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बैंक ने पुलिस को भी नहीं दी मांगी गई जानकारी




एक्सिस बैंक की सढौरा ब्रांच में खोटे सोने पर करीब तीस लोगों को दो करोड़ का लोन जारी करने के मामले में पुलिस की जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। बैंक की शिकायत पर अधिकृत ज्वैलर्स समेत कुल 31 लोगों पर पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया है पर इन ग्राहकों के नाम, पते, फोन नंबर समेत अन्य डिटेल जो पुलिस ने बैंक से मांगी है वह अभी तक उपलब्ध नहीं करवाई गई। एसएचओ सढौरा का कहना है कि बैंक अधिकारी गुरुवार को डिटेल देने की बात कह रहे हैं।

इसके बाद जांच रफ्तार पकड़ेगी। पुलिस की जांच भले ही सुस्त हो पर इस मामले में चूक कहां, किससे हुई यह जानने के लिए भास्कर ने बैंकिंग के एक्सपर्ट से बात की। उनका कहना है कि पूरे मामले में सबसे अधिक जिम्मेदारी बैंक मैनेजर, सेकेंड मेन व जोहरी की है। यह बच नहीं सकते। यदि इन्होंने नियमों का पालन किया होता, जरूरी सतर्कता बरती होती तो गड़बड़ी नहीं हो सकती। वहीं एक्सिस बैंक के अधिकारी पूरे मामले पर कुछ भी बोलने का तैयार नहीं हैं। लीड बैंक मैनेजर सुनील चावला ने बताया कि किसी भी बैंक की ब्रांच में गोल्ड लोन देने में सबसे अहम भूमिका ब्रांच मैनेजर, उसके सेकेंड मेन व जोहरी की होती है। बैंक अधिकारी किसी दलाल या ग्राहक का नाम लेकर इस मामले में जिम्मेवारी से बच नहीं सकते। उन्होंने बताया कि किसी भी तरह का लोन देने से पहले बैंक द्वारा बहुत सतर्कता बरती जाती है।

गोल्ड लोन में पैसा डूबने का चांस न के बराबर होता, क्यों कि बैंक पहले से मार्जिन मनी लेकर चलते हैं। इसीलिए इस तरह के लोन में किस्तों के लिए ग्राहक पर कभी दबाव नहीं बनाया जाता। चावला ने बताया कि यदि कोई ग्राहक बार-बार गोल्ड लोन ले रहा है (जैसा कि सढौरा में हुआ) तो बैंक मैनेजर की यह जिम्मेवारी है कि संदेह होने पर वह संबं‌धित ग्राहक की दूसरे तरह से भी वेरीफिकेशन करे। वह देखे कि ग्राहक आखिर गोल्ड लेकर कहां से आ रहा है। उन्होंने कहा कि जोहरी (ज्वैलर) की नियुक्त रीजन आफिस करता है। इसके लिए यह जरूरी नहीं कि ज्वैलर्स हॉल मार्क्स धारक हो। यह भी जरूरी नहीं कि वह सोना दुकान पर ले जाकर चैक करे, ब्रांच में भी जांच कर सकता है।

एक बैंक के लिए यह प्रक्रिया पूरी करनी जरूरी, इसलिए मैनेजर नहीं बच सकता

जब कोई ग्राहक बैंक में गोल्ड लोन लेने आता है तो वह संबंधित क्लर्क या शाखा प्रबंधक के पास जाता है। बैंक मैनेजर उससे कुछ सवाल जैसे परिवार में कौन-कौन है, क्या काम करते हो, उसे लोन क्यों चाहिए, कितना चाहिए? वह कब तक लौटा देगा आदि फार्मेलिटी के लिए पूछता है ताकि ग्राहक की जरूरत के बारे में बेसिक जानकारी मिल मिल सके। इसके बाद बैंक अधिकृत ज्वैलर्स से इसे सर्टिफाइड कराएगा। जिसमें ज्वैलर्स गोल्ड का वजन व वैल्यू लिखकर बताएगा। ज्वैलरी के पैकेट को सील किया जाएगा। सील पैकेट पर ब्रांच मैनेजर व सेकेंड मैन हस्ताक्षर करेंगे। ज्वैलर्स व ग्राहक को सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इसके बाद बैंक मार्जिन मनी काटकर (हर बैंक का अलग नियम) ग्राहक को भुगतान कर देगा। यह सामान्य नियम सभी बैंकों के लिए हैं।

ब्रांच मैनेजर हरविंदर बोले- प्रोसेस नहीं बता सकता, आप गोल्ड ले लाएं हम लोन पास करा देंगे

वहीं इस पूरे मामले में एक्सिस बैंक के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। वे नियमों का हवाला दे रहे हैं। जिले की मुख्य ब्रांच के प्रबंधक हरविन्दर से मिलकर बैंक के गोल्ड लोन देने व सढौरा ब्रांच में क्या चूक हुई इस बारे में जानकारी करने की कोशिश की गई। इस पर हरविन्दर ने कहा कि वे यह बताने में के लिए अधिकृत नहीं हैं। यह सब मुम्बई से ही पता चल सकता है। जब गोल्ड लोन देने के बारे में प्रोसेस पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे यह डिस्क्लोज नहीं कर सकते। यह बैंक की पॉलिसी का मैटर है। हां, आप गोल्ड ले लाइए। हम आपका लोन करा देते दें। इससे आपको प्रोसेस पता चल जाएगा।

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