिका की तरह गन कल्चर है। स्मॉल आर्म सर्वे के मुताबिक, न्यूजीलैंड में 12 लाख लोगों के पास बंदूकें हैं जबकि 2017 तक वहां की आबादी 47.9 लाख थी यानी यहां हर चौथे इंसान के पास अपनी बंदूक है। यहां अभी 16 साल से ऊपर का कोई भी व्यक्ति अपनी बंदूक रखने का लाइसेंस ले सकता है।

3) लोगों के पास बंदूकें, लेकिन ज्यादातर पुलिसकर्मी हथियार नहीं रखते
कमांडोज को छोड़ दें तो न्यूजीलैंड में ज्यादातर पुलिस अफसरों के पास हथियार नहीं हाेते। 2017 में न्यूजीलैंड में पुलिसकर्मियों पर एक सर्वे किया गया। तब 66% पुलिसकर्मियों ने कहा था कि बढ़ते गन कल्चर के मद्देनजर उन्हें भी हथियार रखने चाहिए, जबकि 2008 में इसी तरह के सर्वे में सिर्फ 48% पुलिसकर्मी हथियार साथ लेकर चलने के पक्ष में थे।

4) दक्षिणपंथ
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मैरिसन ने इस बात की पुष्टि की है कि क्राइस्टचर्च में गोलीबारी करने वाला हमलावर ऑस्ट्रेलिया का नागरिक था और दक्षिणपंथी चरमपंथी था। हमलावर का नाम ब्रैंटन टैरंट बताया जा रहा है। ब्रैंटन ने हमला करने से पहले सोशल मीडिया पर कथित तौर पर लिखा भी है कि वह दक्षिणपंथी विचारधारा से प्रभावित है।

5) इस्लामोफोबिया
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस हमले के पीछे ‘इस्लामोफोबिया’ को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “मैं इन बढ़ती आतंकी घटनाओं के लिए 9/11 हमले के बाद दुनियाभर में जारी इस्लामोफोबिया को जिम्मेदार मानता हूं, जिसमें किसी एक मुस्लिम के आतंकी एक्ट की वजह से पूरी मुस्लिम आबादी को जिम्मेदार माना जाता है।”

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new zealand peaceful country christchurch mass shooting reasons


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