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मुंबई: मलबे में दबी 'जिंदगी', स्निफर डॉग की मदद

नवीन पांडे/विजय पांडे, मुंबईमुंबई के में मंगलवार को एक इमारत गिरने से 14 लोगों की मौत हो गई और बुधवार सुबह एनडीआरएफ की टीम स्निफर डॉग की मदद से मलबे में तलाशी कर रही है। दो नाबालिगों के शव भी मलबे से बुधवार सुबह निकाले गए। हालांकि, तबाही के मंजर के बीच बीएमसी और आपस में यह तय नहीं कर पा रही थीं कि बिल्डिंग की जवाबदेही किसकी थी। आशंका है कि अब भी मलबे में कई लोग दबे हैं और उनकी तलाश जारी है।दरअसल, डोंगरी स्थित केसरबाई बिल्डिंग में हुए अतिरिक्त निर्माण की जानकारी म्हाडा ने 1990 में बीएमसी को दी थी, लेकिन बीएमसी ने इस पर न तो ध्यान दिया, न ही कोई कार्रवाई की। अवैध निर्माण को गिराने की जिम्मेदार बीएमसी की थी। आश्चर्य की बात है कि 29 में एक बार भी बीएमसी का ध्यान इधर नहीं गया। वहीं, बीएमसी इसे म्हाडा की सेस बिल्डिंग बता रही है। बिल्डिंग के जर्जर होने के संदर्भ में स्थानीय निवासी ने 2017 में ही शिकायत की थी। (मलबे में जिंदगी की तलाश, देखें )
यह भी पढ़ें: क्या था मामलाबीएमसी के बी वॉर्ड से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, ‘2017 में स्थानीय निवासी ने हमें जर्जर इमारत के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद हमने सामान्य तौर पर नोटिस जारी किया था। बिल्डिंग के मालिक की ओर से स्ट्रक्चरल रिपोर्ट भी जमा की गई, जिसमें साफ तौर पर इमारत बेहद जर्जर होने की बात सामने आई थी।’ अधिकारी ने बताया, ‘रिपोर्ट में सेस बिल्डिंग होने की जानकारी मिलने के बाद बीएमसी ने म्हाडा को सूचित कर दिया। म्हाडा ने निवासियों को बिल्डिंग खाली करने का नोटिस भी जारी किया। 2017 में जारी हुई रिपोर्ट के आधार पर लोगों को हटा लिया गया होता, तो हादसे से बचा जा सकता था।’ यह भी पढ़ें: वहीं, एनबीटी के पास मौजूद कागजात के मुताबिक, जमीन मालिक बाई हीराबाई रहीमभाई अलू पारू और केसरबाई धर्माशय खाकू चैरिटेबल ऐंड रिलीजियस ट्रस्ट ने भी नोटिस जारी कर रीडिवेलपमेंट में निवासियों की ओर से सहयोग न मिलने की बात कही थी। साथ ही, भविष्य में होने वाली किसी भी प्रकार की घटना के लिए भी निवासियों की ही जिम्मेदारी बताई थी।यह भी पढे़ं:
किस बात पर विवाद

दरअसल, केसरबाई बिल्डिंग 25 (सी) म्हाडा की सेस इमारत है। बिल्डिंग का जो हिस्सा गिरा है, उसे म्हाडा अवैध निर्माण बता रही है। अवैध निर्माण की बात सही है, तो समय रहते बीएमसी को कार्रवाई करनी चाहिए थी। बीएमसी के मुताबिक, पूरा स्ट्रक्चर एक ही है। ऐसे में, सेस बिल्डिंग के चलते जवाबदेही म्हाडा की ही बनती है।


…इसलिए नहीं छोड़ते घर

जर्जर इमारतों को छोड़ने के बाद फिर घर मिलने का बेइंतहा इंतजार होने से किराएदार घर खाली नहीं करना चाहते। जमीन मालिक और निवासियों के बीच के संघर्ष के चलते पूरे शहर में इसी तरह की दिक्कत है। बी वॉर्ड म्हाडा के वॉर्ड ऑफिसर विवेक राही ने कहा कि बिल्डिंग म्हाडा की थी, उनके पास मौजूद कागजात में इस बात का जिक्र है। वहीं, म्हाडा के सीपीआरओ ने कहा है कि अवैध निर्माण के बारे में 1990 में ही बीएमसी को पत्र दे दिया गया था। इस सबके बीच समाजवादी पार्टी ग्रुप नेता रईस शेख ने मांग की है कि अवैध इमारतों को लेकर सरकार तत्काल कठोर कदम उठाए। उन्होंने कहा कि बीएमसी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकती।

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