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बढ़ रहा विदेशी वेबसाइट से सामान मंगाने का ट्रेंड, कम कीमत में हो जाती है खरीदारी



मुंबई. विदेशी वेबसाइट से सीधे सामान मंगाने का ट्रेंड देश में बढ़ रहा है। ऐसी वेबसाइट्स/एप्स भारतीय ई-कॉर्मस साइट्स को कड़ी टक्कर देने लगेहैं। चीन की अलीबाबा पसंदीदा ई-कॉमर्स पोर्टल बनी हुई है।अब उन वेबसाइट्स से भी सामान सीधा भारत में डिलीवर हो रहा है, जिन्हें यूके और जापान जैसे देशों से चलाया जा रहा है।

    1. विदेशी साइट्स से सामान मंगाने के पीछे एक कारण कम कीमतें भी हैं। भारतीय सेलर चीन से उत्पाद मंगाने पर उसमें अपनी मार्जिन, लॉजिस्टिक की लागत और टैक्स आदि जोड़ते हैं, जिससे कीमत बढ़ जाती है। चाइनीज सप्लायर प्रोडक्ट को सीधे ग्राहक तक भेजते हैं, जिससे कस्टम ड्यूटी और शिपिंग चार्ज चुकाने के बाद भी कीमत ज्यादा नहीं बढ़ती है। 5 हजार से कम कीमत के सामान गिफ्ट की श्रेणी में आ जाते हैं, जिससेकस्टम ड्यूटी भी नहीं लगती है।

    2. उम्मीद है कि देश का बिजनेस-टु-बिजनेस ई-कॉमर्स मार्केट 2020 तक 49 लाख करोड़ का हो जाएगा। यानी 2014 की तुलना में यह 133 फीसदी बड़ा हो जाएगा। देश में कुल ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले लोगों में करीब 80 फीसदी ग्राहक फ्लिपकार्ट और अमेजन के हैं। बाकी 20 फीसदी लोग डॉमेस्टिक और विदेशी वेबसाइट्स से शॉपिंग कर रहे हैं।

    3. अन्य पसंदीदावेबसाइट्स में होबोनिची (जापान) और ड्रेसलीमी डॉट कॉम और जेडी डॉट कॉम जैसी अन्य चाइनीज साइट्स शामिल हैं। केवल अलीबाबा के ही देश में 45 लाख यूजर्स हैं। चार साल पहले इनकी संख्या केवल 5 लाख थी। चीनी ई-टेलर क्लब फैक्ट्री के 57% ग्राहक भारत से हैं।

    4. दुनिया के सबसे बड़े ई-रिटेलर अलीबाबा समूह की बिजनेस-टु-बिजनेस शाखा अलीबाबा डॉट कॉम की शुरुआत 1999 में हुई थी। भारत दुनिया में इसका दूसरा सबसे बड़ा मार्केट है। कंपनी के प्रमुख टिमोथी ल्यूंग ने मीडिया से कहा था कि चीन के बाद भारत ही अलीबाबा डॉट कॉम के लिए सबसे जरूरी बाजार है। अलीबाबा अब आईसीआईसीआई, कोटक महिंद्रा बैंक, क्रिसिल रेटिंग और टैली जैसी कई संस्थाओं के साथ काम रही है।

    5. कई विदेशी सामान भारतीय सेलर्स की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध है। उत्पादों के ज्यादा विकल्प बाजार में मौजूद हैं। ऐसे ब्रांड्स मंगाने का विकल्प जो भारत में उपलब्ध नहीं हैं। अलीबाबा जैसी साइट्स सीधे मैन्युफैक्चरर या सप्लायर से सामान मंगाने का विकल्प भी देती हैं।

    6. हालांकि, इनसे सामान मंगवाने के नुकसान भी हैं।डिलीवरी में 15 दिन से 3 महीने तक का वक्त लग सकता है। कैश ऑन डिलिवरी का विकल्प नहीं है। कार्ड से ही पेमेंट करना पड़ता है। सामान रिटर्न करने की सुविधा नहीं मिलती है। शिकायत करने पर जरूरी नहीं कि पूरा पैसा रिफंड हो।

    7. इस तरह के पोर्टल से शॉपिंग करते समय चार सावधानियां बरतें।

      ज्यादा लिमिट वाले क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल न करें। एक ही बार में ढेर सारी मात्रा में सामान न खरीदें। नई वेबसाइट या एप से सामान मंगाने से पहले उनके इंटरनेट पर रिव्यू जरूर देखें। अलीबाबा जैसी वेबसाइट्स में सीधे सप्लायर या मैन्युफैक्चरिंग कंपनी से ही सामान लें।

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