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भारत में शुरू हुई आईफोन 7 की मैन्युफैक्चरिंग लेकिन कीमत में नहीं होगी कोई कटौती



गैजेट डेस्क. अमेरिका की दिग्गज कंपनी एपल ने मेड इन इंडिया पोर्टफोलियो को बढ़ाने के लिए अपने महंगे स्मार्टफोन आईफोन 7 की मैन्युफैक्चरिंग भारत में शुरु कर दी है। अभी तक एपल के सस्ते मॉडल आईफोन 6S और SE को ही बेंगलुरु स्थित प्लांट में असेंबल किया जाता था। एपल ने टाइवान बेस्ड मैन्युफैक्चरर विस्ट्रॉन से हाथ मिलाया है जिसे भारत में आईफोन को असेंबल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कंपनी ने इसके साथ भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का संकेत दिया है साथ ही कंपनी ने कहा कि हमें अपने स्थानीय ग्राहकों के लिए भारत में आईफोन 7 बनाने पर गर्व है। हम भारत में लंबे समय तक बने रहने के लिए प्रतिबध्द है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में आईफोन 7 बनाने के बावजूद कंपनी इसकी कीमत में कटौती नहीं करेगी। कंपनी इस मार्जिन का इस्तेमाल प्रोडक्ट की सेल्स और मार्केटिंग के लिए करेगी। कंपनी को आईफोन 7 बनाने की कॉस्ट बेहद कम पड़ेगी क्योंकि सरकार ने मेक इन इंडिया स्कीम के तहत ड्यूटी में छूट दी है।

विस्ट्रॉन को हाल में मैन्युफैक्चरिंग के बढ़ाने के लिए भारत सरकार से 5,000 करोड़ रुपए के इनवेस्टमेंट प्रपोजल की मंजूरी मिली है। कंपनी इस निवेश का इस्तेमाल एप्पल के हाई एंड डिवाइसों को भारत में बनाने पर करना चाहती है।

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    • एपल ने इस साल जो तीन नए फोन लॉन्च किए थे, वो काफी महंगे थे। भारत में इन मॉडल्स को ज्यादा पसंद नहीं किया गया क्योंकि इनकी कीमत 76 हजार से लेकर 1.50 लाख रुपए तक है।
    • भारत में अभी तक एपल के सस्ते मॉडल आईफोन- 6S और SE जैसे मॉडल ही तैयार होते हैं, जिन्हें बेंगलुरु में असेंबल किया जाता है। लेकिन कंपनी का फोकस अब महंगे मॉडल की बिक्री है, इसलिए फॉक्सकॉन की कंपनी में इन्हें बनाया जाएगा ताकि इनकी कीमत को कम किया जा सके।
    • कई रिपोर्ट्स में ये बात सामने आ चुकी है कि भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता स्मार्टफोन मार्केट है, इसलिए एपल भी कम कीमत के जरिए भारत के स्मार्टफोन मार्केट में अपना शेयर बढ़ाना चाहती है।
    • भारत में आईफोन की कीमतें ज्यादा होने का सबसे कारण यहां अपनाई जाने वाली टैक्स और टैरिफ पॉलिसी है। इसके अलावा इसका दूसरा बड़ा कारण ये भी है कि यहां पर एपल की कोई मैनुफैक्चरिंग यूनिट नहीं है।
    • वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक बार अपनी रिपोर्ट में कहा था कि आईफोन को ग्राहकों तक पहुंचने से पहले 5 बिचौलियों से होकर गुजरना पड़ता है। इन बिचौलियों का प्रॉफिट शेयर भी कीमत में जोड़ा जाता है, साथ ही एपल भी अपना प्रॉफिट इसमें जोड़ती है, इसलिए ग्राहकों तक आते-आते आईफोन की कीमतें बढ़ जाती हैं।
    • कई देशों में आईफोन की कीमतें भारत के मुकाबले काफी कम हैं, क्योंकि वहां पर कंपनी का मैनुफैक्चरिंग प्लांट हैं। इसके अलावा, इन देशों की टैक्स पॉलिसी भी एपल को अपने प्रोडक्ट यहां सस्ता रखने का मौका देती हैं।
    • 2017 में एपल ने तीन आईफोन लॉन्च किए थे। उस साल एपल ने 32 लाख आईफोन की भारत भेजे थे। मीडिया रिपोर्ट्स में काउंटरप्वॉइंट के रिसर्च डायरेक्टर नील शाह के हवाले से बताया कि एपल ने अक्टूबर से दिसंबर 2018 तक 3 महीने में करीब 4 लाख आईफोन भारत भेजे। इस दौरान वनप्लस ने करीब 5 लाख यूनिट सप्लाई किए।
    • दिसंबर में टेक्नोलॉजी रिसर्च फर्म टेकआर्क ने अपनी रिपोर्ट में 2019 में 30.20 करोड़ मोबाइल फोन भारत में बिकने का अनुमान लगाया है। टेकआर्क के मुताबिक, इनमें सबसे ज्यादा 14.9 करोड़ स्मार्टफोन, 9.8 करोड़ फीचर फोन और 5.5 करोड़ स्मार्ट फीचर फोन बिकेंगे।
    • इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया था कि 2019 में भारत में सबसे ज्यादा मोबाइल फोन चीनी कंपनियां बेचेंगी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल श्याओमी, वनप्लस, गूगल, नोकिया, आसुस और रियलमी के फोन ज्यादा बिकेंगे जबकि एपल के आईफोन की बिक्री में गिरावट आने का अनुमान है।
    • रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में श्याओमी का भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में दबदबा रहेगा जबकि प्रीमियम सेगमेंट में वनप्लस के ही आगे रहने की उम्मीद है। हालांकि, गूगल अपने फोन की कीमतें कम कर एंड्रॉयड स्मार्टफोन मार्केट में सैमसंग को टक्कर दे सकता है।
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