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'मंगल' के दम पर मिशन में कामयाब होगी फिल्म!

Rekha.khan@timesgroup.com

निर्देशक-जगन शक्ति

कलाकार-अक्षय कुमार, विद्या बालन, सोनाक्षी सिन्हा, तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हारी, शरमन जोशी, नित्या मेनन, संजय कपूर, जीशान अयूब आदि।

क्रिटिक रेटिंग-***1/2

बिजनेस रेटिंग- ***1/2

अवधि -2 घंटा 13 मिनट

जॉनर-ड्रामा-हिस्ट्री

आजादी का दिन हो और साथ में राखी जैसा त्योहार और उस पर सोने के सुहागा जैसा एक्सटेंडेड वीकेंड, तो दर्शक का मन एक ऐसी फिल्म देखने को करता है, जो उसे गर्व महसूस करवाने के साथ-साथ खुशी भी दे। दर्शकों की इसी नब्ज को अक्षय कुमार ने पकड़ा। वे मंगलयान जैसे देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित और गर्वीले मिशन की गाथा को दर्शानेवाली मिशन मंगल जैसी फीलगुड फिल्म ले आए।

कहानी इसरो के मार्स प्रॉजेक्ट पर आधारित है, जब 24 सितंबर 2014 को इसरो (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाजेशन) की कई महिला साइंटिस्टों ने मंगल गृह के कक्ष में सेटेलाइट लॉन्च की थी। इसके बाद भारत विश्व भर में पहला ऐसा देश बना, जो काफी कम बजट में अपने पहले ही प्रयास में इस मिशन में सफल रहा। फिल्म 2010 से शुरू होती है, जहां इसरो का जाना-माना साइंटिस्ट और मिशन डायरेक्टर राकेश धवन (अक्षय कुमार) इसरो की ही साइंटिस्ट और प्रॉजेक्ट डायरेक्टर तारा शिंदे (विद्या बालन) के साथ मिलकर एक जीएसएलवी सी 39 नामक मिशन के अंतर्गत एक रॉकेट लॉन्च करता है, मगर दुर्भाग्य से उनका मिशन नाकाम साबित होता है। खामियाजे के फलस्वरूप राकेश को इसरो के खटाई में पड़े मार्स प्रॉजेक्ट वाले विभाग में भेज दिया जाता है। वहां होमसाइंस के नियम से तारा को मिशन मंगल का आइडिया सूझता है। इस प्रॉजेक्ट के लिए ये दोनों इसरो के हेड विक्रम गोखले को आश्वस्त करते हैं, मगर उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है बजट और नासा से बुलाए गए अफसर दिलीप ताहिल का कड़ा विरोध। राकेश की जिद और कमिटमेंट पर उसे ऐका गांधी (सोनाक्षी सिन्हा), कृतिका अग्रवाल(तापसी पन्नू), वर्षा पिल्ले (नित्या मेनन), परमेश्वर नायडू(शरमन जोशी) और एच जी दत्तात्रेय (अनंत अय्यर) जैसे नौसिखिए साइंटिस्टों की टीम दी जाती है। ये सभी साइंटिस्ट मंगल मिशन को लेकर जरा भी आश्वस्त नहीं हैं। इनकी अपनी निजी समस्याएं और सोच हैं। तारा शिंदे उनकी सोच को बदलकर उन्हें मिशन मंगल पर जी जान से जुटने को प्रेरित करती है।

निर्देशक जगन शक्ति ने फिल्म के जरिए अपना डेब्यू किया है। निसंदेह एक साइंस और सच्ची ऐतिहासिक घटना पर आधारित फिल्म के साथ वे अपना प्रभाव जमाने में कामयाब रहे हैं। हां, उन्होंने किरदारों को मास अपील देने के लिए कई जगह पर सिनेमैटिक लिबर्टी ली है, जो कुछेक जगह पर बचकानी भी लगती है, मगर इसके बावजूद उन्होंने इमोशन के सिरे को मजबूती से पकड़े रखा है। निर्देशक ने होमसाइंस और दूसरे साइंटिफिक तथ्यों के आधार पर मंगलयान मिशन के सफर को समझाने की कोशिश की है, मगर स्पेशल इफेक्ट्स के मामले में वे कमजोर साबित हुए हैं। क्रिस्प कहानी, प्रभावशाली बैकग्राउंड स्कोर और बांधकर रखनेवाला क्लाईमैक्स फिल्म के प्लस पॉइंट हैं, मगर फिल्म के अंत में पीएम की एंट्री और उनकी कॉमेंट्री की जरूरत नहीं थी।

सभी कलाकरों का अभिनय फिल्म को दर्शनीय बनाता है। अक्षय कुमार ने राकेश धवन की भूमिका को बहुत ही मजेदार ढंग से जिया है। उनके वन लाइनर्स पर दर्शक तालियां भी पीटते हैं। अभिनेत्री के रूप विद्या बालन हमेशा की तरह अपने जादू को जगाने में कामयाब रही हैं। एक दृश्य में वे अपने पति संजय कपूर से कहती है, ‘बेटी की इतनी फिक्र है, तो उसके दोस्तों के नंबर अपने पास रखो। मुझे गिल्टी फील करवाने से क्या फायदा?’ ऐका गांधी की भूमिका में सोनाक्षी हॉट लगने के साथ-साथ कन्विंसिंग लगी हैं। तापसी ने अपने किरदार की सहजता को बनाए रखा है। मंगल गृह के प्रकोप के मारे शरमन जोशी ने अपने चरित्र में अच्छा-खासा मनोरंजन किया है। संजय कपूर, नित्या मेनन, कीर्ति कुल्हारी, जीशान अयूब, अनंत अय्यर ने छोटी भूमिकाओं के बावजूद अच्छा साथ दिया है।

अमित त्रिवेदी के संगीत में, ‘मिशन मंगलम’ गाना ठीकठाक बन पड़ा है।

क्यों देखें-गर्व की अनुभूति और फीलगुड फैक्टर के लिए यह फिल्म देखी जा सकती है।

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