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भाजपा के लिए 6 सीटाें पर संघर्ष सबसे ज्यादा, फूंक-फूंक कर रख रही कदम



जयपुर.लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन छह सीटों पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया है जहां उसने प्रत्याशियाें के रूप में नए चेहरे उतारे हैं या मुकाबले में उतरे कांग्रेस के चेहरे ज्यादा दमदार नजर आ रहे हैं। इसके अलावा इन सीटाें पर उसे जातीय ध्रुवीकरण व प्रत्याशियों के खिलाफ भितरघात का खतरा भी सता रहा है। इसमें जोधपुर,बाड़मेर, बीकानेर, अलवर, टोंक- सवाई माधोपुर व सीकर सीट शामिल हैं।

जातीय ध्रुवीकरण से निपटने के लिए भाजपा जातियों में प्रभाव रखने वाले नेताओं से गठजोड़ कर रही है। नागौर पर भाजपा ने आरएलपी से गठबंधन कर युवा जाटों में चर्चित चेहरे हनुमान बेनीवाल के लिए सीट छोड़ दी। इसके बाद गुर्जर संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला को पार्टी में शामिल कर लिया। कांग्रेस के लिए मजबूत मानी जा रही सीटाें पर उसने अाक्रामक प्रचार की रणनीति भी तय की है। इन सीटों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर कई केन्द्रीय नेताओं की सभाओं की तैयारी भी हो रही है।

  • बाड़मेर: यहां भाजपा ने कैलाश चौधरी और कांग्रेस ने मानवेंद्रसिंह को टिकट दिया है। इन टिकटों के ऐलान के साथ ही यह सीट जबरदस्त जातीय ध्रुवीकरण में फंस गई है। जाट और राजपूत इस सीट पर दो बड़े वोटर हैं। इनके अलावा एससी और मुसलमान भी यहां बड़ी संख्या में है। इसके अलावा मानवेंद्र बाड़मेर सीट पर पहले सांसद रह चुके हैं। कैलाश चाैधरी के मुकाबले उनका सियासी कद भी बड़ा है
  • जोधपुर: जोधपुर में कांग्रेस से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत प्रत्याशी हैं वहीं भाजपा से मौजूदा सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत हैं। गहलाेत खुद जाेधपुर सीट से पांच बार सांसद रह चुके हैं। वे यहां की सरदारपुरा सीट से विधायक भी हैं। यहां जाट, राजपूत, माली, मुसलमान व विश्नोई वोट बैंक हैं। भाजपा यहां हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है।
  • सीकर: कांग्रेस ने यहां सुभाष महरिया काे उतारा है वहीं भाजपा ने माैजूदा सांसद सुमेधानंद काे ही रिपीट किया है। सुभाष महरिया पिछले लाेकसभा चुनावाें में निर्दलीय लड़कर भी 1.80 लाख वाेट अपने दम पर ले अाए थे। इसलिए भाजपा ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे काे यहां रणनीति तैयार करने का जिम्मा दिया है।
  • अलवर: भाजपा के बाबा बालकनाथ यादव समाज से आते हैं जो अलवर का सबसे बड़ा वोट बैंक है। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी भंवर जितेंद्र यहां के पूर्व राजघराने से हैं और इनकी छवि को लेकर भी कोई विवाद नहीं है। लेकिन जब भी राजघराने और यादवों के बीच चुनाव होता है तो यह सीट जातीय गोलबंदी में फंस जाती है।
  • बीकानेर: भाजपा के अर्जुन राम मेघवाल का मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी रिटायर्ड आईपीएस मदनगोपाल मेघवाल से है। अर्जुनराम मेघवाल के खिलाफ कद्दावर नेता देवी सिंह भाटी भाजपा से इस्तीफा दे चुके हैं। वे तो खुलकर अर्जुनराम के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। वहीं बीकानेर भाजपा में भाटी के कई समर्थक भी हैं जो मेघवाल के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं।
  • धाैलपुर-कराैली: यहां कांग्रेस ने संजय कुमार जाटव काे प्रत्याशी घाेषित किया है वहीं भाजपा ने माैजूदा सांसद मनोज राजोरिया काे रिपीट किया है। एससी वाेटराें में सबसे ज्यादा संख्या जाटवाें की है। जाटवाें काे बसपा के नजदीक माना जाता है लेकिन विधानसभा चुनाव में ये वाेट कांग्रेस में शिफ्ट हाे गया। इसलिए यह सीट भाजपा के लिए बड़ी चिंता की वजह है।
  • टाेंक-सवाई माधाेपुर: यहां कांग्रेस ने नमाेनारायण मीणा काे और भाजपा ने माैजूदा सांसद सुखबीर सिंह जाैनपुरिया काे रिपीट किया है। 2009 में भी गुर्जर व मीणा अामने-सामने हाे चुके हैं। उस वक्त यहां गुर्जर नेता किराेड़ी सिंह बैंसला अाैर नमाेनारायण मीणा के बीच बेहद नजदीकी मुकाबला हुअा था। दाेनाें जातियाें के वाेट गाेलबंद हुए थे। नमाेनारायण मीणा करीब 300 वाेटाें से जीते।

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bjp on 6 Lok Sabha seats of Rajasthan

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