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बिना ओटीपी क्रेडिट-डेबिट कार्ड से विदेशों में खरीदी, आधी रात को आता एसएमएस



इंदौर .अगर आप भी पेमेंट के लिए अपना क्रेडिट या डेबिट कार्ड वेटर या किसी अनजान को सौंप देते हैं तो सावधान हो जाइए। कार्ड का नंबर और सीवीवी इंटरनेट पर बेचा जा सकता है, जिससे कोई भी व्यक्ति किसी विदेशी वेबसाइट से खरीदी कर लेता है। 72 घंटे में शिकायत करने पर बैंक ग्राहक का पैसा तो रिफंड कर देते हंै, लेकिन अपराधी पुलिस के हाथ नहीं लगता। इससे बिना ओटीपी फ्रॉड नंबर लिए धोखाधड़ी करने के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

ऐसा ही मामला जयकिशन गुप्ता का है। उन्हें आधी रात को एसएमएस मिला कि उनके कार्ड से 72 हजार रुपए की खरीदी हो गई। 60 हजार के कपड़े एक विदेशी वेबसाइट से खरीदे गए और 12 हजार रुपए में दुबई की ट्रैवल कंपनी से टिकट बुकिंग की गई। गुप्ता ने कार्ड ब्लॉक करवाया और साइबर पुलिस को शिकायत की। पुलिस ने कपड़े बेचने वाली ऑनलाइन वेबसाइट और दुबई की ट्रैवल एजेंसी से ट्रांजैक्शन की जानकारी मांगी। वेबसाइट ने कोई जवाब नहीं दिया। दुबई की ट्रैवल एजेंसी ने ट्रांजैक्शन की जानकारी दे दी तो आरोपी पकड़ा गया। यह उन एक-दो मामलों में शामिल है, जिसमें आरोपी हाथ लगा, बाकी जनवरी से अब तक 50 से ज्यादा शिकायतें स्टेट साइबर सेल के पास आ चुकी हैं। इनमें कई में जांच इसलिए आगे नहीं बढ़ पा रही कि विदेशी वेबसाइट पुलिस को जानकारी नहीं देती।

कार्ड ब्लॉक कराना जरूरी, वेबसाइट को सिर्फ डिटेल से मतलब :फेसबीके, गूगल ऑक्ट्रा, एपिक गेम्स, स्ट्रीम गेम्स, आईट्यून्स सहित कई विदेशी वेबसाइट इंटरनेशनल शॉपिंग के लिए क्रेडिट या डेबिट कार्ड के नंबर और सीवीवी से ही ट्रांजैक्शन पूरा कर देती हैं। इसके लिए कार्डधारक के पास ओटीपी भी नहीं जाता। उसे ट्रांजैक्शन पूरा होने के बाद ही एसएमएस आता है। इसके बाद सिर्फ यही विकल्प बचता है कि कार्ड को ब्लॉक करवाया जाए। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बैंकों को निर्देश हैं कि 72 घंटे के अंदर ऐसे ठगी के मामलों में ग्राहक का पैसा वापस किया जाए। इस पर बैंक ग्राहक का पूरा पैसा लौटा देती है, लेकिन अपराधियों का कुछ नहीं हो पाता। पैसा रिफंड मिलने पर फरियादी भी पुलिस पर कार्रवाई के लिए दबाव नहीं बनाता।

विदेश भेजे जा रहे करोड़ों रु. :हाल ही में आई शिकायतों के बाद बैंकों ने जो पैसा ग्राहकों को लौटाया, वह करोड़ों में है। बैंक अफसरों का कहना है कि यह पैसा कार्ड के इंश्योरेंस क्लेम से दिया जाता है, पर मसला है कि उसकी प्रीमियम भी ग्राहकों से चार्ज लगाकर ही वसूली जाती है। जनता का पैसा ही ठगी के मामलों में लौटाया जा रहा है।

जब जरूरत हो, तभी कार्ड को अनलॉक करें :अफसरों के मुताबिक, बैंकों ने कार्ड के ट्रांजैक्शन को ब्लॉक-अनब्लॉक करने के लिए एप बनाए हैं और एसएमएस की भी सुविधा है। इसके जरिए ग्राहक अपने कार्ड को हमेशा एटीएम ट्रांजैक्शन, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन के लिए ब्लॉक रख सकता है। जब उसे जरूरत हो तो वह कार्ड को अनब्लॉक करें और ट्रांजैक्शन के बाद कार्ड ब्लॉक कर दे। इससे कोई उसका गलत इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। इसके अलावा एप से कार्ड का टेम्परेरी पासवर्ड भी जारी होता है, जिससे बिना एटीएम कार्ड के भी पैसे निकाल सकते हैं।

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Purchased abroad without OTP credit-debit card

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