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लड़के में लड़कियों जैसे लक्षण का कारण हार्मोनल भी, लेकिन समलैंगिक बनने के पीछे पसंद व माहौल जिम्मेदार



हेल्थ डेस्क.19 साल का अमन बेहद शर्मीला है। घर से बाहर कम निकलता है। लड़कियों जैसे हाव-भाव के कारण मजाक न बने, इसलिए दूसरों से बातचीत कम करता है। ऐसा ही एक और मामलाहैजो सामान्य से थोड़ा अलग है। नेहा की उम्र 20 साल है। कद-काठी लड़कियों जैसी है। आवाज में भारीपन है। चेहरे पर बाल भी थोड़े ज्यादा हैं। ज्यादा लोग इसे समलैंगिकता से जोड़कर देखते हैं जो गलत है। एक्सपर्ट के मुताबिक बच्चों में ऐसे बदलाव का कारण हार्मोनल असंतुलन भी लेकिन किसी का समलैंगिक होना उसकी अपनी चॉइस और आसपास का माहौल है। लड़के और लड़कियों में ऐेसे बदलाव की वजह क्या है, क्या जन्म से ही ऐसा होता है या इसका कोई इलाज नहीं है, ऐसे ही सवालों का जवाब जानने के लिए dainikbhaskar.com नेहार्मोन विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश केसवानीसे बात की। जानते हैं इनके जवाब…

1. क्यों लड़के लड़कियों की तरह करते हैं बर्ताव

  • हर मामले में लड़कों में लड़कियों और लड़कियों में लड़कों जैसे बिहेवियर का कारण हार्मोनल नहीं होता है। ज्यादातर लोग सोचते हैं प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे में हार्मोनल इंबैलेस के कारण ऐसी स्थिति बनती है, जबकि यह भी पूरी तरह से गलत है। इसका एक कारण जन्म के बाद बच्चे में हार्मोन का असंतुलन होना और दूसरा, बच्चा किस माहौल में पला-बढ़ा है।
  • इसे ऐसे समझा जा सकता है कि अगर जन्म के बाद लड़के में टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन की कमी होती है तो आवाज पतली होना, लोगों से घुलने-मिलने में इट्रेस्ट न लेना, लड़कों से ज्यादा बात न करना जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। वहीं लड़कियों में टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन की अधिकता होने पर शरीर लड़कियों के मुकाबले भारी दिखना, आवाज में भारीपन आना, चेहरे पर बाल और ऑर्गन में बदलाव देखने को मिलते हैं।

2. ऐसी स्थिति से कैसे निपटें
सबसे पहले बर्ताव में बदलाव की वजह जानें। कई मामलों में इसके लिए घर का माहौल भी जिम्मेदार होता है। जैसे लड़के को भी बहुत ज्यादा सुरक्षा देने की भावना रखना। ऐसी स्थिति में हार्मोन रोग विशेषज्ञ से मिलकर वजह और इलाज की जानकारी लें। कुछ मामलों में लड़कियों का स्पोर्ट्स में अधिक रूचि लेने के दौरान भी टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है और उसका बर्ताव लड़कों से मिलता-जुलता दिख सकता है।

3. क्या है इलाज
एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश केशवानी के अनुसार ऐसे बच्चों में सबसे पहले देखा जाता है कि कहीं इसका कारण हार्मोन की कमी या अधिकता तो नहीं। ऐसा मिलने पर हार्मोन थैरेपी दी जाती है और हार्मोन को संतुलित करने की कोशिश की जाती है। वहीं दूसरे मामलों में उसके लाइफस्टाइल को बदलने की सलाह दी जाती है।

4. एक्सपर्ट की पेरेंट्स को सलाह

  • बच्चे के ऐसे बिहेवियर को मजाक न बनाएं, उसे समझें और एक्सपर्ट की सलाह लें।
  • बच्चों को उनकी उम्र के दोस्तों के साथ समय भी गुजारने दें।
  • उन्हें अपनी बात कहने का मौका दें ताकि वे अपनी समस्या शेयर कर सकें।
  • बच्चों को लेकर ओवर प्रोटेक्टिव न हों, उन्हें फ्रीडम दें।
  • बहुत अधिक सख्ती या अधिक दुलार देने से बचें।

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