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मोबाइल इंटरनेट : मनोरंजन व टाइमपास से आगे क्या?



गैजेट डेस्क.आम भारतीय मोबाइल यूज़र हर महीने औसतन 10.4 जीबी डेटा की खपत करने लगा है। यह 2018 का आंकड़ा है जो हाल ही में जारी किया गया है। असल में यह डेटा तो सिर्फ 4जी आधारित डेटा है। थ्री जी और टू जी के जरिए जो डेटा इस्तेमाल किया जाता है, वह अलग है। जब भारत का आम नागरिक इतनी बड़ी मात्रा में डेटा का उपभोग करने लगा है तो इसके बड़े गहरे अर्थ हैं। सबसे पहला निष्कर्ष तो यही निकलता है कि हमने देश में मोबाइल के साथ-साथ इंटरनेट का कितना बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया है। कुल मिलाकर करीब 50 करोड़ भारतीय आज इंटरनेट मोबाइल ब्रॉडबैंड सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। संयोगवश, यह आंकड़ा पूरे दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के तमाम देशों की कुल जनसंख्या से भी ज्यादा है। दिसंबर 2018 में अकेले 4 जी के यूज़र्स की संख्या 43.2 करोड़ थी।

मोबाइल तकनीक नेकिया हैतेजी से विस्तार

जरा सोचिए कि देश में पारंपरिक टेलीफोन का संजाल बिछाने में कितने दशकों का समय लगा और उसके बाद भी कुल मिलाकर देश में कितने लैंडलाइन टेलीफोन उपभोक्ता थे? अनगिनत गांवों में सिर्फ एक टेलीफोन कनेक्शन हुआ करता था और उनसे भी कई गुना गांवों में तो एक भी टेलीफोन नहीं था। यहां तक कि वहां के कई लोगों ने इसका नाम तक नहीं सुना था। दूसरी तरफ मोबाइल तकनीक ने कितनी तेजी से और कितने व्यापक पैमाने पर टेलीफोन सेवा का विस्तार कर दिया है। यह जो इतना बड़ा नेटवर्क खड़ा हो गया है, उसके दर्जनों उपयोग संभव हैं।

पांच साल में डेटा की कीमत 90% तक घटी

सबसे बड़ा बदलाव जो देखने को मिल रहा है, वह है इंटरनेट के जरिए सामग्री का इस्तेमाल किए जाने में यानी कॉन्टेंट के उपभोग में। दूसरा बड़ा बदलाव है सूचनाओं के लेन-देन में और तीसरा लोगों को सोशल नेटवर्किंग के जरिए एक-दूसरे के करीब लाने में। मोबाइल ब्रॉडबैंड डेटा उपभोग का 70 से 80 फीसदी हिस्सा वीडियो देखने में खर्च किया जा रहा है। अभी दो-तीन साल पहले तक यह नामुमकिन था। आम भारतीय मोबाइल उपभोक्ता के पास मौजूद डेटा प्लान की इतनी क्षमता ही नहीं थी कि उस पर वीडियो देखे जा सकें। और अगर देख भी सकते थे तो पूरे महीने में बमुश्किल आठ से दस वीडियो देखे और डेटा प्लान की सीमा समाप्त।

साल 2017 की तुलना में प्रति यूज़र प्रति माह डेटा की खपत में 60 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरफ, पिछले पांच साल में 4जी डेटा की कीमतों में 90 फीसदी तक की कमी आ गई है। जाहिर है कि हम मोबाइल इंटरनेट के मामले में एक बड़ी उपभोक्ता क्रांति की तरफ बढ़ रहे हैं। फिलहाल आम हिंदुस्तानी इसका इस्तेमाल मनोरंजन, संचार या सेवाओं के इस्तेमाल में कर रहा है लेकिन आगे जाकर इससे बड़े बदलावों का रास्ता निकल सकता है।

अन्य उपयोगी क्षेत्रों में भी होना चाहिए इस्तेमाल

मोबाइल इंटरनेट उपभोक्ताओं के साथ-साथ 4जी डेटा की खपत के लिहाज से हम दुनिया के अग्रणी देशों में हैं, यह खुशी की बात हो सकती है लेकिन यहां कुछ चिंताजनक संकेत भी मिलते हैं। मसलन यह कि हम इस सुविधा का इस्तेमाल ज्यादातर वीडियो देखने या संदेश पाने-भेजने के लिए कर रहे हैं। मोबाइल इंटरनेट डेटा उपभोग का 90 फीसदी के आसपास हिस्सा इन्हीं दो चीजों पर जा रहा है। यह अच्छी बात है लेकिन इतनी बड़ी ताकत का इस्तेमाल बेहतर कामों के लिए भी हो सकता है। मिसाल के तौर पर 4जी के जरिए रिच कॉन्टेंट की डिलीवरी करने की क्षमता का इस्तेमाल शिक्षा के क्षेत्र में क्यों नहीं किया जा सकता? हम चिकित्सा के क्षेत्र में कब इनका प्रयोग बढ़ाएंगे?

जब 4जी के आने की खबर मिली थी तो यह माना गया था कि इससे चिकित्सा, दूरसंचार, मनोरंजन, शिक्षा, ई-प्रशासन और ई-कॉमर्स, सहयोगात्मक उत्पादकता (कोलेबरेशन), इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे क्षेत्रों में अनदेखा बदलाव आने वाला है। दूरसंचार तो ठीक है, मनोरंजन भी पहले से ही स्पष्ट था, लेकिन बाकी क्षेत्रों में बड़े बदलाव का अब भी इंतजार है। उम्मीद की जानी चाहिए कि 2019 के दिसंबर में जब मोबाइल इंटरनेट खपत के नए डेटा सामने आएंगे, तब तक हालात बदल चुके होंगे। अब सवाल यह है कि मोबाइल इंटरनेट का प्रसार भारत में इनोवेशन के कौन-से नए रास्ते खोलता है।

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science and tech talk by balendu sharma dadhich- mobile internet, what is the use other than entertainment & timepass

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