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पतंगों ने काटी मेट्रो की डोर, द्वारका लाइन पर फंसे हजारों लोग

n विशेष संवाददाता, नई दिल्ली पिछले कुछ सालों की तरह इस साल भी रक्षाबंधन पर दिल्ली मेट्रो ने अपना खराब ट्रैक रिकॉर्ड कायम रखा और लोगों को सहूलियत पहुंचाने के बजाय उन्हें भारी मुसीबत में डाल दिया। मेट्रो की ब्लूलाइन पर गुरुवार को अचानक आई खराबी के चलते रक्षाबंधन मनाने के लिए अपने घरों से निकले लाखों भाई-बहनों ने डीएमआरसी को जमकर कोसा। एक तरफ स्टेशनों पर यात्रियों की भारी, तो वहीं ट्रेनों में भी भीड़ की वजह से पैर रखने तक कि जगह नहीं मिल पा रही थी। रूट पर ट्रेनों की बंचिंग हो जाने की वजह से जो ट्रेनें चल रही थीं, उनकी रफ्तार भी काफी स्लो थी। इस वजह से यात्रा में काफी वक्त भी लग रहा था। डीएमआरसी ने अपने बचाव में दलील दी कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली में बड़े पैमाने पर पतंगबाजी होने की वजह से मेट्रो की ब्लूलाइन पर कई जगह पतंग और उनकी डोर मेट्रो के वायरों में फंस गई थीं, जिसकी वजह से ट्रेन ऑपरेशन प्रभावित हुआ। डीएमआरसी के मुताबिक, गुरुवार को दोपहर 2 बजे के करीब ब्लूलाइन पर यह समस्या पैदा हुई थी। एक ट्रेन द्वारका से नोएडा/वैशाली की तरफ जा रही थी। उसी दौरान सुभाष नगर और राजौरी गार्डन स्टेशनों के बीच मेट्रो का ओएचई बिजली के तारों में फंसी पतंग और उसके मांझे के संपर्क में आकर ट्रिप कर गया, जिसकी वजह से पूरे रूट मेट्रो ट्रेनें थम गईं। रक्षाबंधन के रश को देखते हुए खराबी दूर होने तक मेट्रो को दो अलग-अलग लूप में चलाने का फैसला किया गया। एक तरफ कीर्ति नगर से नोएडा और वैशाली के बीच अप और डाउन, दोनों लाइनों पर ट्रेन चलाई गई। वहीं दूसरी तरफ कीर्ति नगर से जनकपुरी वेस्ट के बीच अप लाइन के जरिए सिंगल लाइन ट्रेन ऑपरेशन शुरू किया गया, यानी एक ही ट्रैक से आने और जाने वाली दोनों ट्रेनें बारी-बारी से निकाली गईं। हालांकि इसकी वजह से ट्रेनों का वेटिंग टाइम बढ़ गया, जिसका असर ट्रेनों के अंदर और प्लैटफॉर्मों पर भीड़ के रूप में नजर आया। इस बीच मेंटिनेंस डिपार्टमेंट की टीम प्रभावित स्ट्रेच पर तारों की फिजिकल चेकिंग में जुट गई, ताकि अगर कहीं पर कोई और पतंग या मांझा फंसा हो, तो उसे निकाला जा सके। डीएमआरसी का दावा है कि जिस जगह ओएचई ट्रिप हुआ था, वहां आसपास काफी सारा पतंग का मांझा तारों में उलझा हुआ था, जिसे दिक्कत हुई।

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