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फैक्ट्री एक्ट के 1300 ग्राइंडिंग संचालकों के लिए पत्थर पाउडर परिवहन में भी टीपी जरूरी, भेजने लगे नोटिस




खान विभाग ने पत्थर से पाउडर और अन्य उत्पाद बनाने वाले ग्राइंडिंग फैक्ट्री संचालकों के लिए ट्रांजिट पास (टीपी) कटवाने का फरमान जारी कर दिया है। इससे प्रदेश के करीब 1300 फैक्ट्री संचालकों का व्यवसाय सांसत में है। कारण यह कि 13 दिसंबर 2017 को पत्थर के पाउडर और उसके अन्य उत्पादाें के परिवहन पर टीपी कटवाने का आदेश प्रभावी हुआ था और पत्थर (गिट्टी, टुकड़ी, स्लरी, अपशिष्ट) पर रॉयल्टी पहले से है। इसमें सारी जानकारी रहती है। अब नए आदेश से फैक्ट्री संचालकों का काम प्रभावित हुआ तो हमारे रोजमर्रा की 30 से ज्यादा वस्तुओं पर असर दिखेगा। आदेश को लेकर हैरत इसलिए भी जताई जा रही है, क्योंकि ये सभी संचालक फैक्ट्री एक्ट में आते हैं। इन्हें माइनिंग विभाग का ये आदेश नागवार गुजर रहा है। उदयपुर में शुक्रवार को ग्राइंडिंग फैक्ट्री संचालकों ने बैठक के बाद कलेक्टर को टीपी हटाने की मांग का ज्ञापन दिया।

जानिए टीपी क्या है : सरकार माइनिंग में निकलने वाले खनिज और मिनरल्स पर पहले ही टीपी कटवाती है। मसलन किसी माइंस का संचालक किसी व्यापारी को रॉयल्टी चालान पर लंप्स (गिट्टी) बेचता है और उक्त व्यापारी वापस तीसरे को रॉयल्टी पेड लंप्स बेच देता है तो दूसरे से तीसरे स्तर पर बेचे गए माल पर ट्रांजिट पास जारी करना होता है। ताकि रास्ते में माइनिंग विभाग जांच करे तो टीपी दिखा सके। अब ये मिनरल पाउडर पर भी थोप दी गई है।

उदयपुर. न्यू भूपालपुरा के पास एक रिसोर्ट में बैठक करते ग्राइंडिंग फैक्ट्री संचालक।

विरोध इसलिए औचित्य पर ये सवाल उठा रहे व्यापारी

1. जिस पत्थर से पाउडर बनता है, उसी का दोबारा हिसाब क्यों

कलड़वास चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष राजेंद्र सुराणा ने बताया कि सरकार अपने स्तर पर अवैध खनन रोकने में असमर्थ है। जब पहले से ही पत्थर के परिवहन पर टीपी कटती है, रॉयल्टी लगती है और ई-वे बिल कटता है तो पत्थर के पाउडर की बिक्री अवैध कैसे हो सकती है। जितना पत्थर आएगा, उतना ही तो पाउडर बनेगा। ऐसे में दोबारा उस पाउडर का हिसाब देने का निर्णय कहां तक सही है।

2. फैक्ट्री संचालकों पर फैक्ट्री एक्ट, माइनिंग के आदेश कैसे लागू

कलड़वास इंडस्ट्रीज के गोपाल अग्रवाल बताते हैं कि पाउडर उद्योग फैक्ट्री एक्ट में आता है। ऐसे में खान विभाग टीपी कटवाने का आदेश कैसे जारी कर सकता है। ई-वे बिल के कारण वे अवैध माल तो खरीद या बेच सकते ही नहीं। दूसरी वजह ये भी है कि ज्यादातर खरीदार पार्टियों को उदाहरण के तौर पर डोलोमाइट पाउडर, मार्बल स्लरी, मार्बल क्रेजी के 80 प्रतिशत और सोप स्टोन पाउडर का 20 प्रतिशत मिक्स करके बेचा जाता है। उनकी बिलिंग सोपस्टोन पाउडर या किसी दूसरे नाम से होती है। टीपी में अलग-अलग सामग्री का उल्लेख करना नामुमकिन है।

व्यापारी बोले- अवैध खनन रोकना है तो बिना रॉयल्टी क्यों निकलने देते हैं

जयपुर के फैक्ट्री संचालक पदम चंद जैन बताते हैं कि जहां से कच्चे माल (पत्थर खनन) पर रॉयल्टी मिलती है, वहीं टीपी स्वीकार्य है। फिर इसे तैयार माल पर लगाने का कोई लाभ नहीं है। बीकानेर के विजय जोशी बताते हैं कि विभाग अवैध खनन नहीं रोक पाने की नाकामी उद्योगपतियों पर थोप रहा है। अगर अवैध खनन रोकना है तो बिना रॉयल्टी माल निकलने ही क्यों देते हैं। अजीतगढ़ के दिलीप सिंह माखीजा बताते हैं कि विभाग ऐसे फरमान जारी कर जबरन उद्योगपतियों को घसीट रहा है।

30 तरह के प्रोडक्ट में काम आता है पाउडर, डेढ़ लाख लोगों को रोजगार

पत्थरों का ये पाउडर, कांच, लकड़ी, साबुन, तेल, टाइल्स, इलेक्ट्रिक सामान, रसोई सामान सहित 30 तरह के रोजमर्रा की चीजों को बनाने में काम आता है। अगर पाउडर सप्लाई रुकती है तो फिर इन आम वस्तुओं के मांग और सप्लाई पर सीधा असर पड़ने से महंगाई बढ़ेगी। प्रदेश की इन 1300 फैक्ट्रियों में डेढ़ लाख लोगों को रोजगार मिला है। अब माइंस के इस आदेश के कारण फैक्ट्री संचालक परेशानी में हैं और कच्चा माल खरीदने से भी डर रहे हैं। इस कारण इन फैक्ट्रियों में काम प्रभावित होने लगा है।

परीक्षण के बाद ही कुछ कह सकेंगे

अभी हम मामले को एक्जामिन कर रहे हैं। उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

जितेंद्र उपाध्याय, निदेशक, खान एवं भूविज्ञान विभाग, उदयपुर

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