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यहां से 9 बार सांसद रह चुके हैं कमलनाथ, अब पुत्र नकुलनाथ कांग्रेस के टिकट पर मैदान में



छिंदवाड़ा.महाराष्ट्र से लगा मध्य प्रदेश का ये संसदीय क्षेत्र जब से अस्तित्वमें आया तब से यहां कांग्रेस का ही कब्जा है। 1997 में में उपचुनाव में जरूर यहां से भाजपा ने जीत दर्ज की। लेकिन, इसके बाद हुए हर आम चुनाव में कांग्रेस का ही कब्जा रहा है। देश में आपातकाल के बाद हुए चुनाव मे कांग्रेस ने पहली बार कमलनाथ को यहां से प्रत्याशी बनाया था।

मुख्यमंत्री कमलनाथ की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनके पुत्र नकुलनाथ परंपरागत संसदीय सीट छिंदवाड़ा से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला भाजपा उम्मीदवार नत्थन शाह कवरेती से है। भाजपा नया और आदिवासी चेहरा उतारकर कांग्रेस को उसके गढ़ में घेरना चाहती है। जबकि कांग्रेस कमलनाथ के परिवार पर भरोसा जता रही है। छिंदवाड़ा लोकसभा सीट में छिंदवाड़ा विधानसभा सीट सहित 7 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें से तीन आदिवासी बहुल हैं।

कांग्रेस का ही कब्जा

छिंदवाड़ा में पहला लोकसभा चुनाव साल 1951 में हुआ। तब से लेकर अब तक 1997 के उपचुनाव को छोड़कर यहां कांग्रेस का ही कब्जा है। कमलनाथ यहां से नौ बार सांसद रह चुके हैं। जुन्नारदेव, सौंसर, पंधुरना, अमरवारा, छिंदवाड़ा, चुरई,पारसिया यहां की विधानसभा सीटें हैं। सभी 7 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। छिंदवाड़ा जिले में मुख्य रुप से भाजपा व कांग्रेस का ही संगठन सक्रिय है।किंतुअमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में क्षेत्रीय दल के रुप में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की भी प्रभावी मौजूदगी है, जिसके नेता मनमोहन शाह बट्टी एक बार विधायक भी निर्वाचित हो चुके हैं।

उपचुनाव में हारे कमलनाथ: कमलनाथ साल 1980 से इस सीट से लोकसभा का चुनाव जीतते आ रहे हैं। 1996 में लोकसभा चुनाव से पहले कमलनाथ का नाम हवाला कांड में आ जाने के चलते पार्टी ने कमलनाथ को टिकट नहीं दिया। कमलनाथ की जगह उनकी पत्नी अलकानाथ को उम्मीदवार बनाया और वे जीत गईं। लेकिन पारिवारिक कारणों से अलकानाथ ने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया। इधर, कमलनाथ को भी हवाला कांड में क्लीन चिट मिल गई। इसके बादहुए उपचुनाव में कमलनाथ कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़े और भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा से हार गए।

कमलनाथ को नहीं पता था छिंदवाड़ा कहा हैं: राजनीतिक गलियारों में कहा जाता है कि जब कमलनाथ को मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाने का निर्णय इंदिरा गांधी ने लिया तो उन्होंने इंदिरा गांधी से ही पूछ लिया कि ये छिंदवाड़ा कहां है। 13 दिसंबर 1980 को इंदिरा गांधी छिंदवाड़ा लोकसभा सीट के प्रत्याशी कमलनाथ के लिए चुनाव प्रचार करने आई थीं। इंदिरा ने तब मतदाताओं से चुनावी सभा में कहा था कि कमलनाथ उनके तीसरे बेटे हैं। कृपया उन्हें वोट दीजिए।

संजय की खातिर गए थे जेल: कमलनाथ कांग्रेस के चुनिंदा दिग्गज नेताओं में से हैं जो गांधी परिवार की तीन पीढ़ियों के साथ काम कर चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उन्हें अपना तीसरा बेटा मानती थीं तो उनके छोटे बेटे संजय गांधी के वह स्कूली दोस्त थे। इसी वजह से वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भी काफी करीबमाने जाते हैं। कहा जाता है कि संजय गांधी की खातिर एक बार उन्होंने जज के ऊपर कागज का गोला तक फेंक दिया था। हालांकि इसके बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।

तीन किताबें लिख चुकें हैं, संगीत सुनना पसंद : कमलनाथ ने तीन किताबें भी लिखी हैं। इसमें इण्डियाज एनवायरनमेंटल कंसर्न्स, इंडियाज सेंचुरी और भारत की शताब्दी, प्रमुख हैं। इसके अलावा वाइल्ड लाइफ में उनकी काफी रुचि है, वहीं मनोरंजन के लिए वे संगीत सुनना पसंद करते हैं। कमलनाथ कोलकाता क्रिकेट और फुटबॉल क्लब, टॉलीगंज क्लब कोलकाता, दिल्ली फ्लाइंग क्लब के सदस्य और एक्स चीफ पैट्रन, दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन के सदस्य रहे हैं।

बड़े नेताओं में शुमार: कमलनाथ की गिनती देश के दिग्गज राजनेताओं में होती है। 18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मे कमलनाथ की स्कूली पढ़ाई मशहूर दून स्कूल से हुई। दून स्कूल में उनकी जान पहचान कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे संजय गांधी से हुई। 27 जनवरी 1973 को कमलनाथ अलका नाथ के साथ शादी हुई। उनके नकुलनाथ और बकुलनाथ दो बेटे हैं।

छिंदवाड़ा संसदीय सीट-

सन जीते हारे
1952 रायचंद्र भाई शाह(कांग्रेस) पन्नालाल भार्गव(निर्दलीय)
1957 बीकूलाल लखमिचंद(कांग्रेस) नारायण राव(कांग्रेस)
1962 बीकूलाल लखमिचंद(कांग्रेस) सनतकुमार(जनसंघ)
1967 गौरीशंकर रामकृष्ण मिश्रा (कांग्रेस) एचएस अग्रवाल(जनसंघ)
1971 गौरीशंकर रामकृष्ण मिश्रा (कांग्रेस) पुरषोत्तमदास गुप्ता(जनसंघ)
1977 गौरीशंकर रामकृष्ण मिश्रा (कांग्रेस) प्रतुलचंद्र द्विवेदी (भारतीय लोकदल)
1980 कमलनाथ(कांग्रेस) प्रतुलचंद्र द्विवेदी(जनता पार्टी)
1984 कमलनाथ(कांग्रेस) बत्राराम किशन(भाजपा)
1989 कमलनाथ(कांग्रेस) माधवलाल दुबे(जनता दल)
1991 कमलनाथ(कांग्रेस) चौधरी चंद्रभान(भाजपा)
1996 अलकानाथ(कांग्रेस) चौधरी चंद्रभान(भाजपा)
1997 सुंदरलाल पटवा(भाजपा) कमलनाथ(कांग्रेस)
1998 कमलनाथ(कांग्रेस) सुंदरलाल पटवा(भाजपा)
1999 कमलनाथ(कांग्रेस) संतोष जैन(भाजपा)
2004 कमलनाथ(कांग्रेस) प्रहलाद सिंह पटेल(भाजपा)
2009 कमलनाथ(कांग्रेस) मूरत राव भाजपा(कांग्रेस)
2014 कमलनाथ(कांग्रेस) चौधरी चंद्रभान(भाजपा)

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