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पोर्टेबिलिटी लागू होने पर सेट टॉप बॉक्स बदले बिना बदल सकेंगे केबल या डीटीएच ऑपरेटर



गैजेट डेस्क. संसार का हर व्यक्ति कंज्यूमर है। वो अपने जन्म के दिन से ही किसी न किसी वस्तु का उपभोग शुरू कर देता है। इसमें कई बार हमें धोखा मिलता है, तो कई बार भरोसा कर हम ठगे भी जाते हैं। ऐसे में हम इस सीरीज़ में आपको उन अधिकारों और मामलों के बारे में बताएंगे जिन्हें जानना जरूरी है।

एक उपभोक्ता के तौर पर केबल टीवी या डीटीएच सेवा प्रदाता की मनमानी का शिकार हर व्यक्ति को होना पड़ता है। तमाम परेशानियों और सेवा प्रदाता की हठधर्मिता के बावजूद कनेक्शन बदलना आसान नहीं होता, क्योंकि नए कनेक्शन के साथ नया सेट टॉप बॉक्स लेना पड़ता है। इसके अलावा इंस्टालेशन और अन्य चार्ज अलग से देने होते हैं। उपभोक्ता इस खर्च की वजह से नाराजगी के बावजूद कनेक्शन नहीं बदल पाता है और यही बात ऑपरेटर की मनमानी को बढ़ाती है। लेकिन, करीब दस सालों से चल रही बहस के बाद अब ट्राई इस साल के आखिर तक केबल और डीटीएच पोर्टेबिलिटी शुरू करने का दावा कर रहा है। इस सुविधा के शुरू होने पर मोबाइल की तरह बिना सेट टॉप बॉक्स बदले आप अपने ऑपरेटर को बदल सकेंगे।

  1. नया टैरिफ लागू होने के बाद वैसे भी उपभोक्ता अब अपनी मर्जी के चैनल देख सकता है, इससे ऐसे चैनलों पर दबाव आ गया है जिनका स्तर अच्छा नहीं है। कई पे-चैनल रातोरात फ्री टू एयर हो गए और ऑपरेटर सौ चैनल चुनने के बावजूद ऐसे फ्री चैनलों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दिखा रहे हैं। पोर्टेबिलिटी शुरू होने से ऑपरेटर पर भी उपभोक्ता का दबाव बढ़ जाएगा और वह बेहतर सुविधा देने के लिए मजबूर होगा। हाल ही में एक ऑपरेटर ने ऐसा कार्ड जारी किया है, जिसे किसी भी ऑपरेटर के सेट टॉप बॉक्स में लगाकर उसके डीटीएच को देखा जा सकता है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के चेयरमैन आर.एस. शर्मा कहते हैं कि इस साल के अंत तक सेट टॉप बॉक्स बदले बिना डीटीएच और केबल सेवा प्रदाता को बदलने की सुविधा शुरू हो जाएगी। वह बताते हैं कि पिछले दो वर्षों से वे सेट टॉप बॉक्स को ऐसा बनाने की कोशिश कर रहे थे, जिससे उसे किसी भी ऑपरेटर की सेवा के लिए इस्तेमाल किया जा सके। इसका बड़ा हिस्सा पूरा हो गया है और बिजनेस से जुड़ी कुछ चुनौतियां बाकी हैं, जिन्हें इस साल के आखिर तक सुलझा लिया जाएगा।

  2. हालांकि, इस सेवा को लागू करने का डीटीएच और केबल सेवा देने वालों की ओर से विरोध किया जा रहा था। इसलिए यह आसानी से लागू हो पाएगी, इसमें संदेह है। नए टैरिफ को लागू कराने में भी ट्राई को पसीना आ गया था। कई महीनों की कानूनी लड़ाई के बाद ही वह लागू हो सका। ट्राई का कहना है कि जब हमने नया टैरिफ लागू करा दिया तो केबल व डीटीएच पोर्टेबिलिटी भी लागू होकर ही रहेगी। शर्मा कहते हैं कि हम इस पर लगातार काम कर रहे हैं।

  3. अभी तक केबल व डीटीएच पोर्टेबिलिटी लागू करने में सबसे बड़ी दिक्कत सेट टॉप बॉक्स का अलग-अलग सॉफ्टवेयर था और इसे ऑपरेटर द्वारा कन्फीगर किया जाता था, जिससे एक ऑपरेटर का सेट टॉप बॉक्स दूसरी कंपनी के सॉफ्टवेयर को सपोर्ट नहीं करता था। यदि यूनिवर्सल सेट टॉप बॉक्स हो तो यह संभव था। ट्राई का कहना है कि वे ऐसे सेट टॉप बॉक्स चाहते हैं, जिनमें पहले से कोई सॉफ्टवेयर लोड न हो। उपभोक्ता बाजार से ब्लैंक सेट टॉप बॉक्स ले और बाद में उसमें साफ्टवेयर लोड हो। इससे आपका सेट टॉप बॉक्स इस बात से स्वतंत्र रहेगा कि ऑपरेटर कौन है। आप जैसे ही ऑपरेटर बदलेंगे, उसका सॉफ्टवेयर लोड हो जाएगा।

  4. ट्राई करीब दस वर्षों से इस कोशिश में था कि उपभोक्ताओं को ऑपरेटर्स की मनमानी से किस तरह मुक्ति दिलाई जाए। उसने कई बार इस बारे में कुछ दिशा निर्देश जारी भी किए, लेकिन वे बहुत असरकारक नहीं रहे। 2015 में भी ट्राई ने इस तरह के आदेश जारी किए थे, उसमें कहा गया था कि अगर उपभोक्ता अपने ऑपरेटर को बदलना चाहता है तो ऑपरेटर इस्तेमाल किए गए सेट टॉप बॉक्स को वापस ले। इसके अलावा वह ऐसी स्कीम भी ला सकता है, जिसमें सेट टॉप बाक्स किराए पर देने की व्यवस्था हो, लेकिन ये सभी आदेश कभी अमल में नहीं लाए जा सके। हालांकि अब ट्राई के रुख से लगता है कि उपभोक्ताओं को जल्द ही केबल व डीटीएच पोर्टेबिलिटी की सुविधा मिल सकेगी।

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      Switch Your DTH Operator Without Changing Set Top Box

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