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Hindi News / राशिफल / राजा जंगल में रास्ता भटक गया, जंगल में एक बदबूदार झोपड़ी थी, राजा ने मजबूरी में वहीं रात गुजारी, लेकिन सुबह जब राजा उठा तो उसे वो झोपड़ी अच्छी लगने लगी और उसने वहीं रुकने का फैसला किया, ऐसा क्या था उस झोपड़ी में?

राजा जंगल में रास्ता भटक गया, जंगल में एक बदबूदार झोपड़ी थी, राजा ने मजबूरी में वहीं रात गुजारी, लेकिन सुबह जब राजा उठा तो उसे वो झोपड़ी अच्छी लगने लगी और उसने वहीं रुकने का फैसला किया, ऐसा क्या था उस झोपड़ी में?



रिलिजन डेस्क। प्राचीन समय में एक प्रतापी राजा थे। एक बार उन्हें कोई गंभीर रोग हो गया। राजवैद्य ने बताया कि कुछ ही समय में उनकी मृत्यु हो जाएगी। ये सुनकर राजा बहुत उदास हो गए। तभी उन्हें पता चला कि जंगल में एक तपस्वी रहते हैं, उनके पास हर समस्या का समाधान है।
राजा ढूंढते हुए उन तपस्वी के पास गए। तपस्वी को राजा ने सारी बात सच-सच बता दी। तपस्वी ने उन्हें आश्वासन दिया और कहा कि- मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूं। इसी कहानी में तुम्हारी समस्या का समाधान छिपा है। तपस्वी ने कहानी सुनाना शुरू की।
तपस्वी ने कहा कि- एक बार एक राजा जंगल में शिकार खेलने गया, लेकिन रास्ता भूल गया। तभी तेज बारिश होने लगी। जानवरों की आवाज सुनकर राजा डर गया। तभी सामने एक झोपड़ी दिखाई दी। राजा ने देखा कि उस झोपड़ी में एक बहेलिया रहता है, जो चल-फिर नहीं सकता।
इसलिए वो झोपड़ी में मल-मूत्र त्याग करता है। अपने खाने के लिए उसने झोपड़ी में काफी सारा मांस इकट्‌ठा किया हुआ है। बड़ी गंदी, छोटी, अंधेरी और दुर्गंधयुक्त वह झोपड़ी थी।राजा ने बहेलिये को पूरी बात बता दी और रात वहीं रुकने के लिए प्रार्थना की।
बहेलिये ने कहा- आश्रय के लालच में यहां कई लोग आते हैं, लेकिन जाते नहीं हैं। इस झोंपड़ी की गंध उन्हें ऐसी भा जाती है कि फिर वे उसे छोड़ना ही नहीं चाहते। इसलिए मैं आपको यहां नहीं ठहरने दूंगा। राजा ने प्रतिज्ञा की कि- सुबह होते ही वह इस झोपड़ी से चले जाएंगे।
जैसे-तैसे बहेलिये ने राजा को झोपड़ी में ठहरने की इजाजत दे दी। सुबह जब राजा उठा तो झोपड़ी की दुर्गंध उसे अच्छी लगने लगी। राजा वहीं रहने का विचार करने लगा। ये बत बहेलिये को पता चली तो वो भड़क गया और राजा को भला-बुरा कहने लगा।
इतनी कथा सुनाने के बाद तपस्वी ने राजा से पूछा- क्या राजा को उस स्थान पर सदा के लिए रहने के लिए झंझट करना उचित था? राजा ने कहा- वो कौन मूर्ख राजा था, जो ऐसी गंदी झोंपड़ी में रहना चाहता था?
तपस्वी ने कहा- वह मूर्ख तो स्वयं आप ही हैं। इस मल-मूल की गठरी देह (शरीर) में जितने समय आपकी आत्मा को रहना आवश्यक था, वह अवधि तो अब समाप्त होने वाली है। फिर भी आप झंझट कर रहे हैं और मरना नहीं चाहते। क्या यह आपकी मूर्खता नहीं है? तपस्वी की बात राजा को समझ आ गई उन्होंने शेष जीवन लोगों की सेवा करने का निर्णय लिया।

लाइफ मैनेजमेंट
भगवान ने हर काम के लिए एक समय तय किया है। मृत्यु का भी। सभी को उस नियम के अनुसार ही चलना चाहिए। ईश्वर के नियम के विरुद्ध जाना समझदारी नहीं है। अगर मृत्यु निकट हो तो अच्छे काम करके उसे सुधारने की कोशिश करनी चाहिए न कि बचने की।

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