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भारतवंशी रिसर्चर का दावा- हेल्थ बैंड और स्मार्ट वाॅच प्राइवेसी के लिए खतरा



गैजेट डेस्क. भारतीय मूल के एक रिसर्चर ने दावा किया है कि जिन डिवाइसेस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया जाता है, उससे यूजर्स का हेल्थ डेटा चोरी होने की आशंका होती है। मौजूदा कानून और नियम के जरिए यूजर्स का हेल्थ डेटा सुरक्षित नहीं रखा जा सकता।

  1. यह रिसर्च अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के बर्कली इंजीनियरिंग कॉलेज के रिसर्चर अनिल अश्वनी ने की है। रिसर्च में पता चला है कि स्मार्टफोन, स्मार्ट वॉच और एक्टिविटी ट्रैकर यूजर्स के हेल्थ डेटा को इकट्ठा करते हैं और एआई की मदद से इस डेटा से यूजर्स का डेली पैटर्न आसानी से समझा जा सकता है।

  2. अश्वनी ने बताया, ‘”फेसबुक स्मार्टफोन पर एक्टिव ऐप्स की मदद से यूजर्स का डेटा इकट्ठा कर सकता है और फिर किसी दूसरी कंपनी से यूजर्स का हेल्थ डेटा लेकर उसका मिलान कर सकता है। इस तरह से उनके पास यूजर्स का हेल्थ केयर डेटा आ जाएगा और फिर कंपनी इसका इस्तेमाल या तो विज्ञापन दिखाने के लिए कर सकती है या फिर इस डेटा को दूसरी कंपनियों को बेच सकती है।’’

  3. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि समस्या डिवाइस के साथ नहीं, बल्कि डेटा के दुरुपयोग की है। उन्होंने कहा कि ये डिवाइस जिस डेटा को इकट्ठा करती हैं, उनका दुरुपयोग किया जा सकता है और उसे बेचा भी जा सकता है।

  4. अश्वनी ने कहा, ‘”मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हमें इन डिवाइस का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, लेकिन हमें सावधान रहने की जरूरत है कि हम इस डेटा का कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं? हमें यूजर्स के डेटा को सुरक्षित रखने की जरूरत है।’’

  5. अश्वनी ने कहा कि मौजूदा नियम और कानून लोगों के डेटा को सुरक्षित रखने में नाकाम हैं। सरकार लोगों के हेल्थ डेटा को निजी डेटा तो मानती है, लेकिन वो इस डेटा को उतना सुरक्षित नहीं रखती, जितना लोग उम्मीद करते हैं। ज्यादातर टेक कंपनियां इन नियमों के तहत नहीं आतीं।

  6. उन्होंने कहा कि आजकल कई कंपनियां हैं जो लोगों के हेल्थ डेटा को खरीदती हैं और उनका काम लोगों के निजी डेटा से हेल्थ डेटा का मिलान करना होता है और फिर इस डेटा को दूसरी कंपनियों को बेच दिया जाता है।

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      artificial intelligence threaten privacy of health data

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