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फॉक्सवैगन और बीएमडब्ल्यू जैसी बड़ी जर्मन कार कंपनियों ने बेहतर टेक्नोलॉजी को बाजार में आने से रोका



ऑटो डेस्क. यूरोपियन यूनियन ने जर्मनी की शीर्ष कार कंपनियों पर आरोप लगाया है कि इन्होंने आपस में रणनीति बनाकर प्रदूषण से जुड़ी बेहतर टेक्नोलॉजी को मार्केट में आने से रोका। यह टेक्नोलॉजी सामने आ जाती तो पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचता। जिन कंपनियों पर आरोप लगाए गए हैं उनमें फॉक्सवैगन ग्रुप, बीएमडब्ल्यू और डेमलर शामिल हैं। फॉक्सवैगन ग्रुप में ऑडी और पोर्शे भी शामिल हैं। इन्हें ‘सर्किल ऑफ फाइव’ कहा गया है। यूरोपियन यूनियन के मुताबिक इन कंपनियों ने 2006 से लेकर 2014 तक दो एमीशन क्लीनिंग सिस्टम को बाजार में नहीं आने दिया।

  1. यूरोपियन यूनियन की शीर्ष प्रतिस्पर्धा अधिकारी मारग्रेट वेस्टागर ने कहा, ‘कंपनियां प्रोडक्ट में सुधार के लिए साझेदारी कर सकती हैं। लेकिन ये अच्छी क्वालिटी को बढ़ावा नहीं देने के लिए समझौता नहीं कर सकती हैं। इससे यूरोपियन यूनियन के एंटी ट्रस्ट कानून का उल्लंघन होता है। हमें चिंता है कि इस मामले में ऐसा ही हुआ है। इस कारण यूरोपियन उपभोक्ता सर्वश्रेष्ठ टेक्नोलॉजी वाली गाड़ियां खरीदने से वंचित रह गए।’

  2. यूरोपियन यूनियन ने आरोप लगाया कि पांचों कपंनियों ने आपस में गुट बनाकर नई टेक्नोलॉजी पेश नहीं करने का फैसला किया। जिन टेक्नोलॉजी को सामने आने से रोका गया उनमें से एक डीजल कारों में हानिकारक नाइट्रोजन ऑक्साइड के एमिशन को कम करती। दूसरी टेक्नोलॉजी पेट्रोल कारों से होने वाले एमिशन को कम करती।

  3. यूरोपियन यूनियन ने कहा कि इन दो टेक्नोलॉजी को रोके जाने से उपभोक्ताओं को ऐसी कार खरीदने का मौका नहीं मिल पाया जो पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाती।

  4. यूनियन ने कहा कि इन कार निर्माताओं को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। अगर आरोप साबित हो गए तो इन कंपनियों पर दुनियाभर में होने वाली सेल्स से आने वाली रकम का 10% तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

  5. कार जर्मनी की फ्लैगशिप मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री है। यह अब तक 2015 के फॉक्सवैगन प्रकरण से नहीं उबर सकी है। तब फॉक्सवैगन ने स्वीकार किया था कि उसने एमिशन टेस्ट पास करने के लिए लाखों डीजल इंजन कारों में चीट सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया था। उस सॉफ्टवेयर की मदद से फॉक्सवैगन की कारें एमीशन की मात्रा कम बताती थीं। इसके बाद फॉक्सवैगन ने दुनियाभर से कारें रिकॉल की थी। इस मामले में कंपनी को करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ था।

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      Top German carmakers charged with blocking clean emissions technology

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