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राजस्थान से चलकर गया पहुंचे दो जैन परिवारों ने 260 वर्ष पहले कराया था बहुआर चौराहे पर जैन मंदिर का निर्माण



रिलिजन डेस्क.राजस्थान से चलकर गया आए दो जैन परिवारों ने करीब 260 वर्ष पूर्व बहुआर चौराहा स्थित प्राचीन जैन मंदिर का निर्माण कराया था। उस समय मंदिर में मूलनायक के रूप में जैन धर्म के दूसरे तीर्थकर अजितनाथ भगवान विराजमान थे। काष्ठ की वेदी पर पाषाण पत्थर की 10 इंच की उनकी प्रतिमा थी, जिनका श्रद्धालु दर्शन-पूजन करते थे।

धीरे-धीरे गया में जैनियों की संख्या बढ़ी और यहां बसने लगे। संतों का आगमन भी शुरू हो गया। इसके बाद वर्ष 1844 के आसपास साधु संतों की सलाह पर पहली बार मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ हुआ। इस जीर्णोद्धार में मूलनायक के रूप में 23 वें तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ को विराजमान किया गया, तब से लेकर आज तक गया के जैन समाज के लोग प्राचीन जैन मंदिर में इनकी पूजा कर रहे हैं।

बता दें कि वर्ष 2007 में एक बार फिर मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ। अब इस प्राचीन मंदिर में भगवान आदिनाथ, चंद्रप्रभ भगवान, पद्मप्रभु भगवान, शांतिनाथ भगवान, मुनि सुब्रतनाथ भगवान, भगवान महावीर की प्रतिमा विराजमान है। श्री महावीर नवयुवक संघ के सह मंत्री आशीष जैन उर्फ पोलू ने बताया कि महावीर जयंती पर भव्य भंडारा का आयोजन किया जा रहा है। उद्घाटन एसडीओ सुरज सिन्हा करेंगे। उन्होंने बताया कि इस दिन श्रद्धालुओं के बीच करीब 150 किलो बुंदिया सेव गांधी चौक के पास बांटा जाएगा।

गया में जैन समाज के दो प्रमुख मंदिर
गया में जैन समाज का दो प्रमुख मंदिर है। एक बहुआर चौराहा प्राचीन जैन मंदिर और दूसरा रमना रोड स्थित जैन मंदिर। जैन समाज के लोगों की माने तो रमना रोड स्थित जैन मंदिर का निर्माण 123 वर्ष पूर्व हुआ था। यहां भगवान पार्श्वनाथ की सफेद पाषाण पत्थर की प्रतिमा मूलनायक के रूप में विराजमान है। शुरूआत में इस मंदिर में मात्र एक वेदी थी। धीरे-धीरे मंदिर का विस्तार हुआ और आज यहां पांच वेदी है। 2021 में मंदिर का 125 वां वर्षगांठ मनाया जाएगा। समाज द्वारा अभी से ही तैयारी शुरू कर दी गई है।

दो मुनिश्री के समाधिस्थल भी हैं यहां
दो मुनिश्री का समाधि स्थल भी “गया’ है। मुनिश्री देवेश सागर जी महाराज और मुनिश्री दुर्लभ सागर जी महाराज ने इसी धरती पर समाधि ली है। मुनिश्री देवेश सागर जी का समाधि आचार्य वर्द्धमान सागर जी महाराज और मुनिश्री दुर्लभ सागर जी महाराज का समाधि आचार्यशीतल सागर जी महाराज के सान्निध्य में हुआ। दोनों का समाधि स्थल गया का जैन धर्मशाला है। इधर, दूसरी तरफ बुधवार को महावीर जयंती के अवसर पर सुबह 08:00 बजे भगवान महावीर की शोभा यात्रा निकलेगी। छोटे-छोटे बच्चे भगवान महावीर के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाएंगे। काफी संख्या में समाज के लोग आयोजन में हिस्सा लेंगे।

गया में इन मुनिश्री का हो चुका है अब तक आगमन

  • आचार्य मुनिश्री शांति सागर जी महाराज
  • आचार्य मुनिश्री विमल सागर जी महाराज
  • आचार्य मुनिश्री सम्मति सागर जी महाराज
  • आचार्य मुनिश्री भरत सागर जी महाराज
  • आचार्य मुनिश्री पुष्य सागर जी महाराज
  • आचार्य मुनि श्री समंत सागर जी महाराज
  • आचार्य मुनिश्री मोक्ष सागर जी महाराज
  • आचार्य मुनिश्री विराज सागर जी महाराज
  • आचार्य मुनिश्री चैत्य सागर जी महाराज
  • आचार्य मुनिश्री विशुद्ध सागर जी महाराज
  • आचार्य मुनिश्री स्त्रोत सागर जी महाराज
  • मुनिश्री विशोग सागर जी महाराज
  • मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज
  • मुनि श्री विनिश्चय सागर जी महाराज
  • मुनिश्री सौरभ सागर जी महाराज
  • मुनिश्री शशांक सागर जी महाराज
  • मुनि श्री विराट सागर जी महाराज
  • मुनिश्री अपूर्व सागर जी महाराज
  • मुनिश्री अतुल सागर जी महाराज

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two Jain families went to rajasthan 260 years ago and build Jain temple

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