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बॉडी को प्यूरीफाय करके संक्रमण, मौसमी बीमारी और उम्र का प्रभाव घटाता है उपवास



हेल्थ डेस्क. व्रत या उपवास का सीधा सम्बंध इंसान के शारीरिक और मानसिक शुद्धिकरण से होता है। आयुर्वेद के अनुसार उपवास शरीर को शुद्ध करने के साथ मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। आयुर्वेद विशेषज्ञ के मुताबिक अक्टूबर का समय ऋतु परिवर्तन का है। इसे संधिकाल भी कहते हैं यानी एक ऋतु खत्म हो रही है और दूसरी की शुरुआत हो रही है। इस दौरान किए जाने वाले उपवास का खास महत्व होता है। यह शरीर में इम्यूनिटी बढ़ाकर संक्रमण और मौसमी रोगों का खतरा घटाता है। आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. रेखा शर्मा से जानते हैं व्रत या उपवास का शरीर पर क्या असर होता है…

    • शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सप्ताह में एक व्रत रखना बेहतर है। इस दौरान हैवी भोजन कम और पानी की मात्रा अधिक लेने पर शरीर की अंदरूनी सफाई हो जाती है। जिसे मेडिकल भाषा डिटॉक्सीफिकेशन कहते हैं।
    • फ्री-रेडिकल और टॉक्सिंस शरीर से बाहर निकलने पर बॉडी की रोगों से लड़ने की क्षमता यानी इम्युनिटी बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए भी संभव हो जाता है क्योंकि हल्का भोजन या फल लेने पर शरीर में पोषक तत्वों की पूर्ति होती है और पाचनतंत्र पर दबाव कम होता है। इससे कब्ज, गैस, एसिडिटी, सिरदर्द, बुखार, मोटापा जैसी दिक्कतें दूर होती हैं।

    व्रत का असर सीधे तौर पर चेहरे पर भी पड़ता है और एजिंग कम दिखाई देती है। बशर्ते उपवास के दौरान लिक्विड चीजों का इस्तेमाल जरूर किया जाए।

    डॉ. रेखा शर्मा, आयुर्वेद विशेषज्ञ, जयपुर
    • चैत्र और अश्विन मास में होने वाले नवरात्र का शारीरिक लिहाज से भी काफी महत्व है। ये नवरात्र मौसम में बदलाव के दौरान मनाए जाते हैं। इस समय शरीर की इम्युनिटी कम होती है।
    • करीब 7 से 9 दिनों तक व्रत के दौरान फल और लिक्विड अधिक लेने की सलाह दी जाती है ताकि पाचन तंत्र पर अधिक दबाव न पड़े। साथ ही जरूरी पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को मिल सकें।
    • इस दौरान एक टाइम भोजन करने से फायबर की पूर्ति होती है जो डिटॉक्सीफिकेशन में मदद करता है। बॉडी के रिलैक्स होने पर इसका सीधा फर्क दिमाग पर होता है जो पहले से काफी शांत महसूस करता है।
    • डायटीशियन सुरभि पारीक के अनुसार व्रत के दौरान ब्लड शुगर और मेटाबॉलिज्म का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे खास बात है पानी की कमी न होने दें। इसके लिए पानी, नारियल पानी, ग्रीन टी ले सकते हैं।
    • अगर 9 दिनों का व्रत रख रहे हैं तो एक समय हल्का भोजन जरूर करें। भोजन में कूट्टू के आटे से बने व्यंजन, आलू, टमाटर, शिमला मिर्च, लौकी, पालक, साबूदाना, दही या लस्सी काे शामिल करें।
    • कुट्टू के आटे की पूड़ी या पकौड़े खाने से बेहतर है इसकी रोटी बनाएं। फ्राइड आलू लेने की जगह उबले आलू खाएं। इसके अलावा खीर बना रही हैं तो इसमें फ्रूट डालें।

    आमतौर पर लोग व्रत के दौरान अधिक तली हुई चीजें खाते हैं, इनसे बचना चाहिए। डाइट में ऐसी चीजें ले जो ऑयली फ्री हों। खासतौर पर मौसमी फल और ड्राय फ्रूट बेहतर विकल्प हैं।

    सुरभि पारीक, डायटीशियन
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