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पणाकम ड्रिंक: दक्षिण भारत की 'ठंडाई'



हेल्थ डेस्क.उत्तर भारत में ठंडाई के बिना होली फीकी मानी जाती है।लेकिन आज शेफ हरपाल सिंह सोखी बात कर रहे हैं दक्षिण भारत की ‘ठंडाई’ की, जिसका नाम है ‘पणाकम’।

भगवान नरसिंह का गुस्सा ठंडाकरने के लिए बना था पणाकम

प्रह्लाद, होलिका और हिरण्यकश्यप की कहानी से सभी वाकिफ होंगे ही। होलिका का दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। होलिका की मृत्यु के बाद भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार ने अपने भक्त प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप को मारा था। दक्षिण में प्रचलित कहानी के अनुसार हिरण्यकश्यप को मारते समय भगवान नरसिंह इतने गुस्से में थे कि चारों ओर अग्नि बरसने लगी। नरसिंह के गुस्से की अग्नि को शांत करने के लिए प्रह्लाद ने उन्हें एक ठंडा रस ‘पणाकम’ प्रदान किया। इसके पीते ही भगवान नरसिंह शांत हो गए। इसलिए दक्षिण भारतीय लोग ‘पणाकम’ को प्रसाद के तौर पर अर्पित करते हैं।

ठंडे पानी और गुड़ से बनती है ये आसान ड्रिंक

पणाकम बनाने में दो चीजें बहुत जरूरी होती हैं – ठंडा पानी और गुड़। आधे लीटर पणाकम को बनाने के लिए करीब 150 ग्राम गुड़ की जरूरत पड़ती है। पहले ठंडे पानी में गुड़ को अच्छी तरह से घोल लिया जाता है। फिर इस घोल में काली मिर्च व हरी इलाइची का चुटकी भर पाउडर और इतनी ही मात्रा में सौंठ मिलाई जाती है। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें नींबू का रस भी मिलाया जाता है। प्रसाद के तौर पर बनाने पर इसमें ऊपर से तुलसी की पत्तियां डाली जाती हैं। इस प्रसाद को भगवान नरसिंह को अर्पित किया जाता है।

दक्षिण भारत में इसे अलग-अलग मौकों पर बनाते हैं। कुछ लोग इसे होलिका दहन वाले दिन बनाते हैं तो अधिकांश लोग रामनवमीं के दिन। वैसे गर्मी के दिनों में यह सबसे हेल्दी कोल्ड ड्रिंक माना जाता है। इसलिए कई लोग समर में इसका नियमित सेवन भी करते हैं।

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food history by chef harpal singh sokhi- cold drink of the south panakam

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