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प्रॉपर्टी टैक्स न देना पड़े, इसलिए सर्वे टीम के सामने खुद को किराएदार बता रहे मकान मालिक




<img src="images/p2.png" प्रॉपर्टी टैक्स के नए सर्वे से शहरवासियों को बेहद फायदे होंगे। इसी वजह से सरकार ये सर्वे करवा रही है। सर्वे में कुछ दिक्कतें आ रही हैं। को-आपरेट न करने वाले लोगों को नोटिस भेजकर डाटा जुटाया जाएगा। दीपक सूरा, ईओ, नगर निगम यमुनानगर

प्रॉपर्टी सर्वे के लिए कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं एजेंसी कर्मी, डाटा लेने पर हाथापाई तक की नौबत, लोगों को डर- कहीं धोखेबाज तो नहीं, अब इन्हें नगर निगम भेजेगा नोटिस

राज्य सरकार के सामने रखा मामला, डाटा न देने व दुर्व्यवहार करने वाले लोगों की तैयार होगी सूची

भास्कर न्यूज | यमुनानगर

नहीं ये हमारा घर नहीं है। हम तो किराए पर रहते हैं। हम आपको अपने घर का डाटा क्यों दें? कहीं आप धोखे की नीयत से डाटा जुटा रहे हों। प्रॉपर्टी टैक्स के नए सर्वे में एजेंसी कर्मचारियों को ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान न करना पड़े कई लोग तो इस नीयत से अपने ही घर को किराए का बता रहे हैं। कई मकान मालिक तो जानकारी देने की बजाय कर्मचारियों को धमकाकर वापस लौटा देते हैं। ऐसे लोगों के घर का पूरा डाटा लेने के लिए अब नगर निगम पार्षदों की मदद लेने की बात कह रहे हैं। हालांकि इसके लिए कई बार सार्वजनिक सूचनाएं प्रकाशित करवाई जा चुकीं हैं।

ये जानकारी की जा रही है अपलोड :

शहर में घर-घर जाकर कर्मचारी प्रॉपर्टी मालिक का नाम क्या है। प्रॉपर्टी की कैटेगरी यानि रेजिडेंशियल या कॉमर्शियल। कितना एरिया कवर्ड है। कितने फ्लोर में बना हुआ है। बिजली, पानी व सीवरेज का कनेक्शन है या नहीं। पहले टैक्स भरा जाता रहा है या नहीं। घर पूरा रेजिडेंशियल है या फिर कोई हिस्सा कॉमर्शियल है या नहीं। मकान या कोई फ्लोर किराए पर दिया गया है या नहीं। इसी के आधार पर ही प्रॉपर्टी टैक्स का बिल तैयार किया जाएगा। आधारकार्ड समेत मकान से जुड़े दस्तावेज भी अपलोड किए जा रहे हैं।

दुकानदार ने कर्मियों के आई कार्ड को फर्जी बता की हाथापाई

रेलवे रोड पर एक दुकानदार ने सर्वे कर्मचारियों को दुकान की जानकारी देने से मना कर दिया। आई कार्ड दिखाने के बावजूद दुकानदार ने उसे फर्जी करार दे दिया। दुकानदार हाथापाई पर उतर आया। इसी तरह आजाद नगर में कई महिलाओं ने सर्वे कर्मचारियों को जानकारी देने से मना कर दिया। कहा अभी उनके पति घर पर नहीं हैं। बद में आना। घर में एंट्री तक नहीं करने दी गई। शांति कॉलोनी में भी कई मालिकों ने खुद का मकान होने के बावजूद किराए पर रहने की बात कही। रिक्वेस्ट करने के बावजूद इन लोगों ने अपनी किसी तरह की जानकारी देने से मना कर दिया।

आठ साल में दूसरी बार हो रहा है सर्वे : साल-2010 में तत्कालीन राज्य सरकार ने यमुनानगर को नगर निगम बनाया था। तब साल 2011-12 में निगम की ओर से एक प्राइवेट एजेंसी के जरिए प्रॉपर्टी का सर्वे करवाया गया था। तब सर्वे में रेजिडेंशियल व कॉमर्शियल 1.45 लाख प्रॉपटीज सामने आईं थीं। उसके आधार पर ही सभी मालिकों को टैक्स के बिल भेजे गए थे। हालांकि उस सर्वे में बेहद गंभीर खामियां थी। इनकी वजह से लोगों को बेहद दिक्कत हुई। नए सर्वे में अधिकारी सभी खामियां दूर होने की बात कह रहे हैं। निगम पहले ही सभी प्रॉपर्टीज को ऑनलाइन करने के लिए जीआईएस मैपिंग के जरिए ड्रोन से फोटो ले चुका है। नए सर्वे में 15 से 20 हजार नई प्रॉपर्टीज बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

ये सवाल बन रहे हैं चुनौती : सर्वे के दौरान कई सवाल कर्मियों के लिए चुनौती बने हुए हैं। पहले तो लोग डाटा देने के लिए कोऑपरेट नहीं कर रहे हैं। दूसरा कई बार तो मालिक होते हुए भी लोग खुद को किराएदार बता देते हैं। कर्मियों की आईडी देखने के बावजूद उन्हें घर में एंट्री नहीं मिल पाती। दरवाजे से ही लोग भगा देते हैं। कुछेक जगह तो कर्मियों से हाथापाई तक हो चुकी है। एजेंसी इन समस्याओं को सरकार के सामने उठा चुकी है। इसी वजह से ऐसे लोगों को अब निगम की ओर से कारण बताओ नोटिस भेजे जाएंगे। इसका ड्राफ्ट तैयार हो गया है।

वार्ड व कॉलोनी की बाउंड्री मिलेगी

सर्वेयर कंपनी याशी कंसलटेंट सर्विसेज के एमडी संजय गुप्ता ने बताया कि राज्य में पहली बार ऐसा काम हो रहा है। सर्वे के दौरान तैयार किए जा रहे डिजिटल मैप में शहर के हर वार्ड व कॉलोनी के साथ सेक्टर्स की बाउंड्री भी नजर आएगी। निगम एरिया की पूरी बाउंड्री उसमें होगी। मोबाइल फोन पर भी एक क्लिक करते ही अपनी प्रॉपर्टी का पूरा मैप उपलब्ध होगा।

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